कांग्रेस के लिए अपना ही प्रदर्शन दोहराने की चुनौती

कांग्रेस के लिए अपना ही प्रदर्शन दोहराने की चुनौती
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नई दिल्ली (एजेंसी)। बिहार विधानसभा में कांग्रेस के सामने अपना ही प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है। पार्टी इस बार पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले ज्यादा सीट पर चुनाव लड़ रही है, पर गठबंधन का स्वरूप बदल गया है। पार्टी को इस बार उसी जदयू के खिलाफ वोट मांगने होंगे, जिसके साथ गठबंधन में उसने 2015 के चुनाव में पिछले दो दशक में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।

कांग्रेस इस बार वर्ष 2015 के मुकाबले काफी ज्यादा सीट पर चुनाव लड़ रही है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 41 सीट पर चुनाव लड़कर 27 सीट दर्ज की थी। जबकि इस बार पार्टी 70 सीट पर किस्मत आजमा रही है। पार्टी को उम्मीद है कि वह अपना पुराना प्रदर्शन बरकरार रखने में सफल रहेगी, पर कई नेता मानते हैं कि पार्टी की स्ट्राइक रेट कम हो सकता है।

बिहार विधानसभा चुनाव में 20 से अधिक सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस को पूरे 15 साल इंतजार करना पड़ा है। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 23 सीट मिली थी। पर वर्ष 2005 में हुए चुनाव में पार्टी सिर्फ 10 सीट ही हासिल कर पाई। इसके बाद 2010 के चुनाव में कांग्रेस के चार उम्मीदवार ही जीत पाए। जबकि कांग्रेस सभी 243 सीट पर चुनाव लड़ी थी।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि बिहार की मौजूदा राजनीतिक हालात में पार्टी के अपना पिछले प्रदर्शन दोहराना यकीकन एक चुनौती है क्योंकि, गठबंधन बदल गए हैं। वर्ष 2015 में कांग्रेस, राजद और जदयू का वोट एकजुट था, इस बार जदयू भाजपा के साथ चुनाव लड़ रही है। जाहिर है, चुनाव पर इसका असर होगा पर पार्टी पूरी कोशिश कर रही है।

पार्टी का मानना है कि चुनाव में 27 सीट जीतने के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं के हौंसले बढ़े हैं। यह उम्मीद जगी है कि बिहार में कांग्रेस अपना प्रदर्शन सुधार सकती है। प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। खासकर कोरोना में प्रवासी मजदूरों की वापसी को लेकर उन पर सवाल उठे हैं। ऐसे में राजद-कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों का गठबंधन चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगा।


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