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13 साल में सीसारमा की कीमती जमीनों को भूअभिलेखों में फर्जी मार्किंग मामला

42 साल बाद पटवारी सहित चार के खिलाफ चालान पेश
जांच के दौरान तत्कालीन सरपंच सहित 19 की मौत
उदयपुर। सीसारमा की बेशकीमती जमीनों की भू अभिलेखों में वर्ष जनवरी 1963 से दिसम्बर 1976 तक मार्किंग में कूटरचना कर बेशकीमती जमीनों को सरपंच एवं अन्य परिचितों को लाभ पहुंचाने के लिए तत्कालीन पटवारी, राजस्व निरीक्षक, रिकॉर्ड कीपर ने पद एवं अधिकारों का दुरूपयोग कर फर्जी लाभार्थियों को लाभ पहुंचा। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल यूनिट ने जांच कर 23 जनों को आरोपी बनाया, लेकिन उनमें से 19 की जांच के दौरान ही मौत हो गई। इस मामले में एसीबी की स्पेशल यूनिट ने 42 साल बाद शेष एक पटवारी सहित चार आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की अदालत में आरोप पत्र पेश किया।


राजस्व ग्राम सीसारमा में जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों व कर्मचारियों ने पदस्थापन के दौरान तत्कालीन सरपंच रोशनलाल नागदा द्वारा अपनी हस्तलिपि में फैसले किए गए उनमें नामान्तिकरण का राजस्व रिकॉर्ड में नियम विरूद्ध मार्किंग करने में कार्यालय भू अभिलेख जिला कार्यालय तहसीलदार गिर्वा तथा पटवार मंडल सीसारमा में पदस्थापित तत्कालीन आरोपी पटवारी लक्ष्मीलाल जैन, शौकत अली, तेज सिंह चौहान, चमनलाल, पटवारी चमनलाल कुमावत, पटवारी गोविंद सिंह झाला, राजस्व निरीक्षक रामचंद्र, कुंदनलाल सिंघवी, नजर सिंह चौधरी एवं नायब तहसीलदार नटवरलाल ओझा, कार्यालय कलेक्टर भू अभिलेख में पदस्थापित रिकॉर्ड कीपर मोतीलाल कोठारी, आरोपी रिकॉर्ड कीपर मोडीलाल पालीवाल, इरशाद अहमद द्वारा विभिन्न स्तरों पर आरोपी सरपंच रोशनलाल, भैरूलाल ने वर्ष 1963 से 1976 तक अभिलेखों में छेड़छाड़ कर तत्कालीन सरपंचों के कहे अनुसार सुविधा मुहैया कराने के षडय़ंत्र में सहयोग किया। आरोपियों ने षडय़ंत्र रचकर पद एवं अधिकारों का दुरूपयोग कर धोखे से छल करते हुए मूल्यवान सम्पति को स्वयं प्राप्त करने एवं अन्य परिदत्त करने के लिए दस्तावेजों में कूटरचना किया जाना जांच में प्रमाणित पाया गया। इन आरोपियों ने आपसी षडय़ंत्र रचकर अपने पद एवं अधिकारों का दुरूपयोग कर धोखे से छल कर मूल्यवान सम्पत्ति को स्वयं प्राप्त करने एवं अन्य परिचितों को हस्तान्तरित करने के लिए कूटरचित दस्तावेजों को तैयार किया गया। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल यूनिट ने ग्राम सीसारमा निवासी भंवरलाल उर्फ जमनालाल पुत्र भैरूलाल, सीसारमा निवासी जगन्नाथ पुत्र नाथूलाल तेली, नागदा मोहल्ला सीसारमा निवासी अवैध लाभार्थी कुंदनलाल पुत्र चुन्नीलाल नागदा और मांडक का गुड़ा नाथद्वारा निवासी राजसमंद पटवारी गोविंद सिंह पुत्र देवी सिंह झाला के खिलाफ 13 (1)(सी)(डी), 13 (2) पीसी एक्ट 1988, भादसं की धारा 193, 420, 467, 468, 471 व 120-बी में दोषी मानते हुए इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल यूनिट के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह भाटी ने चालान पेश किया। इस मामले में लिप्त अन्य आरोपी तत्कालीन सरपंच रोशनलाल नागदा एवं भैरूलाल, अवैध लाभार्थी शंकरलाल, नाथूलाल, रता, दुर्गाशंकर, चैनाराम नागदा, भैरूलाल, कना गाडरी, पटवारी लक्ष्मीलाल जैन, शौकत अली, तेज सिंह चौहान, चमनालाल, धन्नालाल कुमावत, राजस्व निरीक्षक रामचंद्र मंडोवरा, कुंदनलाल नागदा, रिकॉर्ड कीपर मोतीलाल कोठारी, मोड़ीलाल पालीवाल, इरशाद अहमद भी मामले में दोषी पाए गए लेकिन मामले की जांच के दौरान ही इन सभी की मृत्यु हो गई। आरोप पत्र में बताया गया कि मृत्यु हो जाने के कारण इन सभी के खिलाफ रिकॉर्ड प्राप्त नहीं हुआ। इस कारण इनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने का औचित्य नहीं है। शेष रहे चार आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया।

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