उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे ट्रेक को ब्लास्ट से उड़ाने का प्रयास

Attempt to blow Udaipur-Ahmedabad railway track with blast
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ओड़ा पुल पर शनिवार रात्रि को किया विस्फोट, पटरी में दरार, नट-बोल्ट दूर जा गिरे

नगर संवाददाता & उदयपुर |13 दिन पूर्व ही शुरू हुई उदयपुर- अहमदाबाद ट्रेन के रेल्वे लाईन पर ओड़ा गांव में बने पुल को शनिवार रात्रि को कुछ बदमाशों ने पुल को उडाने का प्रयास किया। बदमाशों ने इस पुलिया पर भारी मात्रा में डिटोनेटर और विस्फोटक लगाकर उड़ाने का प्रयास किया, जिससे पुल का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। रात्रि को जब ग्रामीणों ने पुल पर विस्फोट की आवाज सुनी तो सुबह एक ग्रामीण मौके पर गया और उसने यह देखकर तत्काल स्थानीय सरपंच को बताया। सरपंच ने इस बारे में पुलिस को बताया, इसके बाद मौके पर संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, एसपी सहित रेल्वे के अधिकारी पहुँचे। अधिकारियों ने मौका मुआयना किया अहमदाबाद की ओर से आ रही ट्रेन को डूंगरपुर में ही रूकवा दिया। बाद में रेल्वे अधिकारियों की ओर से मामला दर्ज करवाया है।

पटरी के नीचे सीमेंट का गडर भी हुआ क्षतिग्रस्त

मौके पर मिला सुपर पावर 90 नामक विस्फोटक का अंश

ग्रामीणों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, मामला दर्ज कर जांच शुरू की

पुल पर लाल कपड़ा बांधा ताकि ट्रेन रूके

मौके पर गए ग्रामीणों ने स्थिति को देखते हुए पुल पर एक लाल कपड़ा बांध दिया ताकी यदि इस दौरान ट्रेन आ भी जाए तो वह लाल कपड़े को देखकर रूक जाए और आगे ना जाए ताकी जन हादसा ना हो पाए।

मौके पर पहुंचे एनआई, एटीएस, पुलिस, प्रशासन और रेलवे अधिकारी

अहमदाबाद से आ रही ट्रेन को डूंगरपुर में रोका

रेल्वे अधिकारियों ने मौके पर पुल की हालत देखकर तत्काल आगे सूचना की, जिस अहमदाबाद की ओर से आ रही ट्रेन को डूंगरपुर में ही रोक दिया गया और वहां ट्रेन की सवारियों को अन्य साधनों से उदयपुर के लिए रवाना किया गया। पुलिस, प्रशासनिक और रेल्वे अधिकारियों ने मौका-मुआयना किया तो स्पष्ट हुआ कि पुल को उड़ाने के लिए भारी मात्रा में बारूद का प्रयोग किया गया था, जिसमें सुपर पॉवर 90 नामक बारूद के अंश वहां पर पड़े मिले। साथ ही पुल को इस विस्फोट से काफी नुकसान हुआ है। पटरी में क्रेक आ गए है और पटरी को आपस में जोडऩे वाले नट-बोल्ट भी विस्फोट के कारण खुलकर दूर जा गिरे थे। साथ ही पुल पर पटरी को सहारा देने वाले सीमेंट के गडर में भी क्रेक आया है और यह सीमेंट का गडर जिस पिलर पर टिका हुआ है उस पिलर की नींव के पास में भी जमीन उखड़ी पड़ी है। करीब दो से तीन घंटों तक अधिकारी वहां पर मौजूद रहे और स्थिति को देखा। अधिकारियों का कहना है कि कोई असामाजिक तत्व इस पुल को ही उड़ाना चाहता था ताकी बड़ा जन हादसा हो जाए, लेकिन ग्रामीणों की सूझबूझ से यह हादसा टल गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर रेल्वे अधिकारियों ने असमाजिक तत्वों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

शनिवार को अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन गुजरने के बाद ही ग्रामीणों ने सुना था धमाका, रात में भी मौके पर पहुंचे लेकिन कुछ दिखा नहीं, सुबह युवक गया तो घटना का पता चला

जानकारी के अनुसार 13 दिन पूर्व ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर उदयपुर-अहमदाबाद ट्रेन का शुभारंभ किया था। शनिवार रात्रि को हमेशा की तरह यह ट्रेन उदयपुर से रवाना हुई और ओड़ा गांव में करीब 35 मीटर उपर बने पुल को पार कर अहमदाबाद की ओर रवाना हो गई। इस घटना के बाद ओड़ा पुल पर गांव के लोगों ने जोरदार धमाका सुना था। शाम को करीब 7.15 से 7.30 के बीच हुए इस धमाके पर ग्रामीणों ने सोचा कि कोई वाहन दुर्घटना हो गई होगी तो लोगों ने ध्यान नहीं दिया। एक-दो युवकों ने जाकर देखा पर कुछ भी नजर नहीं आया तो किसी को कुछ पता नहीं चला। सुबह गांव के कुछ युवक हमेशा की तरह रेल्वे पुल पर गए और वहां पर संदीप मीणा नामक युवक ने पुल पर पटरी में क्रेक देखा तो उसे शंका हुई। उसने पास जाकर देखा तो वहां पर पटरी क्रेक थी और पटरी में लगने वाले नट-बोल्ट भी नहीं थे, साथ ही पटरी के नीचे लगने व वाले सीमेंट के गडर में क्रेक था। यह देखकर उसने गांव के सरपंच दिनेश कुमार मीणा को सूचना दी। दिनेश कुमार ने इस बारे में तत्काल जावरमाइंस थानाधिकारी अनिल कुमार विश्रोई को सूचना दी, जिस पर अनिल कुमार विश्रोई मौके पर पहुुँचे और स्थिति देखकर बड़ी घटना की शंका पर उच्चाधिकारियों को बताया। तत्काल सूचना मिलने पर मौकेे पर संभागीय आयुक्त राजेन्द्र कुमार भट्ट, जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा, एसपी विकास कुमार शर्मा, एएसपी मुकेश सांखला, चन्द्रशील ठाकुर के साथ-साथ डिप्टी राजेन्द्र सिंह जैन व अन्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी पहुँच गए। सूचना पर मौके पर रेलवे के एरिया रेल्वे मैनेजर बद्रीप्रसाद भी अपने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुँचे और मौका-मुआयना किया। इस दौरान एसटीएफ भी मौके पर पहुँच गई। मौके पर एफएसएल के अधिकारी भी पहुँचे और साक्ष्य एकत्रित किए।

संदीप मीणा की सक्रियता ने टाला हादसा

गांव में ही रहने वाले संदीप मीणा ही सबसे पहले पुल पर गया था और उसने जाकर मौके पर पटरी में क्रेक देखा था तो उसने सबसे पहले शंका के आधार पर गांव के सरपंच को फोन लगाया और सरपंच ने मौके पर आकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को बताया। यदि संदीप मीणा इसे हल्के में ले लेता तो बड़ा हादसा हो सकता था।


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