संसद में हंगामे पर नपे विपक्ष के 19 सांसद, राज्यसभा से एक सप्ताह के लिए निलंबित

संसद में हंगामे पर नपे विपक्ष के 19 सांसद
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नई दिल्ली (एजेंसी)। लोकसभा अध्यक्ष ओम प्रकाश बिड़ला द्वारा कांग्रेस के 4 सांसदों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के एक दिन बाद मंगलवार को विपक्ष के 19 सांसदों को राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया है। महंगाई को लेकर सरकार के खिलाफ विपक्ष के विरोध के बीच अब संसद के दोनों सदनों में मानसून सत्र की कार्यवाही के दौरान 23 सांसदों के शामिल होने पर रोक लगा दी गई है।

मंगलवार को उच्च सदन में कार्यवाही की शुरूआत के साथ ही विपक्षी सांसदों ने महंगाई को लेकर अपना विरोध दर्ज करना शुरू किया। सदन के अंदर नारेबाजी करते हुए विपक्षी सांसद वेल के काफी पास आ गए थे। सभापति की ओर से विपक्षी सांसदों को अपनी सीट पर बैठने का बार-बार आग्रह किया गया। जानकारी के अनुसार, बात न मानने पर सभापति ने विपक्ष के सांसदों के खिnलाफ ऐक्शन लिया और एक सप्ताह के लिए सदन की कार्यवाही से उन्हें निलंबित कर दिया।

निलंबित सांसदों में सबसे अधिक संख्या तृणमूल कांग्रेस से है। टीएमसी के मौसम नूर, सुष्मिता देव, शांता छेत्री, डोला सेन, शांतनु सेन, अभि रंजन बिस्वास और मोहम्मद नदीमूल हक अब सप्ताह के शेष सत्र में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। वहीं, डीएमके से हामिद अब्दुल्ला, एस. कल्याणसुंदरम, आर. गिररंजन, एन.आर. एलेंगो, एम. शनमुगम, एनवीएम सोमु कनीमोझी को सस्पेंड किया गया है, जबकि माकपा से ए.ए. रहीम, वी. शिवदासन, भाकपा से संदोष पी. कुमार और टीआरएस से बी. लिंगैया यादव, रविहंद्रा वड्डिराजू और दामोदर राव देवकोंडा को सदन से निलंबित किया गया है।

राज्यसभा में कुछ विपक्षी सदस्यों के निलंबन के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि संसद को विपक्ष नहीं, सरकार बाधित कर रही है, जबकि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि विपक्षी सांसदों को राज्यसभा से निलंबित करने का फैसला भारी मन से किया गया। गोयल ने कहा कि सांसदों ने आसन की अपीलों की बार-बार अवहेलना की, जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया।

विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से संसद में गतिरोध को लेकर दखल की मांग की

इस बीच, कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी पार्टियों ने महंगाई और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर संसद में चल रहे गतिरोध तथा जांच एजेंसियों के कथित दुरूपयोग को लेकर मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह किया कि वे इन मामलों में हस्तक्षेप करें। इन दलों ने पत्र में कहा, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है क्योंकि सरकार महंगाई और कई खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी लगाने के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे कई उदाहरण हैं कि पहले इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई है, लेकिन यह सरकार अडिय़ल रूख अपनाए हुए है और चर्चा कराने के लिए तैयार नहीं है।


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