तीसरी लहर के मंडराते खतरे के बीच आईसीएमआर का इशारा – खोले जा सकते हैं प्राइमरी स्कूल

बेंगलुरू के अपार्टमेंट में कोरोना विस्फोट
LUCKNOW, FEB 15 (UNI):- Uttar Pradesh Vidhan Parishad emlployees undergo coronavirus (Covid 19) testing before Budget Session U P Assembly at Vidhan Bhawan in Lucknow on Monday. UNI PHOTO-LKW PC 2U
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नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर भले ही कमजोर पड़ गई है, लेकिन वैज्ञानिक तीसरी लहर के आने का अंदेशा बार-बार जता रहे हैं। तीसरी लहर के खतरे के बीच कई राज्यों में फिर से स्कूल खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। इस बीच आईसीएमआर के डीजी डॉ. बलराम भार्गव ने स्कूल खोलने पर एक बड़ी बात कही है।

मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब डॉ. भार्गव से स्कूल खोलने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शुरूआत में प्राइमरी स्कूल खोले जा सकते हैं क्योंकि छोटे बच्चों में एडल्ट की तुलना में संक्रमण होने का खतरा कम है। उन्होंने बताया कि यूरोप के कई देशों ने कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच भी प्राइमरी स्कूल को खोल रखा था। उन्हें बंद नहीं किया था। इसलिए शुरूआत में प्राइमरी स्कूल खोले जा सकते हैं और उसके बाद सेकंडरी स्कूल खोले जा सकते हैं।

डॉ. भार्गव ने बताया, एडल्ट्स की तुलना में छोटे बच्चे वायरस को बहुत आसानी से हैंडल कर लेते हैं। छोटे बच्चों के लंग्स में एसीई रिसेप्टर्स कम होते हैं, जहां वायरस अटैक करता है। क्योंकि बच्चों में एसीई रिसेप्टर्स कम होते हैं, इसलिए उनमें इन्फेक्शन का खतरा कम देखा गया है। मगर दूसरी बात ये भी देखी गई है कि 6 से 9 उम्र के बच्चों में 57.2′ एंटीबॉडी देखी गई है, जो एडल्ट के लगभग बराबर है। उन्होंने ये भी बताया कि कोरोना के बीच यूरोप के कई देशों ने प्राइमरी स्कूल बंद ही नहीं किए थे। इसलिए हम लोगों की हिदायत ये है कि प्राइमरी स्कूल पहले खोले जा सकते हैं और फिर सेकंडरी स्कूल खोले जा सकते हैं। पर जितना भी सपोर्ट स्टाफ है, जैसे टीचर, बस ड्राइवर और दूसरा स्टाफ को वैक्सीनेटेड होना जरूरी है।

चौथा सीरो सर्वे- दो-तिहाई लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बनी

देश की 40 करोड़ आबादी को अब भी कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा है, जबकि दो-तिहाई लोगों में इस वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी पाई गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने हाल ही में हुए चौथे सीरो सर्वे के हवाले से मंगलवार को यह जानकारी दी।

भार्गव ने कहा, चौथे सीरो सर्वे में 6 से 17 साल के 28975 लोगों और 7252 स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल किया गया था। इनमें से 62 फीसदी लोगों ने वैक्सीन नहीं ली थी, जबकि 24 फीसदी लोगों ने एक डोज और 14 फीसदी लोगों ने दोनों डोज लिया था। उन्होंने बताया कि इस सर्वे में सीरो प्रीवलेंस 67′ पाया गया है।

भार्गव ने बताया कि 85 फीसदी हेल्थ केयर वर्कर कोविड के शिकार हो चुके हैं। देश में कोरोना के मामले घटने और टीकाकरण के बावजूद उन्होंने अब भी लोगों को कोविड उपयुक्त व्यवहार को अपनाने को कहा है। गैर-जरूरी यात्रा करने से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि वही लोग यात्रा करें जो कोरोना रोधी वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके हैं।


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