मौका भी दस्तूर भी – मोदी ने लगाया ऐसा दांव, कुछ बोल नहीं पाए राहुल

'मोदी सरकार ने बर्बरता की हदें पार कर दीं'
FILE PHOTO: Indian Prime Minister Narendra Modi addresses the nation during Independence Day celebrations at the historic Red Fort in New Delhi, August 15, 2020. REUTERS/Adnan Abidi/File Photo
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मौका भी दस्तूर भी – मोदी ने लगाया ऐसा दांव, कुछ बोल नहीं पाए राहुल-  पेगासस हैकिंग मामले में विपक्ष के विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप कार्ड खेल दिया है। उन्होंने ऐसा दांव खेला कि विपक्ष के पास जवाब नहीं रहा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसानों को समर्थन देने पहुंचे राहुल गांधी प्र.म. मोदी के इस दांव पर कुछ बोल तक नहीं पाए। यह दांव कुछ और नहीं, बल्कि देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार के नाम से राजीव गांधी का नाम हटाकर हॉकी के जादूगर के नाम पर ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्का’ करने का है। 41 साल बाद हॉकी में भारत के ओलिंपिक मेडल जीतने से अच्छा भला क्या मौका हो सकता था। यानी मौका भी है, दस्तूर भी।

ओलिंपिक हॉकी में पुरूष और महिला हॉकी टीम के शानदार प्रदर्शन की हर तरफ चर्चा है। जहां एक ओर 41 साल बाद पुरूष हॉकी में भारत ने मेडल जीता, वही दूसरी ओर महिला हॉकी टीम ने भी सेमीफाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया। प्र.म. मोदी ने भी इस ऐतिहासिक मौके को लपकते हुए राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार रख दिया।

‘चक दे इंडिया’ की धूम के बीच मास्टर स्ट्रोक

पेगासस के मुद्दे पर विपक्ष लगातार संसद की कार्यवाही ठप कर रहा है। संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा में हंगामे की तस्वीरें रोज सामने आ रही हैं। वहीं इन्हीं दिनों तोक्यो ओलिंपिक में हॉकी टीम ने पूरे देश को गर्व का मौका दिया है। दिल्ली से लेकर देहरादून तक हर तरफ ‘चक दे इंडिया’ की धूम है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जनभावनाएं पूरी तरह हॉकी टीम के पक्ष में हैं। हो भी क्यों ना, पीढिय़ों बाद टीम ने ओलिंपिक मेडल पर कब्जा जमाया है। प्र.म. मोदी को अकसर चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाना जाता है। मौका भी और दस्तूर भी वाली कहावत को सिद्ध करते हुए प्र.म. मोदी ने राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड का नाम बदलने में जरा भी देर नहीं लगाई। हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न अवॉर्ड करने के साथ ही प्र.म. ने विपक्ष को कहीं ना कहीं चुप कर दिया है।

ध्यानचंद जयंती से पहले विपक्ष के विरोध को किया कुंद

जाहिर है प्र.म. मोदी ने ऐसा दांव चला है जिस पर विपक्ष को जवाब नहीं सूझ रहा है। इसी महीने मेजर ध्यानचंद की जयंती पर 29 अगस्त को खेल दिवस भी है। मेजर ध्यानचंद ने तीन ओलिंपिक में कुल 39 गोल किए थे। बर्लिन में 1936 के अपने आखिरी ओलिंपिक में हॉकी के जादूगर ने 13 गोल दागे थे। फाइनल में हिटलर की मौजूदगी में जर्मनी को 8-1 से शिकस्त देकर भारत ने गोल्ड हासिल किया था। तब दूसरे हाफ में ध्यानचंद ने गोलों की बौछार कर दी थी। ऐसे में मोदी सरकार के फैसले की विपक्ष आलोचना भी नहीं कर सकता। प्र.म. मोदी ने धीरे से विपक्ष के विरोध के गुब्बारे में पिन चुभो दी है। ये ऐसा कदम है जिसकी सिर्फ तारीफ ही हो सकती है। आलोचना और राजनीतिक विरोध की बात तो विपक्ष सोच भी नहीं सकता। पेगासस पर आक्रामक मुद्रा में दिख रहे विपक्ष को इस दांव के जरिए प्र.म. मोदी ने करारा जवाब दिया है।


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