सिद्धू को नहीं भाई कैप्टन की कॉफी- सिद्धू को मंत्री बनाने पर नहीं हुआ फैसला

सिद्धू को नहीं भाई कैप्टन की कॉफी- सिद्धू को मंत्री बनाने पर नहीं हुआ फैसला
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चंडीगढ़ (एजेंसी)। माना जा रहा था कि बुधवार शाम नवजोत सिंह सिद्धू की लैंड क्रूजर गाड़ी पर झंडी लगने का फैसला हो जाएगा, लेकिन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बीच कॉफी पर चर्चा में कोई भी फैसला नहीं हो सका। बैठक महज 35 मिनट में ही निपट गई। सिद्धू खेल मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी के साथ कैप्टन के फार्म हाउस से बिना किसी से बात किए निकल गए। उधर, सरकार की ओर से कुछ स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि आखिर मीटिंग में हुआ क्या।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने बाद में ट्विटर पर कैप्टन व सिद्धू की एक फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘एक फोटो हजार शब्दों के बराबर होती है।’ सीएम के निकटवर्ती सूत्रों का कहना है कि दोनों नेताओं ने आज इस मुलाकात में हाथ जरूर मिलाया, लेकिन गले मिलने तक नौबत नहीं आई। सिद्धू और कैप्टन ने साथ कॉफी जरूर पी और ज्यादातर पारिवारिक बातें ही हुईं। चर्चा थी कि सिद्धू को कैबिनेट में एडजस्ट करने के बारे में आज कोई न कोई फैसला हो जाएगा, लेकिन मीटिंग में जाने से पहले उनकी पत्नी डाक्टर नवजोत कौर सिद्धू ने जिस तरह से बेबाकी से अपनी बात रखी, उससे ही साफ हो गया था कि आज कुछ नहीं होने वाला। डा. सिद्धू ने कहा कि अब कोई एक साल में मंत्री बनकर क्या परफारमेंस दिखा पाएगा। उन्होंने कहा कि वह पद के पीछे नहीं भागते, बल्कि उनके लिए पंजाब ही महत्वपूर्ण है।

नवजोत सिद्धू ने बाद में अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा- ‘आजाद रहो विचारों से लेकिन बंधे रहो संस्कारों से, ताकि आस और विश्वास रहे किरदारों पे।’ साफ है कि वह अपनी बात बेबाकी से रखने में पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन संस्कार में बंधे कहकर उन्होंने अपने लिए पार्टी के दरवाजे भी बंद नहीं किए हैं, एक खिड़की खुली रखी है। सियासी हलकों में चर्चा है कि पार्टी उन्हें इस चुनावी साल में किसी भी तरह से उपयोग में रखना चाहती है। अगर सिद्धू जैसा बेबाक नेता उनके साथ नहीं रहता तो इसका संदेश अच्छा नहीं जाएगा।

सिद्धू के पार्टी प्रधान बनने की भी अटकलें पिछले कई दिनों से लग रही हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए यह फैसला लेना मुश्किल है, क्योंकि मुख्यमंत्री और पार्टी प्रधान दोनों महत्वपूर्ण पद किसी एक वर्ग को ही नहीं दिए जा सकते। 2017 के चुनाव में हिंदूू वर्ग खुलकर कांग्रेस के पक्ष में रहा है। सुनील जाखड़ को हटाकर कांग्रेस हिंदूू वर्ग को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। दूसरा, सिद्धू के पास संगठन में काम करने का कोई अनुभव भी नहीं है। उन्हें एडजस्ट करने के फार्मूले में उन्हें इस चुनावी साल में प्रचार कमेटी का चेयरमैन बनाने की भी चर्चा है। उधर, पता चला है कि पार्टी के पंजाब प्रभारी हरीश रावत भी 20 मार्च को पंजाब आ रहे हैं। उनके आने पर क्या यह रूकी हुई बात आगे बढ़ पाएगी, इसको लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। गौरतलब है कि रावत पहले ही सिद्धू से कई बार बात-मुलाकात कर चुके हैं।


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