भाजपा सांसद ने पूछा- देश में कितने शहरी गरीब

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नई दिल्ली (एजेंसी)। राज्यसभा में भाजपा सांसद ने शहरी गरीबों के बारे में सवाल किया था कि देश में कितने शहरी गरीब हैं और सरकार के पास इनका कोई आंकड़ा है या नहीं? इसके जवाब में सरकार ने घुमाकर जवाब दिया और बताया कि गरीबों की संख्या का आकलन अब योजना आयोग द्वारा किया जाता है। इसके साथ ही सरकार ने शहरी गरीबों के लिए कई कल्याणकारी योजना चलाने की बात कहकर भाजपा सांसद के सवाल से पल्ला झाड़ लिया।

खबर के अनुसार, भाजपा के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने सरकार से पूछा कि क्या सरकार के पास शहरी गरीबों के बारे में बताने वाला कोई पैमाना है? और अगर ऐसा कोई पैमाना नहीं है तो क्या सरकार यह पता लगाने की योजना बना रही है कि देश में कितने शहरी गरीब हैं? भाजपा सांसद के इस सवाल पर सरकार के आवासीय और शहरी मंत्रालय ने सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि देश में गरीबों की संख्या का आकलन योजना आयोग द्वारा किया जाता है।

मंत्रालय ने कहा कि योजना आयोग इसका आकलन विभिन्न विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर करता है। सरकार के अनुसार, आखिरी बार देश में गरीबी का आकलन योजना आयोग द्वारा साल 2011-12 में तेंदुलकर समिति द्वारा किया गया था। साल 2013 में इस समिति की रिपोर्ट जारी की गई थी।

राकेश सिन्हा ने आगे पूछा कि सरकार शहरी गरीबों की आजीविका को सुनिश्चित करने और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन देने के लिए क्या कदम उठा रही है? इस पर सरकार ने कहा कि देश के शहरी गरीबों के जीवन में सुधार लाने और गरीबी मिटाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं।

बता दें कि बीते मई माह में जब कोरोना वायरस माहमारी के बीच केन्द्र सरकार ने आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था तो उसमें शहरी गरीबों के लिए भी प्रावधान किया गया था। इसके तहत सरकार ने शहरी गरीबों को उन्हीं शहरों में जहां वो काम करते हैं, सस्ते किराए के मकान उपलब्ध कराने की योजना बनायी थी।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यह काम किया जाना है। जिसमें सरकार खाली सरकारी आवासों को इस योजना के लिए इस्तेमाल करेगी। साथ ही नए मकान भी बनाएगी। राज्य सरकारों को भी छूट देकर इस काम के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है। साथ ही जो उद्योगपति अपनी फैक्ट्री के आसपास ही अपने कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था करेंगे, उन्हें भी सरकार की तरफ से लाभ दिया जाएगा।


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