ऑस्ट्रेलिया से भारत आएगी श्रीनाथजी की प्राचीन पिछवई – लूटी गई पुरा महत्व की कलाकृतियां

Ancient Pichwai of Shrinathji will come to India from Australia
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नगर संवाददाता . उदयपुर। ऑस्ट्रेलिया ने भारत से चुरा कर वहां की नेशनल गैलेरी को बेची गई पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों और अन्य महत्वपूर्ण कलाकृतियों को भारत को लौटाने का निर्णय किया है। इसमें सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण 14 आइटम हैं जिनमें कांस्य और पत्थर की मूर्तियां, एक चित्रित स्क्रॉल और तस्वीरें शामिल हैं। इनमें से कुछ चोरी, कुछ अवैध रूप से उत्खनन कर ले जाई गईं तो कुछ गैरकानूनी रूप से ऑस्ट्रेलिया पारगमित किए गए आइटम होने की सम्भावना है।

राजस्थान और उदयपुर के लिए ऑस्ट्रेलिया सरकार का यह निर्णय बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें नाथद्वारा से श्रीनाथ जी मंदिर की एक पिछवई और माउंट आबू के जैन मंदिर से चुराई गई जिन तीर्थंकर की मूर्ति भी वापस भारत आएगी। इसके अलावा चित्तौडग़ढ़ जिले के रावतभाट स्थित घाटेश्वर मंदिर से नटेश शिव की 9वीं शताब्दी की एक दुर्लभ मूर्ति भी भारत को लौटाई जा रही है। यह मूर्ति 1998 के फरवरी महीने में घाटेश्वर मंदिर से चोरी हुई थी। उसे लंदन में बरामद किया गया और 22 साल बाद भारत को लौटाया गया। इस 2020 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सौंप दिया गया था।

ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलेरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया (एनजीए) ने घोषणा की है कि वह अपने एशियाई कला संग्रह से कला के इन कार्यों को भारत सरकार को वापस कर देगी। वरिष्ठ इतिहासविद डॉ. विवेक भटनागर ने बताया कि जिन कालाकृतियों को भारत को प्रत्यावर्तित किया जा रहा है, उनमें से 13 आर्ट ऑफ द पास्ट के माध्यम से भारतीय एंटीक डीलर सुभाष कपूर से और एक कला डीलर विलियम वोल्फ से प्राप्त की गई थी। यह चौथी बार है कि जब एनजीए ने कपूर से खरीदी गई कलाकृतियों व पुरावशेषों को भारत सरकार को सौंप दिया है।

मूर्तियां आस्था का केंद्र, मूल स्थान पर स्थापित होनी चाहिए

म्यूजियम एसोसिएशन ऑफ इण्डिया कि जनरल सैक्रेट्री आनन्दवद्र्धन ने बताया कि इन्टरनेशलन कॉर्ट ऑफ जस्टिस ने तमिलनाडु से 1976 में चुराई गई नटराज की कांस्य प्रतिमा के संबंध में एक फैसले में कहा था कि मूर्तियां किसी संग्रहालय की शोभा बनाने के लिए नहीं बनाई जाती। यह लोगों की आस्था का केन्द्र है और इन्हें इनके मूल स्थान पर ही स्थापित किया जाना चाहिए। इस निर्णय के अनुसार मूर्तियां और चित्र इनके मंदिर को पुन: मिलने चाहिए। यह जिम्मेदारी सरकार की है कि वह इसकी व्यवस्था करे।


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