1500 किमी रेलमार्ग हुआ कवच से लैस, 3000 किलोमीटर के लिए टेंडर हुए

1500 किमी रेलमार्ग हुआ कवच से लैस, 3000 किलोमीटर के लिए टेंडर हुए
Share

नयी दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय रेलवे ने स्वदेश निर्मित संरक्षा प्रणाली कवच को साढ़े चार हजार किलोमीटर के मार्ग में लगाने का काम शुरू कर दिया और पांच हजार किलोमीटर के लिए निविदाएं आगे जारी की जाएंगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां रेल भवन में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में बताया कि रेलवे ने ट्रेनों की टक्कर को रोकने के लिए आरडीएसओ द्वारा विकसित कवच प्रणाली के दक्षिण मध्य रेल जोन में सफल प्रयोग के बाद इसे देश भर मे लगाने का निर्णय हुआ है। उन्होंने बताया कि अब तक तीन हजार किलोमीटर की लंबाई में कवच लगाने के लिए निविदाएं जारी हो चुकीं हैं। अगले चरण में पांच हजार किलोमीटर लंबे मार्ग के लिए निविदाएं जारी की जाएंगी। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि दो साल के भीतर इस प्रणाली को इतनी लंबाई में फिट करके चालू कर दिया जाएगा।

रेलवे बोर्ड के सूत्रों के अनुसार दक्षिण मध्य जोन में 1445 किलोमीटर के मार्ग में कवच लगा दिया गया है और 20 किलोमीटर का काम प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि 3009 रूट किलोमीटर के लिए निविदाएं जारी हो चुकीं हैं। इस तकनीक पर विदेशी तकनीक के मुकाबले केवल 25 से 30 प्रतिशत की लागत आएगी। प्रत्येक किलोमीटर पर इसे लगाने का खर्च 40 से 50 लाख रूपए है जबकि विदेशी तकनीक पर डेढ़ से दो करोड़ रूपए की लागत आती है। प्रत्येक खंड की निविदा 150 से 220 करोड़ रूपए की है।

रेल मंत्री का कहना है कि इस तकनीक के आने से लोकोपायलट अधिक आत्मविश्वास से गाड़ी चला सकेंगे। सूत्रों के अनुसार आरंभ में दिल्ली से मुंबई और दिल्ली से हावड़ा मार्गों को कवच से लैस किया जा रहा है। इसके साथ ही दिल्ली से चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू, जम्मू/उधमपुर, मुंबई से हैदराबाद, चेन्नई, इटारसी, बिलासपुर, हावड़ा, विजयवाड़ा से हावड़ा तक के ग्रांड ट्रंक ग्रांड कोर्ड मार्गों को कवच से लैस किया जाएगा।


Share