एक जोड़ी पतलून ने सुलझाई 30 लाख रुपये की चोरी की वारदात

A pair of trousers solved the theft of 30 lakh rupees
Share

मुंबई। अपने मालिक के घर से 30 लाख रूपये की जूलरी चुराकर फरार घरेलू नौकर ने इस चोरी का फूलप्रूफ प्लान बनाया था और कामयाब भी रहा। नौकर की शिनाख्त से लेकर उसके ठौर-ठिकाने का पुलिस के पास कहीं कोई सुराग नहीं था। ऐसे में इस शातिर चोर तक पहुंचना और उसे पकड़ना पुलिस के लिये टेढी खीर साबित हो रहा था। लेकिन तभी आरोपी नौकर की एक छोटी सी भूल ने पुलिस की तफ्तीश का रास्ता खोल दिया। आरोपी नौकर मालिक के घर चोरी कर फरार हो गया लेकिन अपनी एक जोड़ी पतलून वहां छोड़ आया था। इसी एक जोडी पतलून ने पुलिस को आरोपी तक पहुंचाया। दरअसल साल 2018 में शहर के कारोबारी महेश जैन ने अपने यहां एक घरेलू नौकर के तौर पर संतोष कुमार यादव को नौकरी पर रखा था। यादव ने नौकरी शुरु करने के दो दिन बाद ही जैन के पेडर रोड स्थित घर से 30 लाख रुपये की जूलरी बटोरी और चंपत हो गया।

मुंबई पुलिस के मुताबिक, जिस सफाई से और जितनी जल्दी आरोपी ने यह वारदात की थी, उससे साफ था कि वह चोरी के इरादे से ही जैन के घर में बतौर नौकर दाखिल हुआ था। झारखंड का रहनेवाला आरोपी यादव अक्तूबर के मध्य में अपने साथ एक फर्जी आधार कार्ड लेकर मुंबई आया था। साफ है कि उसका इरादा यहां आकर मेहनत – मजदूरी करने का नहीं बल्कि नौकरी की आड़ में किसी जुर्म को अंजाम देने का था। यादव ने यहां कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों से बात की और ऐसे घर में नौकरी दिलाने की बात कही थी जहां उसके रहने-खाने का इंतजाम भी रहे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इससे उसे किसी भी मौके पर अपने इरादे को अंजाम देना मुमकिन था।

अपने एक दोस्त के जरिये यादव कारोबारी जैन के घर घरेलू नौकर का काम हासिल करने में कामयाब हो गया था। 30 अक्तूबर 2018 को उसे यह नौकरी मिली और नौकरी के पहले दिन ही उसने अपना आधार कार्ड मालिक जैन को सौंप दिया था। दो दिन बाद, यादव ने जैन के घर में रखी 30 लाख रुपये की गोल्ड जूलरी समेटी और फरार हो गया। जैन ने तत्काल गामदेवी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को पहले इस मामले को निपटाना ज्यादा मुश्किल नहीं लगा क्योंकि जैन के पास यादव का आधार कार्ड था। लेकिन जब आधार कार्ड फर्जी होने का खुलासा हुआ तो फिर जांच में जुटे पुलिस अधिकारियों की माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं। पुलिस अधिकारियों को यह तो पता था कि जूलरी किसने चुराई है लेकिन उसकी तलाश में आगे बढ़ने के लिये कोई सुराग नहीं था। इसके बाद पुलिस ने जैन के घर का कोना-कोना छान मारा ताकि कहीं से कोई सुराग हाथ लगे। इसी दौरान पुलिस के हाथ एक जोड़ी पतलून लगीं। जब जैन के परिवार के सभी सदस्यों ने यह पतलून उनकी नहीं होने की बात कही तो तय हो गया कि हो ना हो यह यादव की ही पतलून है। पतलून पर लगे लेबल से खार के एक दर्जी की तलाश कर पुलिस उस तक पहुंची। दर्जी से पूछताछ में यादव का नाम और नंबर पुलिस के हाथ लगा। दर्जी के पास यादव का झारखंड का पता भी था और उस एजेंसी की जानकारी भी थी जिसके जरिये यादव नौकरी पाने की जुगत में था। एजेंसी से संपर्क किया गया तो पता चला कि हाल ही में यादव ने अपने एक दोस्त के मोबाइल नंबर से वहां फोन किया था और नौकरी के लिये उनसे बात की थी। यादव ने उस एजेंसी को यह भी बताया था कि वह झारखंड जाने के लिये ट्रेन पकड़ रहा है। एजेंसी ने यादव का वह संपर्क नंबर पुलिस को दिया जिसके बाद पुलिस ने 5 नवंबर 2018 को यादव को धर दबोचने के लिेये छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर अपना जाल बिछाया। लेकिन यादव पुलिस की गिरफ्त से बच निकला था। ट्रेन छूटने से पांच मिनट पहले ही यादव उस ट्रेन में सवार होने में कामयाब हो गया था। पुलिस को जब पक्का यकीन हो गया कि यादव इसी ट्रेन में सवार है और झारखंड जा रहा है तो पुलिस ने यादव के दोस्त के मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस करना शुरु कर दिया। झारखंड में कोडरमा रेलवे स्टेशन के जीआरपी अधिकारियों से संपर्क कर यादव की तसवीरें उन्हें भेजी गई जिसके बाद आरोपी यादव को जैसे ही वह ट्रेन से स्टेशन पर उतरा, उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

मुंबई पुलिस यादव को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर मुंबई आई और 8 नवंबर तक उसे पुलिस हिरासत में रखा गया था। यादव ने इस पूरी चोरी को बेहद शातिराना तरीके से अंजाम देने की कोशिश की थी लेकिन आखिरकार अपनी एक जोडी पतलून मालिक के घर छोड़ने की गलती ने उसके गले में कानून का शिकंजा कस ही दिया।


Share