यासीन मलिक-बिट्टा कराटे के खिलाफ फिर खोले जाएंगे केस, डीजीपी दिलबाग ने कहा- सभी आतंकियों को दिलाएंगे सजा

Cases will be opened against Yasin Malik-Bitta Karate again, DGP Dilbagh said - all terrorists will be punished
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श्रीनगर (एजेंसी) । जम्मू कश्मीर में हत्याओं के आरोपी रहे यासीन मलिक और बिट्टा कराटे के खिलाफ दर्ज केस फिर खोले जा सकते हैं। यह संकेत जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने दिए हैं। दिलबाग सिंह ने कहा है कि हम जम्मू कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ दर्ज मामलों में जांच करेंगे। किसी भी आतंकी को छोड़ा नहीं जाएगा।

दरअसल, हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’  की रिलीज के बाद से यासीन मलिक और बिट्टा कराटे चर्चा में हैं। इसी बीच जब डीजीपी दिलबाग सिंह से पूछा गया था कि क्या यासीन मलिक और बिट्टा कराटे के खिलाफ दर्ज केसों को फिर खोला जाएगा, इस पर दिलबाग सिंह ने कहा, हम सभी आतंकी मामलों की जांच करेंगे। किसी भी आतंकी को बख्शा नहीं जाएगा।

कौन है बिट्टा कराटे?

बिट्टा कराटे अलगाववादी नेता है, कश्मीर में निर्दोष लोगों की हत्या और आतंकवाद से संबंधित आरोपों में जेल में डाला गया था। एक इंटरव्यू में बिट्टा ने खुद 20 कश्मीरी पंडितों की हत्या करने की बात कबूली थी। कराटे ने कहा था कि उसने 20 कश्मीरी पंडितों का मर्डर किया था। बिट्टा को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत भी गिरफ्तार किया गया था। बिट्टा पर 19 से अधिक उग्रवाद से संबंधित मामले थे। 2008 में अमरनाथ विवाद के दौरान भी उसे गिरफ्तार किया गया था। बिट्टा मार्शल आर्ट में ट्रेंड था, इसलिए उसके नाम के आखिर में लोग कराटे लगाने लगे।

2006 में जमानत पर हुआ रिहा

बिट्टा कराटे ने करीब 16 साल सलाखों के पीछे बिताए, आखिर में 23 अक्टूबर, 2006 को टाडा अदालत ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया। बिट्टा के संगठन जेकेएलएफ ने 1994 में एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की और एक अहिंसक आंदोलन शुरू करने का फैसला किया। हालांकि, इसके पहले उसने और उसके संगठन ने बंदूक के दम पर खूब हिंसा फैलाई, जिसके बारे में खुद बिट्टा ने कबूल किया है।

अलगाववादी नेता है यासीन मलिक

यासीन मलिक एक अलगाववादी नेता है। वह जम्मू- कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) से जुड़ा है। वह अभी जेल में बंद है। यासीन मलिक पर 25 जनवरी 1990 में भारतीय वायुसेना कर्मियों पर आतंकी हमले में शामिल होने का आरोप है। इसमें वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित चार वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई थी। यासीन पर पाकिस्?तानी आतंकियों के साथ संबंध रखने के आरोप लगते रहे हैं। 1990 में हिंदुओं का कत्लेआम कर उन्हें कश्मीर से बेदखल करने के आंदोलन में यासीन जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


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