मंत्रिमंडल फेरबदल का फॉर्मूला तैयार : दो पद वाले तीन मंत्रियों का बाहर होना तय

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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)।  राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर काउंट डाउन शुरू हो चुका है। गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख कभी भी तय हो सकती है। इस बीच मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नामों को लेकर सियासी अटकलों का दौर शुरू हो चुका है। फेरबदल में बाहर होने वालों और उनकी जगह शामिल किए जाने वाले नेताओं को लेकर सियासी हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दो पद वाले तीन मंत्रियों का मंत्रिमंडल से बाहर होना तय माना जा रहा है। कुछ मंत्री सियासी और परफॉर्मेंस के पैरामीटर्स पर हट सकते हैं।

गहलोत मंत्रिपरिषद में फिलहाल 10 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्री हैं। मुख्यमंत्री को मिलाकर 21 मंत्री हैं। तय कोटे के हिसाब से कुल 30 मंत्री बन सकते हैं। फिलहाल 9 पद खाली हैं। दो पद वाले 3 मंत्रियों को हटाने पर कुल 12 जगह खाली हो जाएगी। एक दो जगह खाली रखी जा सकती है। सीएम नए सिरे से कैबिनेट बनाने का बयान दे चुके हैं। नए फॉर्मूले के हिसाब से अब जातीय, क्षेत्रीय समीकरणों के अलावा पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को साधने का प्रयास होगा।

13 जिलों से कोई मंत्री नहीं

गहलोत सरकार में 13 जिलों से फिलहाल कोई मंत्री नहीं है। उदयपुर, प्रतापगढ़,डूंगरपुर, भीलवाड़ा, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़,चूरू,झुंझुनूं, सिरोही, धौलपुर, टोंक, सवाई माधोपुर,करौली जिलों से अभी एक भी मंत्री नहीं है। इन जिलों से मंत्रिमंडल में जगह दी जानी है।

डोटासरा, रघु और हरीश की जगह कई दावेदार

गोविंद सिंह डोटासरा, हरीश चौधरी और रघु शर्मा के पास संगठन में पद होने के कारण एक व्यक्ति एक पद के फॉर्मूले के हिसाब से इन्हें मंत्री पद से हटाना तय माना जा रहा है। तीनों की जगह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। हटने वाले तीनों मंत्रियों की जगह दो जाट और एक ब्राहृमण चेहरे को मौका मिलेगा। डोटासरा और हरीश चौधरी की जगह जाट चेहरों के तौर पर रामलाल जाट, बृजेंद्र सिंह ओला, हेमाराम चौधरी, नरेंद्र बुडानिया के नाम चर्चा में है। निर्दलीय महादेव सिंह खंडेला का नाम भी दावेदारों में है। रघु शर्मा की जगह राजेंद्र पारीक, महेश जोशी,राजुकमार शर्मा दावेदार हैं।

बसपा से कांग्रेस में आने वालों और निर्दलीयों में भी दावेदारों की भरमार

बसपा से कांग्रेस में आने वालों में राजेंद्र सिंह गुढ़ा,जोगिन्दर सिंह अवाना, लाखन सिंह दावेदारी कर रहे हैं। बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले छहों विधायक ही दावेदारी कर रहे हैं। निर्दलीयों में महादेव सिंह, संयम लोढ़ा के नाम चर्चा में हैं।

दलित-आदिवासी चेहरों में ये दावेदार

मास्टर भंवरलाल मेघवाल के निधन के बाद गहलोत सरकार में कोई दलित कैबिनेट मंत्री नहीं है। मास्टर भंवरलाल मेघवाल की जगह मंजू मेघवाल को मंत्री बनाए जाने की संभावना है। दलित वर्ग से खिलाड़ी लाल बैरवा,परसराम मोरदिया,अशोक बैरवा,गोविंद मेघवाल भी दावेदार हैं। आदिवासी चेहरों के तौर पर दयाराम परमार, महेंद्रजीत मालवीय के नाम दावेदारों में है। रामनारायण मीणा भी दावेदारों में है।

पायलट कैंप को भी साधने की कोशिश

पायलट कैंप से मुरारीलाल मीणा, दीपेंद्र सिंह शेखावत, बृजेंद्र सिंह ओला, हेमाराम चौधरी, रमेश मीणा मंत्री बनने के दावेदार हैं।

अल्पसंख्यक, गुर्जर चेहरों को भी मौका

अल्पसंख्यक वर्ग से अमीन खान, जाहिदा, दावेदारों में है। ?गुर्जर चेहरों के तौर पर शकुंतला रावत, डॉ. जितेंद्र सिंह और राजेंद्र सिंह बिधूड़ी के नाम दावेदारों में है। नहरी क्षेत्र से गुरमीत सिंह कुनर दावेदार है।

तबादलों में भ्रष्टाचार की पायलट ने की जांच की मांग

जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों में भ्रष्टाचार की जांच पर जोर देते हुए कहा है कि हमने जनता से ईमानदार एवं पारदर्शी सरकार देने का वादा किया था। पायलट ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि  मंगलवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षकों के तबादलों में पैसों के लेनदेन की बात पुछी तो तब शिक्षकों ने हां में जबाव दिया था। उन्होंने कहा कि तबादलों में भ्रष्टाचार को लेकर गहलोत अपनी सरकार के कामकाज में भ्रष्टाचार को लेकर गिरते नजर आ रहे है।

पायलट ने कहा कि हमने जनता को पारदर्शी एवं ईमानदार सरकार देने का विश्वास दिलाया था, इसी दिशा में हमें काम करना है तथा इसमें कमी पाये जाने पर उसकी जांच भी होनी चाहिए।   पायलट ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के रिकार्ड तोड़ दिये थे जिससे परेशान होकर जनता ने इस बार हमे चुना था जिस पर ध्यान रखने की जरूरत है। मंत्रीमंडल के विस्तार के बारे में पुछे जाने पर पायलट ने कहा कि सुलह कमेटी को बने हुए सवा साल हो गया है लेकिन अब पार्टी आलाकमान इस बारे में मन बना चुका है।


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