तीन सालों शहीद हुए आईटीबीपी के 244 और सीआरपीएफ के 119 जवान

तीन सालों शहीद हुए आईटीबीपी के 244 और सीआरपीएफ के 119 जवान
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नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत-चीन सीमा पर तैनात ‘आईटीबीपी’ के 244 जवानों ने गत तीन वर्ष के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया है। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफÓ के 119 जवान भी आंतरिक ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए हैं। भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा में तैनात बीएसएफ के जवानों ने भी अपनी शहादत दी है। अगस्त 2017 से लेकर जुलाई 2020 तक बीएसएफ के 51 जवान, असम राइफल्स के 19, सीआईएसएफ के 7 और एसएसबी के 6 जवान शहीद हुए हैं।

संसद के मौजूदा सत्र में लोकसभा में राजेश नारणभाई चुड़ासमा के सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि ड्यूटी के दौरान मारे जाने वाले केंद्रीय शस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स के कार्मिकों के निकटतम संबंधियों को विभिन्न स्वीकार्य लाभ प्रदान किए जाते हैं।

केंद्रीय अनुग्रह राशि के तहत सीएपीएफ और असम राइफल के मृत कर्मियों के निकटतम संबंधियों को केंद्रीय अनुग्रह राशि के रूप में दी जाने वाली एकमुश्त क्षतिपूर्ति की राशि को एक जनवरी 2016 से बढ़ाकर सक्रिय ड्यूटी पर मृत्यु के लिए 15 लाख रूपये से 35 लाख रूपये और ड्यूटी पर दस लाख रूपये से 25 लाख रूपये, जैसा भी मामला हो, कर दी गई है। असाधारण पेंशन के मामले में मृत कर्मियों के निकटतम संबंधी केंद्रीय सिविल सेवा (असाधारण पेंशन) नियमावली 1939 के तहत उदारीकृत पारिवारिक पेंशन (अर्थात अंतिम आहरित वेतन) प्राप्त करने के पात्र हैं।

राज्य मंत्री नित्यानंद के अनुसार, सभी सेवा संबंधी लाभ यथा मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी (डीसीआरजी), छुट्टी नकदीकरण, केंद्रीय सरकार कर्मचारी समूह बीमा योजना (सीजीईजीआईएस), सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) आदि स्वीकार्य हैं। बल स्तर की कल्याणकारी योजनाएं भी बनाई गई हैं।


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