आईसीसी में फिर फहराएगा बीसीसीआई का परचम, गांगुली-शाह में होगी जोर आजमाइश

BCCI's flag will be hoisted again in ICC, Ganguly-Shah will try hard
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नई दिल्ली (एजेंसी)। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी के अध्यक्ष पद के लिए आमने-सामने हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया है कि गांगुली और जय शाह दोनों ही आईसीसी अध्यक्ष बनने के इच्छुक हैं और दोनों के बीच इस पद के लिए सीधी टक्कर हो सकती है। मौजूदा चेयरमैन ग्रेग बार्कले का कार्यकाल इस साल नवंबर में पूरा हो रहा है और वो अपना कार्यकाल बढ़ाएं, इसकी संभावना बेहद कम है। नियमों के तहत हर दो साल में चेयरमैन चुनना होता है, जो अधिकतम 6 साल की अवधि तक रह सकता है ।

सूत्रों ने बताया कि आईसीसी के मौजूदा चेयरमैन बार्कले, जिनके बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव और सचिव शाह के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं, अपनी पेशेवर प्रतिबद्धताओं के कारण अपने कार्यकाल को बढ़ाना नहीं चाहते हैं। बार्कले ऑकलैंड स्थित एक कमर्शियल वकील हैं और अनुभवी कंपनी डायरेक्टर भी हैं, जो न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की अलग-अलग कंपनियों के बोर्ड में शामिल हैं। हालांकि, आईसीसी के प्रवक्ता ने बार्कले के पद छोडऩे की बात को खारिज कर दिया।

बार्कले का कार्यकाल नवंबर में पूरा होगा

बता दें कि आईसीसी का वार्षिक सम्मेलन जुलाई में होना है। लेकिन बार्कले ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप के अंत तक अध्यक्ष के रूप में बने रह सकते हैं, क्योंकि उन्होंने नवंबर 2020 में कार्यभार संभाला था। आईसीसी की इस हफ्ते एक बोर्ड मीटिंग होने वाली है और सौरव, जोकि आईसीसी की क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन भी हैं, वो इसके लिए दुबई में मौजूद रहेंगे। पूर्व भारतीय कप्तान गांगुली आईसीसी की कमान संभालने के लिए पसंदीदा विकल्प हो सकते हैं। लेकिन जय शाह के दावे को भी खारिज नहीं किया जा सकता है। क्योंकि शाह एशियन क्रिकेट काउंसिल की प्रेसिडेंट हैं।

2023 वल्र्ड कप में भारतीय हो सकता है आईसीसी चेयरमैन

सूत्र ने बताया कि शाह ने आईसीसी का चेयरमैन बनने के लिए काफी दिलचस्पी दिखाई है। यह देखते हुए कि 2023 में वनडे विश्व कप का आयोजन भारत में होना है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि उस वक्त बीसीसीआई से ही किसी शख्स के हाथों में आईसीसी की बागडोर होगी।

गांगुली ने अभी तक अपना रूख साफ नहीं किया

जब भारत ने आखिरी बार 2011 में विश्व कप की मेजबानी की थी, तब शरद पवार आईसीसी के मुखिया थे। यह देखना होगा कि सौरव आईसीसी के चेयरमैन का पद संभालने के इच्छुक हैं या नहीं, क्योंकि अतीत में उन्होंने कहा कि अभी उनकी उम्र कम है और उन्हें किसी तरह की जल्दबाजी नहीं है। बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में गांगुली के तीन साल इस अक्टूबर में पूरे होंगे। उनके पास कूलिंग ऑफ पीरियड में जाने से पहले 3 साल का एक और कार्यकाल पूरा करने का विकल्प होगा।

पीसीबी की भूमिका भी अहम रहेगी

इस मामले से जुड़े सूत्र ने बताया कि अगर सौरव गांगुली आईसीसी की जिम्मेदारी संभालने को तैयार होते हैं तो इससे पहले वो यह तय करना चाहेंगे कि चुनाव होने की सूरत में उनके पास पर्याप्त संख्या बल हो। इस बात की संभावना बेहद कम है कि पाकिस्तान बोर्ड बीसीसीआई के किसी शख्स को चुपचाप आईसीसी का चेयरमैन बनने देंगे।

बोर्ड तय करता है चुनाव प्रक्रिया

चेयरमैन की चुनाव प्रक्रिया आईसीसी का बोर्ड निधारित करता है और यह हर बार अलग हो सकती है। 2016 में जब शशांक मनोहर ने पहली बार आईसीसी की बागडोर संभाली थी, तो उन्हें गुप्त मतदान के जरिए चुना गया था। दो साल बाद जब चेयरमैन चुनने की बारी आई तो वो इकलौते उम्मीदवार थे और बिना वोटिंग के ही सर्वसम्मति से दोबारा चुने गए थे। वहीं, मौजूदा चेयरमैन बार्कले भी सबकी पसंद थे। आईसीसी के बोर्ड में कुल 17 डायरेक्टर हैं। इसमें से 12 फुल मेंबर्स, तीन डायरेक्टर एसोसिएट देशों के प्रतिनिधि के तौर पर, चेयरमैन बार्कले, आईसीसी सीईओ (ज्योफ अलार्डिस), स्वतंत्र महिला डायरेक्टर इंदिरा नूई। सीईओ के पास किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए वोटिंग का अधिकार नहीं होता है, आईसीसी के संविधान के मुताबिक दो तिहाई बहुमत या न्यूनतम 11 वोट अनिवार्य हैं।


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