शाह के मंत्रालय में हिंदी में तैयार की जाने लगी सभी फाइलें, अफसरों को निर्देश- हिंदी में भेजें ई-मेल

All files being prepared in Hindi in Shah's ministry, instructions to officers - send e-mail in Hindi
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नई दिल्ली (एजेंसी)। हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह के हिंदी भाषा को लेकर दिए गए बयान पर दक्षिण के राज्यों में तीखी प्रतिक्रि या हुई थी। इसकी वजह से राजनीतिक बखेड़ा खड़ा हो गया था। इस बीच गृह मंत्रालय राज्यों की प्रतिक्रि या को दरकिनार कर अपने सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना शुरू कर दिया।

मंत्रालय की ओर से जारी सभी फाइलें तथा उनके नोट्स और बयान हिंदी में जारी किए जा रहे हैं। मंत्रालय से जारी सभी बयान भी पहले हिंदी में ही तैयार किए जा रहे हैं। राजभाषा विभाग ने अफसरों से कहना शुरू कर दिया है कि वे ईमेल्स भी हिंदी में भेजें।

गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों  सुझाव दिया था कि विभिन्न  राज्यों के लोगों को अंग्रेजी नहीं बल्कि हिंदी में एक-दूसरे से संवाद करना चाहिए। गृह मंत्रालय ने संसदीय राजभाषा समिति की 37 वीं बैठक में शाह के हवाले से कहा था,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है, और इससे निश्चित रूप से हिंदी का महत्व बढ़ेगा। अब समय आ गया है कि राजभाषा को देश की एकता का महत्वपूर्ण अंग बनाया जाए। जब अन्य भाषा बोलने वाले राज्यों के नागरिक एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं, तो यह भारत की भाषा में होना चाहिए।

शाह ने हालांकि स्पष्ट किया कि अंग्रेजी के विकल्प के रूप में हिंदी को स्वीकार किया जाना चाहिए, न कि स्थानीय भाषाओं को। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अन्य स्थानीय भाषाओं के शब्दों को स्वीकार करके हिंदी को और अधिक लचीला बनाया जाना चाहिए। शाह राजभाषा समिति के अध्यक्ष हैं, और बीजेडी के बी महताब इसके उपाध्यक्ष हैं।

गृह मंत्री ने नौवीं कक्षा तक के छात्रों को हिंदी का प्रारंभिक ज्ञान देने और हिंदी शिक्षण परीक्षाओं पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।

गृह मंत्रालय के मुताबिक, शाह ने सदस्यों को बताया कि कैबिनेट का 70 फीसदी एजेंडा अब हिंदी में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में 22,000 हिंदी शिक्षकों की भर्ती की गई है और क्षेत्र के 9 आदिवासी समुदायों ने अपनी बोलियों की लिपियों को देवनागरी में बदल दिया है।

गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन सभी राज्यों ने दसवीं कक्षा तक के स्कूलों में हिंदी अनिवार्य करने पर भी सहमति जताई है।


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