म्यांमार सीमा पर उग्रवादी गुटों की मदद कर रही चीनी सेना

म्यांमार सीमा पर उग्रवादी गुटों की मदद कर रही चीनी सेना
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यहां भारतीय जवान कर चुके हैं सर्जिकल स्ट्राइक

नई दिल्ली (एजेंसी)। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन को लगातार भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। घुसपैठ की हर कोशिश को ना सिर्फ नाकाम किया, बल्कि ड्रैगन की विस्तारवाद की नीति को भारत ने दुनिया के सामने उजागर कर दिया। अब चीन म्यांमार सीमा पर हथियारबंद उग्रवादी गुटों को चीनी सेना मदद कर रही है। भारतीय एजेंसियों ने चीनी मदद को लेकर अंदरूनी रिपोर्ट में चिंता जताई है। हालांकि, चीन इससे इनकार कर रहा है। आपको बता दें कि म्यांमार में भारतीय जवान सर्जिकल स्ट्राइक कर चुके हैं।

अधिकारियों का कहना है कि चीनी सेना उग्रवादी समूहों को हथियारों की आपूर्ति और उन्हें ठिकाने प्रदान करके मदद दे रही है। माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे से चीन पूर्वोत्तर में एक नया मोर्चा खोल रहा है। सूत्रों का कहना है कि म्यांमार में सशस्त्र समूह को मदद पहुंचाई गई। इन सशस्त्र समूहों में युनाइटेड वा स्टेट आर्मी और अराकान आर्मी शामिल हैं, जिन्हें इस साल आतंकी संगठन घोषित नामित किया गया है।

विद्रोही नेताओं ने ट्रेनिंग ली

अधिकारियों ने कहा कि कई सुरक्षा एजेंसियों ने रिपोर्ट दी है कि भारत के सबसे वांछित विद्रोही नेताओं में से कम से कम चार ट्रेनिंग और हथियारों के लिए मध्य अक्तूबर में चीनी शहर कुनमिंग में गए थे। म्यांमार सीमा के साथ बढ़ी गतिविधियों के मद्देनजर भारत ने इन इलाकों में म्यांमार से संपर्क साधकर सुरक्षा गतिविधियों को बढ़ाया है। एक अधिकारी ने कहा कि विद्रोही समूहों में से कुछ संकट पैदा करने के मकसद से गतिविधि चला रहे हैं, लेकिन हम शांति की बातचीत कर रहे हैं।

दोनों देशों का म्यांमार में निवेश

बता दें भारत और चीन दोनों ही म्यांमार में निवेश कर रहे हैं। चीन, बंगाल की खाड़ी के साथ अपने दक्षिणी प्रांत युन्नान को जोडऩे के लिए गैस पाइप लाइनों और सड़कों में निवेश कर रहा है। इस बीच, भारत अपने पूर्वोत्तर राज्यों को बंगाल की खाड़ी से जोडऩे के लिए 292 लाख अमेरिकी डॉलर की कलादान मल्टीमॉडल परियोजना में निवेश कर रहा है।


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