हैदराबाद में 8 शेरों को कोरोना – चिडिय़ाघरों और नेशनल पार्क को बंद करने का आदेश

हैदराबाद में 8 शेरों को कोरोना - चिडिय़ाघरों और नेशनल पार्क को बंद करने का आदेश
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नागपुर (एजेंसी)। बीते कई दिनों से देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। अब तक देश में कोविड की वजह से 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। हालांकि, अभी तक यह वायरस सिर्फ इंसानों में ही पाया जा रहा था, लेकिन हैदराबाद में एशियाई शेरों में संक्रमण मिला है।

हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क (एनजेडपी) में 8 एशियाई शेर कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि, ये सभी शेरों की तबीयत ठीक है और धीरे-धीरे रिकवर कर रहे हैं। जानवरों में कोविड-19 होने का देश में यह संभवत: पहला मामला है। इन शेरों की पिछले महीने आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाया गया था, जिसकी रिपोर्ट में ये संक्रमित निकले हैं। वहीं, शेरों के कोविड पॉजिटिव मिलने के बाद देशभर के चिडिय़ाघरों और नेशनल पार्क को बंद करने का निर्देश दिया गया है। 29 अप्रैल को सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलेक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) ने एनजेडपी के अधिकारियों को बताया था कि ये शेर पॉजिटिव हैं। एनजेडपी के डॉ. सिद्धानंद कुकरेती ने रिपोर्ट को कंफर्म करते हुए बताया कि अब शेर बेहतर हो रहे हैं। पिछले साल अप्रैल महीने में न्यूयॉर्क के ब्रोंक्स जू में आठ बाघ कोविड से संक्रमित मिले थे, लेकिन इस बार पहली बार यह देश में शेरों में मामला सामने आया है। वाइल्डलाइफ रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के डायरेक्टर डॉ. शिरीष उपाध्याय ने बताया कि ब्रोंक्स में सामने आए मामले के बाद कहीं पर भी वाइल्ड एनिमिल्स में कोविड पॉजिटिव होने का मामला सामने नहीं आया था। हालांकि, हांगकांग में कुत्तों और बिल्लियों में जरूर वायरस मिल चुका है। पिछले महीने 24 तारीख को जब डॉक्टर पार्क का दौरा कर रहे थे, तभी उन्हें दिखाई दिया कि कुछ शेरों के नाक से पानी आ रहा है और कफ कर रहे हैं। साथ ही कुछ खाना भी नहीं खा रहे थे। इसके बाद उन्होंने इन शेरों के स्वैब सैंपल्स लिए और फिर जांच करने के लिए भेजा गया। बाद में पार्क के आठ शेर कोविड से संक्रमित मिले। पॉजिटिव पाए जाने की वजह से इन शेरों को आइसोलेट कर दिया गया है और जरूरी इलाज दिया जा रहा है। सभी इलाज से लगातार बेहतर हो रहे हैं। (शेष पृष्ठ ८ पर)

टेस्टिंग से पता चला है कि यह संक्रमण किसी गंभीर वेरिएंट की वजह से नहीं हुआ था। वहीं, अभी तक इस बात का कोई वास्तविक प्रमाण नहीं मिला है कि यह बीमारी किसी जानवर से इंसान तक पहुंच सकती है।


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