Friday , 18 October 2019
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13 में 8 विधायकों के इस्तीफे गैर कानूनी

कर्नाटक में फंसा सियासी पेच, स्पीकर बोले- बैठक से कांग्रेस के 21 विधायक गायब
बता दें कि विधायकों के इस्तीफे के बाद प्रदेश में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि उसे सरकार बनाने का मौका मिलेगा, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने मंत्रियों को ले जाने के लिए भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा के पीए को भेजने का आरोप भी लगाया है। विधानसभा स्पीकर को जल्द ही कांग्रेस-जेडीएस के 13 विधायकों के इस्तीफे पर फैसला करना है। दोनों दलों के अलावा दो निर्दलीय विधायक भी सरकार से समर्थन वापस ले चुके हैं। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 21 विधायकों के शामिल न होने से अटकलें तेज हो गई हैं।

बेंगलुरू (एजेंसी)। कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के 13 विधायकों के इस्तीफे पर विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार का बड़ा बयान सामने आया है। स्पीकर ने राज्यपाल वजुभाई वाला को खत लिखकर बताया है कि कोई बागी विधायक उनसे नहीं मिला है। 13 में 8 विधायकों के इस्तीफे कानून के मुताबिक नहीं हैं। मैंने इन विधायकों को पेश होने का समय दिया है। स्पीकर के इस कदम से कर्नाटक का संकट गहरा गया है और साथ ही इन विधायकों के इस्तीफे को लेकर संशय भी।
स्पीकर ने बताया, उन्होंने (गवर्नर वजुभाई वाला) विश्वास जताया है कि मैं संविधान का पालन करूंगा। राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से मेरा कोई संबंध नहीं है। मैं संविधान के अनुसार काम कर रहा हूं। अभी तक मुझसे किसी विधायक ने मिलने का समय नहीं मांगा है। अगर कोई मुझसे मिलना चाहता है तो मैं अपने दफ्तर में उपलब्ध रहूंगा। मुझे जिम्मेदारी से फैसला करना है। नियमों के अनुसार कोई समयसीमा तय नहीं है। क्लॉज में कहा गया है कि अगर स्पीकर को विश्वास है कि इस्तीफा अपनी इच्छा से दिया गया है तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, वरना….मुझे नहीं पता, मुझे बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। मुझे देखना पड़ेगा। कर्नाटक में ‘शिकारÓ की
राजनीति का विपक्ष का आरोपसदन से बहिर्गमननई दिल्ली (एजेंसी)। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस -जनता दल सेकुलर गठबंधन के विधायकों के इस्तीफे और सरकार गिराने के आरोपों को लेकर लोकसभा में विपक्ष ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के विरूद्ध नारेबाजी और सदन से बहिर्गमन किया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा ‘शिकारÓ की राजनीति करके लोकतंत्र को नष्ट कर रही है। इस पर सत्तापक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो भी हो रहा है, वह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है। वह अपने घर को संभाल नहीं पा रही है और यहां उसके सदस्य सदन को बाधित कर रहे हैं।
लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के बाद जैसे ही शून्यकाल आरंभ करने की घोषणा की, कांग्रेस के सदस्य खड़े हो गये और कर्नाटक में राजनीतिक उठापटक का विषय उठाने लगे तो अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सदस्य कल इस विषय को उठा चुके हैं और एक विषय दो बार नहीं उठाया जा सकता। इससे कांग्रेस के सदस्य उत्तेजित हो गये और नारेबाजी करने लगे। उन्होंने ‘वी वांट जस्टिसÓ, ‘लोकतंत्र को कुचलना बंद करोÓ, ‘तानाशाही नहीं चलेगीÓ और ‘मोदी सरकार हाय हायÓ के नारे लगाने शुरू कर दिये। कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने वाले राहुल गांधी ने भी अपने स्थान पर बैठे बैठे नारे लगाये। इस बीच अध्यक्ष के नाम पुकारने पर विभिन्न सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाये। बाद में कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्य आसन के सम्मुख पहुंच गये और नारेबाजी जारी रखी। तभी संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने नियम पुस्तिका का हवाला देते हुए कहा कि नियम 197 के तहत स्पष्ट किया गया है कि एक विषय को दो बार नहीं उठाया जा सकता है। (शेष पेज 8 पर)

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