फिल्म इंडस्ट्री के डूबे 9,000 करोड़ – संकट में लाखों लोगों की नौकरियां

फिल्म इंडस्ट्री के डूबे 9,000 करोड़
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नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन में सिनेमाघरों पर भी ताले जड़ दिए गए। अनलॉक की प्रक्रिया में भी अब तक थियेटर्स को दोबारा खोलने को लेकर सरकार की ओर से कोई आदेश नहीं दिया गया है। इससे फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। इस बीच मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार से थियेटर्स को खोलने की मंजूरी देने की अपील की है। एसोसिएशन ने ट्वीट कर कहा है कि सिनेमाघरों के दोबारा खुलने से लाखों लोगों की नौकरी बचेगी।

फिल्म इंडस्ट्री को हुआ 9,000 करोड़ का नुकसान

एसोसिएशन ने ट्वीट किया, हम बड़े पर्दे पर फिल्में देखने, ताली बजाने, हंसने और रोने का रोमांच भूलते जा रहे हैं। साथ ही लिखा है कि फिल्म इंडस्ट्री को लॉकडाउन के कारण 1,500 करोड़ रूपये प्रति माह का नुकसान हो रहा है। आसान शब्दों में समझें तो अब तक इस इडस्ट्री को 9,000 करोड़ का तगड़ा झटका लग चुका है। इससे लाखों लोगों की नौकरियों पर संकट खड़ा हो गया है। एसोसिएशन ने कहा कि देश में करीब 10,000 सिनेमा स्क्रीन हैं। इनके जरिये देश के लाखों लोगों का मनोरंजन होता है तो लाखों लोगों का घर चलता है। इस सेक्टर में प्रत्यक्ष तौर पर 2,00,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। लॉकडाउन के कारण उनके सामने संकट की स्थिति पैदा हो गई है।

एसोसिएशन ने कहा, इसलिए थियेटर्स खोलने की दी जानी चाहिए मंजूरी

मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ने लिखा कि अनलॉक इंडिया के तहत मॉल्स, एयरलाइंस, रेलवे, रिटेल, रेस्टोरेंट, जिम और कई दूसरे सेक्टर्स खोले जा चुके हैं। अनलॉक-4 के तहत बार और मेट्रो सर्विसेस को भी शुरू कर दिया गया है। सिनेमाघरों में इन सभी जगहों से बेहतर सुविधाएं होने के बाद भी शुरू करने की मंजूरी नहीं दी गई है। थियेटर्स में साफ-सफाई का बाकी जगहों से कहीं ज्यादा ध्यान रखा जाता है। इनमें भीड़ भी इक_ी नहीं हो पाती है। सिनेमाघरों में सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। थियेटर्स में बिना टिकट कोई भी व्यक्ति एंट्री नहीं कर सकता है। हर शो का समय तय होने के कारण भीड़ जमा नहीं होती है। एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर स्टाफ मौजूद रहता है। इसके अलावा ज्यादातर थियेटर्स में बड़े-बड़े वेटिंग एरिया हैं। इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए सरकार को थियेटर्स को खोलने की मंजूरी दे देनी चाहिए।


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