डूंगरपुर में कोरोना के 3 नए केस मिले

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कर्फ्यू

कॉलोनी के 70 लोगों को खांसी-जुकाम, मेडिकल स्टोर और दूध की दुकानें भी बंद

डूंगरपुर। दो महिला और एक युवक के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद डूंगरपुर के मोहम्मदिया कॉलोनी (गलियाकोट) में कर्फ्यू (जीरो मोबिलिटी) लगा दिया गया है। प्रभावित क्षेत्र में पुलिस तैनात कर दी गई है। इस इलाके में किसी को भी आने-जाने की इजाजत नहीं होगी। मेडिकल स्टोर और दूध की दुकानें तक बंद रहेंगी। इलाके के 70 से अधिक लोगों को खांसी-जुकाम की समस्या है, जिन्हें दवा दी गई है। 5 दिन बाद फिर सर्वे होगा। उधर, जरूरी सामग्री प्रशासन घर-घर पहुंचा रहा है। सूरत से लौटी संक्रमित महिला का सैंपल ओमिक्रॉन जीनोम की जांच के लिए पुणे भेजा गया है। रिपोर्ट 10 दिन बाद आएगी। एसडीएम विनीत सुखाडिय़ा ने तीन केस आने के बाद शुक्रवार शाम को कफ्र्यू का आदेश दिया था। बीमार लोगों को दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इससे पहले राजस्थान में कोरोना संक्रमण के चलते अप्रैल में कफ्र्यू लगाया गया था।

बेटा और पड़ोस की महिला भी पॉजिटिव : 26 जून के बाद 1 दिसंबर को कोरोना का पहला केस डूंगरपुर में मिला था। गलियाकोट की रहने वाली महिला 22 नवम्बर को सूरत में सैयदना साहब के दर्शन के लिए गई थी। 23 नवंबर की रात को ही वापस लौटी। यहां पर उसकी तबीयत खराब हो गई। 26 व 27 नवंबर को महिला के बेटे की शादी थी। इसमें 50 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। शादी के बाद महिला की आरटी-पीसीआर जांच हुई। 1 दिसंबर को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जब तक प्रशासन इसके घर पहुंचता, वह सूरत (गुजरात) चली गई। स्वास्थ्य विभाग महिला के घर पहुंचा तो परिवार वालों व पड़ोसियों की जांच की। इसमें महिला का बेटा और एक पड़ोसी संक्रमित मिला। दोनों को होम आइसोलेट किया गया है। महिला के संक्रमित होने के बाद इलाके में करीब 230 लोगों की सैंपलिंग की गई थी। इसमें दो और लोग पॉजिटिव आए।

सूरत में हुई जांच में रिपोर्ट निगेटिव : महिला ने सूरत में 3 दिसंबर को अपनी कोरोना जांच कराई। प्राइवेट लैब में कराई गई जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई है। डूंगरपुर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निजी लैब की रिपोर्ट को नहीं माना जाएगा।

वहां (सूरत) के सरकारी हॉस्पिटल में आरटी-पीसीआर जांच कराना जरूरी है। उसकी रिपोर्ट को माना जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो 4 सैंपल लिया जाता है। इसमें से एक सैंपल की जांच स्थानीय स्तर पर होती है। इसके बाद आगे की जांच की जरूरत पड़ती है तो दूसरा सैंपल भेज दिया जाता है। पुणे दूसरा सैंपल भेजा गया है। महिला का सूरत में इलाज चल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर कर रही सर्वें

कर्फ्यू क्षेत्र में करीब 250 घर हैं। 1 एएनएम और एक आशा सहयोगी की 5 टीम को सर्वे के लिए लगाया गया है। अब तक 70 लोगों को सर्दी-जुकाम, खांसी होने पर दवाइयां दी गई हैं। 5 दिन बाद बड़े पैमाने पर सर्वे होगा। चितरी थानाधिकारी गोविंद सिंह ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में किसी के भी आने-जाने पर रोक है। जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया है।

आने-जाने की अनुमति नहीं

जीरो मोबिलिटी जोन में किसी को भी आने-जाने की अनुमति नहीं होती है। जिस एरिया को जीरो मोबिलिटी जोन घोषित किया जाता है, वहां किसी को भी घर से बाहर तक निकलने की अनुमति नहीं होती। केवल मेडिकल टीमों को ही आने जाने की छूट होती है। एक तरह से एडवांस स्टेज का कर्फ्यू होता है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में कई शहरों में जीरो मोबिलिटी जोन बनाए गए थे।

आखरी बार 6 महीने पहले लगा था कर्फ्यू

कोरोना की दूसरी लहर में आखिरी बार इस साल मई में कर्फ्यू लगाया गया था। अप्रैल, मई में डूंगरपुर शहर समेत सीमलवाड़ा और सागवाडा इलाके में कोरोना के केस ज्यादा थे। इन इलाकों में कंटेनमेंट जोन बनाए गए थे। कोरोना की दूसरी लहर के बाद यह पहला मौका है, जब एक बार फिर डूंगरपुर के गलियाकोट में जीरो मोबिलिटी घोषित किया गया है।


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