बिहार का वह विधायक जिसे मारी गई थी 107 गोलियां

बिहार का वह विधायक जिसे मारी गई थी 107 गोलियां
Share

पूर्णियां (एजेंसी)। बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है। हर दल के नेता अपने-अपने हिसाब से वोट मांगने की कोशिश में जुटे हैं। चुनाव के इस दौर में बिहार के चौक-चौराहों पर पुराने नेताओं की भी बातें होने लगी है। खासकर उन नेताओं की जो जनप्रिय रहे। ऐसे में हम पूर्णियां विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे वाम नेता अजित सरकार के बारे में बात करेंगे।

सीमांचल की राजनीति में तेजी से  – बढ़ रहा था वह नेता

साल 1980 में पूर्णियां विधानसभा सीट से माकपा ने अपने युवा नेता अजित सरकार को उम्मीदवार बनाया था। अजित सरकार शहर के चर्चित होम्योपैथ डॉक्टर के बेटे थे। इस नेता की 107 गोलियां मारकर हत्या की गई थी। अजित सरकार का जन्म 1947 में बिहार के पूर्णियां में हुआ था। पूर्णियां और आसपास के इलाके को सीमांचल कहते हैं क्योंकि यह इलाका नेपाल और पश्चिम बंगाल का सीमावर्ती है। सीमांचल के तहत सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा और कटिहार आते हैं। सीमांचल में कोसी नदी बहती है। इसके बाढ़ के प्रकोप के चलते यहां के लोग गुरबत की जिंदगी जीते हैं।

सामंतवाद के खिलाफ थे अजित सरकार

इसी जमीन पर पले बढ़े अजित सरकार के मन में बचपन से ही सामंतवाद के खिलाफ नफरत की भावना पनप गई थी। बड़े होकर अजित सरकार जुझारू माक्र्सवादी बन गए। उन्होंने जमींदारों की जमीन कब्जाकर उसे गरीबों में बांटना शुरू कर दिया। गरीब लोग अजित सरकार को अजित दा कहकर बुलाते थे।

एक रूपये के सिक्के जुटाकर  – करते चुनाव प्रचार

सरकार का दफ्तर पूर्णियां के झंडा चौक के पास था। चुनाव लडऩे की अजित सरकार की अनोखी शैली थी। वह चुनाव प्रचार के नाम पर एक गमछा बिछाकर बाजार में बैठ जाते और आने जाने वालों को कहते कि वे उनके गमछे में एक रूपये का सिक्का डाल दें। एक रूपये से ज्यादा डालने की किसी को भी मनाही थी। देखते ही देखते अजित सरकार के गमछे में एक रूपये के सिक्कों का ढेर लग जाता।

किराए के मकान में रहते थे – अजित सरकार

अजित सरकार उन सिक्कों को लेकर घर लौटते और उनकी गिनती करते। इससे अनुमान लगा लेते की कमसे कम उन्हें इतने वोट तो मिलेंगे ही। अजित सरकार लगातार चार बार पूर्णियां से विधायक बने। उस दौर में बिहार की राजनीति में बंदूक और संदूक का दौर था। बंदूक यानी बाहुबल और संदूक यानी धनबल। यानी जिस प्रत्याशी के पास गुंडे और पैसे होते ही नेता सांसद या विधायक बनता था।

बिहार की ऐसी राजनीति में अजित सरकार का उदय एक अनोखी घटना थी। अजित सरकार चार-चार बार विधायक बनने के बाद भी अपने लिए कोई निजी संपत्ति अर्जित नहीं की थी। वे पूर्णियां के दुर्गाबाड़ी मोहल्ले में एक किराए के मकान में रहते थे।


Share