ममता बनर्जी के 9 बड़े हमलों का केंद्र का जवाब – PM ने नहीं दी थी मीटिंग छोडऩे की परमिशन

मोदी ने ममता को खूब सुनाया- 'दीदी को मेरे मंदिर जाने पर भी गुस्सा आता है'
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नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल की सरकार के बीच तकरार अभी तक खत्म नहीं हुई है। तूफान यास के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में जो मीटिंग की, उसमें ममता बनर्जी और तब के चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय काफी देरी से पहुंचे और वापस भी चले गए। हालांकि, ममता बनर्जी ने कहा है कि वो इजाजत लेकर वापस गई थीं। ममता बनर्जी की ओर से लगातार इस मसले पर बयान दिए जा रहे हैं। अब केंद्र सरकार के द्वारा इन सभी बयानों का जवाब दिया गया है। केंद्र सरकार के सूत्रों की ओर से कुल 9 बयानों पर अपनी ओर से तथ्य सामने रखे गए हैं।

  1. ममता का बयान : प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और मीटिंग के बारे में देरी से जानकारी दी गई। मैंने अपना शेड्यूल प्र.म. के कार्यक्रम की वजह से छोटा किया।

केंद्र का फैक्ट : प्र.म. की यात्रा साइक्लोन यास के डैमेज को लेकर थी, ऐसे में तूफान से पहले इसे फिक्स नहीं किया जा सकता था। साइक्लोन अम्फान के वक्त भी यही टाइमलाइन फॉलो की गई थी। ओडिशा, बंगाल को एक साथ जानकारी दी गई। ओडिशा ने काफी अच्छी तरह से तैयारी की, जबकि वहां का दौरा पहले हुआ।

  1. ममता का बयान : मैंने प्र.म. के लिए इंतजार किया।

केंद्र का फैक्ट : प्र.म. कलईकुंडा में 1.59 बजे लैंड किए, जबकि ममता बनर्जी दोपहर 2.10 बजे वहां पर लैंड कीं। ये साफ होता है कि प्र.म. को ही इंतजार करना पड़ा। ये टीएमसी के सांसद के ट्वीट से साफ होता है कि जिन्होंने लिखा कि प्र.म. का इंतजार करना कोई बड़ी बात नहीं है। लैंडिंग के बाद सिर्फ 25 मिनट में वो प्र.म. से मिलीं, मीटिंग में रहीं और वापस चली गई।

  1. ममता का बयान : मेरे कार्यक्रम पहले से तय थे। ये जरूरी नहीं है कि हर बार सीएम ही प्रधानमंत्री को रिसीव करें, उसके अपने कार्यक्रम भी होते हैं।

केंद्र का फैक्ट : ममता बनर्जी ने मीटिंग में शामिल होने की बात की थी, लेकिन विपक्षी नेता के शामिल होने पर वह मुकर गई। इससे साबित होता है कि पहले से तय कार्यक्रम कोई मुख्य कारण नहीं हैं।

  1. ममता का बयान : सागर में उन्हें प्र.म. का हेलिकॉप्टर लैंड करने से पहले 20 मिनट इंतजार करना पड़ा।

केंद्र का फैक्ट : उनसे उम्मीद की जाती है कि वो पहले ही वहां मौजूद रहें, प्र.म. के पहुंचने से पहले सभी ऐसा ही करते हैं। प्र.म. की सुरक्षा एसपीजी के हाथ में है, जो एक प्रोफेशनल बॉडी है।

  1. ममता का बयान : चीफ सेक्रेटरी को लेकर जारी आदेश से वह चकित हैं, इसमें राज्य सरकार की कोई सलाह नहीं ली गई। ये संविधान का उल्लंघन है।

केंद्र का फैक्ट : आदेश बिल्कुल सही है, चीफ सेक्रेटरी ऑल इंडिया कैडर के अफसर हैं। उन्होंने अपनी संवैधानिक ड्यूटी का पालन नहीं किया, ऐसे में प्र.म. को कोई प्रेंजेटेशन नहीं दी गई और ना ही बंगाल सरकार का कोई व्यक्ति मीटिंग में रहा। चीफ सेक्रेटरी का रिटायरमेंट बताता है कि ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं।

  1. ममता का बयान : कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने चीफ सेक्रेटरी का कार्यकाल बढ़ाया, दोनों पक्षों की रजामंदी के बाद ये फैसला लिया गया।

केंद्र का फैक्ट : केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के साथ मिलकर ये फैसला किया।

  1. ममता का बयान : प्र.म.-सीएम की मीटिंग में एक लोकल विधायक को शामिल किया गया। केंद्रीय मंत्री या गवर्नर के शामिल होने पर आपत्ति नहीं जताई।

केंद्र का फैक्ट : वह लोकल विधायक विधानसभा में विपक्ष का नेता है, साथ ही उनके इलाकों में भी हानि हुई है। ऐसा कई मौकों पर हुआ है जब सरकार के अलावा अन्य पार्टियों के नेता मीटिंग में शामिल हुए हैं।

  1. ममता का बयान : चीफ सेक्रेटरी ने मीटिंग से पहले ही इस बारे में आपके सहयोगी अधिकारी को बताया गया, लेकिन उस तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया।

केंद्र का फैक्ट : ममता बनर्जी ने सिर्फ विपक्ष के नेता के कारण बैठक का बॉयकॉट किया। केंद्र ने इसमें कोई आपत्ति नहीं जताई, बल्कि रिव्यू मीटिंग के बाद प्र.म. को सीएम से मिलना था।

  1. ममता का बयान : मैंने मीटिंग में चीफ सेक्रेटरी के साथ प्रवेश किया, रिपोर्ट प्र.म. को दी और उनसे ही परमिशन लेकर दीघा के लिए रवाना हुई।

केंद्र का फैक्ट : प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी को बैठक छोडऩे की परमिशन नहीं दी थी।

दीदी के सलाहकार बने अलपन को केंद्र का नोटिस

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे भले आ गए हों, लेकिन सत्तारूढ़ टीएमसी और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के बीच खींचतान कम होती नहीं दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में नहीं पहुंचने वाले बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को लेकर केंद्र और ममता सरकार आमने-सामने है। इस मामले से परिचित एक अधिकारी ने कहा है कि केंद्र ने अलपन बंदोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। गृह मंत्रालय ने हाल ही में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अलपन बंद्योपाध्याय को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया है। नोटिस का 3 दिनों के अंदर जवाब नहीं देने पर उनके खिलाफ एफआईआर की जा सकती है। अधिकारी ने नाम नहीं छापने का अनुरोध करते हुए कहा, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के आदेश की अवहेलना करने वाले अधिकारी के खिलाफ विभाग द्वारा उपयुक्त कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंदोपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त किया है।


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