कांग्रेस को ‘दर्द’ देने की तैयारी में भाजपा!, सुभाष चंद्रा भाजपा समर्थक दूसरे रास प्रत्याशी

कांग्रेस को 'दर्द’ देने की तैयारी में भाजपा!, सुभाष चंद्रा भाजपा समर्थक दूसरे रास प्रत्याशी
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। राजस्थान राज्यसभा चुनाव में सुभाष चंद्रा की एंट्री से मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा ने नामांकन दाखिल कर दिया है। राजस्थान की 4 राज्यसभा सीटों पर 5 उम्मीदवार आने से सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल गए है। कांग्रेस के तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए राह मुश्किल हो गई है। मौजूदा सियासी गणित कांग्रेस के पक्ष में है लेकिन भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर दी है। भाजपा की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस ने रणनीति बदली है। कांग्रेस ने जयपुर के एक होटल में विधायकों को प्रशिक्षण के नाम पर बाड़ेबंदी की तैयारी कर ली है। कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। तीनों ही उम्मीदवार बाहरी है। कांग्रेस विधायक बाहरी उम्मीदवारों को विरोध कर रहे हैं। मंगलवार को डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने विधानसभा पहुंचकर नामांकन दाखिल किया। इस दौरान वसुंधरा राजे, सतीश पूनिया, गुलाबचंद कटारिया और राजेंद्र राठौड़ समेत तमाम वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।

भाजपा को दूसरी सीट के लिए 11 वोट चाहिए

मौजूदा संख्या बल के हिसाब से भाजपा एक सीट पर जीत रही है। दूसरी सीट के लिए उसे 11 वोट चाहिए। भाजपा ने घनश्याम तिवाड़ी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। सुभाष चंद्रा भी मैदान में है। भाजपा के 71 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट चाहिए। दो उम्मीदवारों के लिए 82 वोट चाहिए। भाजपा समर्थक दूसरे उम्मीदवार को जीतने के लिए 11 वोट कम पड़ रहे हैं। अगर हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी के 3 विधायकों का समर्थन भाजपा को मिलता है तो कुल संख्या 74 हो जाती है। फिर दूसरे उम्मीदवार के लिए 8 वोटों की कमी रहती है। कांग्रेसी खेमे में सेंध लगाकर 8 वोट का प्रबंध करने पर ही भाजपा समर्थक दूसरा उम्मीदवार जीत सकता है। कांग्रेस के रणनीतिकार कांग्रेस के 108, 13 निर्दलीय, एक आरएलडी, दो सीपीएम और दो बीटीपी विधायकों को मिलाकर 126 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। इसलिए मुकाबला बहुत रोचक है। कांग्रेसी खेमे से भाजपा कुछ निर्दलीयों और नाराज कांग्रेस विधायकों में सेंध लगाने के प्रयास में है।

गहलोत ने की नाराज विधायकों को मनाने की कवायद

नाराज चल रहे कांग्रेस विधायक एवं यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश घोघरा ने सीएम अशोक गहलोत से मंगलवार को मुलाकात की है। गणेश घोघरा ने हाल में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। माना जा रहा है कि घोघरा इस्तीफा वापस लेने के लिए तैयार हो गए है। राजस्थान में संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में है। गहलोत के मंत्री महेश जोशी ने कहा कि कांग्रेस को 126 विधायकों का समर्थन है। भाजपा ने विधायकों की खरीद फरोख्त के लिए निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा को समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले भी कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों की खरीद-फरोख्त करने की कोशिश की थी, लेकिन भाजपा के मंसूबे सफल नहीं हुए। कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने बाहरी उम्मीदवार बनाए जाने पर नाराजगी जताई है। सीएम गहलोत को लिखे पत्र में भरत सिंह ने कहा कि बाहरी उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद ‘लाट साहब’ बन जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद विधायकों से मिलते तक नहीं है। निर्दलीय विधायक एवं सीएम के सलाहकार संयम लोढ़ा ने भी बाहरी उम्मीदवारों का विरोध किया है।

कांग्रेस के सामने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती

कांग्रेस के पास 2 सीटों पर जीत के लिए बहुमत है लेकिन तीसरी सीट पर जीत के लिए उसे निर्दलीय विधायकों का सहारा लेना पड़ेगा। ऐसे में भाजपा भी 2 सीटों पर प्रत्याशी खड़ा कर इस सियासी जंग को रोचक बना दिया है। कांग्रेस के पास 108 विधायक, भाजपा के पास 71, निर्दलीय 13, आरएलपी 3, बीटीपी 2, माकपा 2 और आरएलडी के पास एक विधायक है। कांग्रेस को सभी 13 निर्दलीय विधायकों ने समर्थन का ऐलान किया है। माकपा के 2 विधायकों का भी कांग्रेस के  ऐसे संकेत पार्टी के नेता प्रकाश करात ने हाल में दिए थे। आरएलडी के एक विधायक का समर्थन भी कांग्रेस को मिलेगा। संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस के 3 सीट जीतने के आसार है, लेकिन जिस तरह पार्टी ने बाहरी उम्मीदवारों पर दांव खेला है। उससे क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ गई है।  भाजपा नेताओं का दावा है कि कांग्रेस के विधायक संपर्क में है। ऐसे में सीएम अशोक गहलोत के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के विधायको को एकजुट करने की रहेगी।

भाजपा कर सकती है कांग्रेस में सेंधमारी

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के विधायकों के संपर्क में रहने का दावा किया है। नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और पूर्व शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि कांग्रेस के विधायक उनसे संपर्क में है। दोनों नेताओं ने निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिलने का भी दावा किया है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान की 4 राज्यसभा सीटों के लिए 10 जून को मतदान होना है। राजस्थान से ओमप्रकाश माथुर, केजे अल्फोंस, राम कुमार वर्मा और हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर का कार्यकाल पूरा हो गया है। ये चारों सीटें भाजपा के पास थी। इनका कार्यकाल 4 जुलाई तक रहेगा।


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