अमेरिका की तालिबान को सख्त चेतावनी-क्वॉड पर चीन को दे दिया बड़ा संदेश

अमेरिका की तालिबान को सख्त चेतावनी-क्वॉड पर चीन को दे दिया बड़ा संदेश
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नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और लगातार जारी संघर्ष को लेकर कहा कि अमेरिका अभी भी अफगानिस्तान में विकास कार्यों में लगा हुआ है। इसके साथ ही हमारा उद्देश्य संघर्ष का समाधान करने के लिए एक मंच पर लाने का है। ब्लिंकन ने कहा, जब हम अफगानिस्तान से अपनी सेना हटा रहे हैं, तब भी हम अफगानिस्तान के साथ बंधे हुए हैं। वहां न सिर्फ हमारा मजबूत दूतावास है बल्कि ऐसे कई जरूरी कार्यक्रम भी हैं जो विकास और सुरक्षा सहायता के जरिए अफगानिस्तान  को आर्थिक रूप से समर्थन देते हैं। ब्लिंकन ने कहा, हम अफगानिस्तान में संघर्ष के समाधान के लिए पार्टियों को एक साथ लाने के लिए काम करने की कूटनीति में जी-जान से जुटे हुए हैं।

ब्लिंकन ने तालिबान पर निशाना साधते हुए कहा, बलपूर्वक देश पर अधिकार करना और लोगों के अधिकारों का हनन करना अपने मंसूबों को हासिल करने का रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा, केवल एक ही रास्ता है और वह है बातचीत की मेज पर संघर्ष को शांतिपूर्ण ढंग से हल करना।

क्वाड पर चीन की तिरछी नजरों पर दिया जवाब

ब्लिंकन ने क्वाड को लेकर लगातार सवाल उठा रहे चीन पर निशाना साधते हुए कहा, क्वाड क्या है? यह बहुत सरल है लेकिन उतना ही जरूरी है। उन्होंने बताया, चार समान विचारधारा वाले देश लोगों के जीवन पर वास्तविक असर डालने वाले मौजूदा समय के कुछ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों और स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक सुनिश्चित करने को लेकर काम करने के लिए एक साथ आ रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्री के साथ हुई अपनी बैठक के बाद एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि हमने अफगानिस्तान सहित क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर अफगानिस्तान में भारत और अमेरिका की गहरी रूचि है।

चीन को कड़ा संदेश

अमेरिकी विदेश मंत्री ने की दलाई लामा के प्रतिनिधि से मुलाकात

नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को राजधानी में बौद्ध धर्म गुरू दलाई लामा के प्रतिनिधि से मुलाकात की। तिब्बती नेतृत्व के साथ ब्लिंकन की मीटिंग खासी अहम है। इसके पहले 2016 में वॉशिंगटन में दलाई लामा ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की थी। नई दिल्ली में ब्लिंकन की निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रतिनिधि नगोदुप डोंगचंग के साथ बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के रिश्ते काफी खट्टे हैं। अधिकारियों ने बताया कि ब्लिंकन ने दलाई लामा के प्रतिनिधि के साथ सुबह थोड़े समय के लिए मुलाकात की। वह सिविल सोसाइटी के अन्य नेताओं से भी मिले। ब्लिंकन की नगोदुप के साथ मीटिंग चीन को निश्चित ही अखरी होगी। चीन के विदेश मंत्रालय से इस लेकर कोई बयान तो नहीं आया। लेकिन, उसने कहा कि तिब्बत चीन का हिस्सा है और दलाई लामा खतरनाक विभाजनकारी हैं। ब्लिंकन दो दिवसीय दौरे पर भारत आए हुए हैं।


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