कर्नाटक चुनाव के लिए भाजपा का प्लान, योग दिवस पर बेंगलुरू में रहेंगे प्र.म. मोदी, 10 महीने पहले ही कैम्पेन की तैयारी

कर्नाटक चुनाव के लिए भाजपा का प्लान, योग दिवस पर बेंगलुरू में रहेंगे प्र.म. मोदी, 10 महीने पहले ही कैम्पेन की तैयारी
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बेंगलुरू (एजेंसी)। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से तेज हो गई हैं। मोदी 21 जून को योग दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए बेंगलुरू का दौरा करेंगे। मोदी के दौरे से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शनविार को यहां पहुंचे। मोदी के आगमन के साथ धुंआधार प्रचार की तैयारी है। पार्टी पश्चिम बंगाल स्टाइल में आक्रामक प्रचार अभियान छेड़ेगी। चुनावों में अभी 10 माह का समय बचा है, लेकिन भाजपा 150 सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। प्रधानमंत्री के दौरे के बाद संघ ने 23-24 जून को बेंगलुरू में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और कुछ सीनियर मंत्रियों की एक बैठक बुलाई है, ताकि यह एनालिसिस किया जा सके कि क्या कुछ क्षेत्रों में सरकार की अपनी कथित कमी और भ्रष्टाचार का असर भाजपा के चुनावी पर पड़ रहा है। प्र.म. मोदी के दौरे के बाद गृह मंत्री और मुख्य चुनाव रणनीतिकार अमित शाह भी कर्नाटक में पहुंचेंगे।

विधान परिषद चुनाव में दो सीटों पर कांग्रेस की जीत : चुनावी तैयारियों में तेजी का एक बड़ा कारण ये भी है कि विधान परिषद चुनाव की 4  सीटों पर हुए चुनाव ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। पार्टी को चार में से दो सीटें मिलीं और इतनी ही सीट जीतकर कांग्रेस ने वापसी का दमखम दिखाया है। ऐसे में भाजपा इसे चुनाव पूर्व घर को दुरूस्त करने के संकेत भी मान रही है। चुनाव नतीजे भाजपा नेताओं के एक वर्ग के लिए गहरी चिंता का विषय है कि जब कर्नाटक में सीएम बसवराज बोम्मई के नेतृत्व में एक साल से भी कम समय में विधानसभा चुनाव होने हैं, तो वे कनार्टक में औसत प्रदर्शन को अंजाम दे रहे हैं।

इस बीच राज्य की एक और प्रमुख पार्टी, यानी एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व वाली पार्टी जद (एस) के लिए तो काफी निराशाजनक रहे हैं। जेडीएस अपने ही गढ़ मांड्या-मैसूर में हार गई। कांग्रेस की जीत ने भाजपा को चिंतिंत कर दिया है। पार्टी सूत्रों ने खराब प्रदर्शन के लिए मैसूर क्षेत्र में पार्टी नेताओं के बीच गहरी अंदरूनी कलह को जिम्मेदार ठहराया है।

कांग्रेस को अभी सरकार के खिलाफ एंटी इन्कम्बैंसी का बड़ा सहारा : भाजपा के हिंदुत्व के मुद्दे और पीएम मोदी के चेहरे के मुकाबले अभी कनार्टक में कांग्रेस को भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी इन्कम्बैंसी का बड़ा सहारा है। कांग्रेस कर्नाटक के दक्षिणी हिस्से में अपनी पकड़ के भरोसे और भाजपा के भीतर सियासी संघर्ष को आधार बना रही है। उधर, जेडीएस के देवेगौड़ा का दांव कुछ अलग है। वे कांग्रेस और भाजपा में जो भी बड़ी पार्टी होगी उसके साथ सरकार बनाने में जाने की मंशा में हैं।


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