आयुर्वेद सिर्फ एक विकल्प नहीं है, बल्कि देश के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण आधार है : प्रधानमंत्री

कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों ने प्रधानमंत्री को दी बधाई
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 वें आयुर्वेद दिवस पर शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार दो आयुर्वेद संस्थान राष्ट्र को समर्पित किये। ये संस्थान हैं इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद, जामनगर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, जयपुर हैं। दोनों संस्थान देश में आयुर्वेद के प्रमुख संस्थान हैं। पहले वाले को संसद के एक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया गया है और दूसरे वाले को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया है। आयुष मंत्रालय 2016 से हर साल धनवंतरि जयंती (धनतेरस) के अवसर पर आयुर्वेद दिवस मनाता है।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद नाइक, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र तथा गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत उपस्थित थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसिस ने इस अवसर पर एक वीडियो संदेश भेज कर ‘आयुष्मान भारतÓ के तहत सार्वभौमिक कवरेज के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता और स्वास्थ्य संबंधी उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए पारंपरिक दवाओं के साक्ष्य-आधारित प्रचार की प्रशंसा की। ग्लोबल सेंटर ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिन के लिए भारत को चुनने के लिए प्रधानमंत्री ने विश्व स्वस्थ्य संगठन और यूके महानिदेशक को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद एक भारतीय विरासत है  और यह खुशी की बात है कि भारत का पारंपरिक ज्ञान अन्य देशों को भी समृद्ध कर रहा है।

दोनों संस्थानों को उनके उन्नयन के लिए बधाई देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास अब अधिक जिम्मेदारी है और आशा है कि वे ऐसे आयुर्वेद पाठ्यक्रम तैयार करेंगे जो अंतरराष्ट्रीय मानक को पूरा करते हों। उन्होंने आयुर्वेद मंत्रालय और आयुर्वेद रसायन विज्ञान जैसे विषयों में नए रास्ते खोजने के लिए शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी का भी आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि काल में पूरी दुनिया में आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सितंबर में आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि शारीरिक प्रतिरक्षा बूस्टर के रूप में हल्दी, अदरक जैसे मसालों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दुनिया में आयुर्वेदिक इलाज की लोकप्रियता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब, कई देशों में, हल्दी से संबंधित विशेष पेय भी बढ़ रहे हैं और दुनिया की प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिकाओं को आयुर्वेद के प्रति नई आशा दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इस कोरोना अवधि के दौरान, ध्यान केवल आयुर्वेद के उपयोग तक ही सीमित नहीं था, बल्कि देश और दुनिया में आयुष से संबंधित अनुसंधान को आगे बढ़ाया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, एक तरफ, भारत टीकों का परीक्षण कर रहा है, दूसरी तरफ, यह कोविड से लडऩे के लिए आयुर्वेदिक अनुसंधान पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि इस समय दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान सहित सौ से अधिक स्थानों पर अनुसंधान चल रहा है, जिसमें 80 हजार दिल्ली पुलिस कर्मियों पर प्रतिरक्षा से संबंधित अनुसंधान किया जा रहा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा समूह अध्ययन हो सकता है और और इसके उत्साहजनक परिणाम आये हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में कुछ और अंतरराष्ट्रीय ट्रायल शुरू किए जाने हैं।


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