केंद्र से रस्साकशी के बीच मुख्य सचिव ने लिया रिटायरमेंट

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कोलकाता (एजेंसी)। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलापन बंदोपाध्याय को केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली बुलाए जाने के बाद खड़े हुए विवाद के बीच सोमवार को वे रिटायर हो गए हैं। उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। बनर्जी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह अपने राज्य के कोविड की लड़ाई के बीच अलापन को केंद्र में ट्रांसफर करने के केंद्र के आदेश का पालन नहीं करेंगी। उन्होंने बताया कि बंदोपाध्याय के रिटायर होने के बाद एचके द्विवेदी बंगाल के नए मुख्य सचिव होंगे।

वहीं, केंद्र सरकार ने अलपन बंदोपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई का मूड बना लिया है। बताया जा रहा है कि उन्हें चार्जशीट दी जाएगी। रिटायर होने के बाद भी कार्रवाई की तैयारी है।

सूत्रों के मुताबिक, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को रिपोर्ट करने में विफल रहने के लिए अलपन बंदोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार ने 28 तारीख को उन्हें दिल्ली अटैच करने का आदेश दिया था। उसी दिन प्र.म. मोदी के साथ बैठक को लेकर विवाद सामने आया था। सोमवार सुबह 10 बजे उन्हें दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक स्थित डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग में रिपोर्ट करना था, मगर 60 घंटे बाद जो हुआ उसने केंद्र के आदेश को ताक पर रख दिया।

सुबह 10 बजे तक मुख्य सचिव अलपन ने दिल्ली रिपोर्ट नहीं किया। इसकी बजाए सुबह के 11 बजे वो कोलकाता में राज्य सचिवालय पहुंचे। यहां उन्हें ममता बनर्जी के साथ यास तूफान और कोरोना से जुड़ी बैठक में हिस्सा लेना था। इससे जाहिर हुआ कि ममता सरकार ने केंद्र के फरमान को ठुकरा दिया था।

मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, उन्होंने कोई वजह नहीं दी थी। मैं हैरान हूं। मैंने फैसला किया है कि कोरोना के समय में हमें उनकी सेवाओं की जरूरत होगी। चाहे वह कोरोना हो या फिर यास, वे गरीबों, राज्य और देश के लिए अपनी सेवाओं को जारी रखेंगे।

बंदोपाध्याय को तीन महीने का कार्यकाल विस्तार मिला था, जिसे खारिज करते हुए उन्होंने रिटायरमेंट का फैसला लिया। वहीं, केंद्र सरकार ने उन्हें प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली रिपोर्ट करने का आदेश दिया था। उन्हें सोमवार सुबह 10 बजे दिल्ली स्थिति केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के ऑफिस में रिपोर्ट करना था, लेकिन उन्होंने न जाने का फैसला लिया और सीएम के साथ मीटिंग्स करते रहे। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से अनुशासनात्मक फैसला लिए जाने की चर्चा थी, जिसके पहले ही उन्होंने रिटायरमेंट का फैसला ले लिया।

इससे पहले, ममता बनर्जी ने केंद्र के आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह आदेश वापस लेने का अनुरोध किया था। बनर्जी ने कहा था कि उनकी सरकार बंदोपाध्याय को कार्यमुक्त नहीं कर रही है।


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