12 राज्यों ने कहा – ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई किसी मरीज की मौत

'राष्ट्रीय आपातकाल जैसे हालात' - ऑक्सीजन की कमी पर सुको ने केंद्र से मांगा जवाब
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नई दिल्ली (एजेंसी)। ऑक्सीजन की कमी से मौतों को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय को 13 राज्यों का जवाब मिल गया है। इनमें से 12 राज्यों ने ऑक्सीजन की कमी के चलते मौत की बात से इनकार किया है, जबकि, एक राज्य ने कुछ मरीजों की मौत को संदिग्ध माना है। हाल ही में सदन में मंत्रालय की तरफ से दिए गए बयान के बाद बवाल मच गया था। सरकार ने कहा था कि देश में ऑक्सीजन की कमी के चलते किसी मौत की जानकारी नहीं है। इसके बाद राज्यों को ये डेटा साझा करने के निर्देश मंत्रालय की तरफ से दिए गए थे।

स्वास्थ्य मंत्रालय को दिए जवाब में 13 में से 12 राज्यों ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की बात नहीं मानी है। इनमें ओडिशा, अरूणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नागालैंड, असम, लद्दाख, जम्मू एंड कश्मीर, सिक्किम, त्रिपुरा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश का नाम शामिल है। जबकि, पंजाब ने 4 मौतों को संदिग्ध माना है। कहा जा रहा है कि सरकार इसी सत्र के दौरान ये आंकड़े सदन में पेश कर सकती है।

बीती जुलाई में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने राज्यसभा में सवाल किया था। उन्होंने पूछा था, क्या यह सच है कि कोविड-19 की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की भारी कमी होने के कारण भारी संख्या में रोगियों की मृत्यु सड़क और अस्पतालों में हुई। इसके अलावा उन्होंने सरकार से अलग-अलग राज्यों की तरफ से की गई मांग और आपूर्ति को लेकर भी सवाल किए थे। साथ ही उन्होंने संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर ऑक्सीजन सप्लाई के मामले में सरकार से तैयारियों को लेकर सवाल किया था।

इस पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय राज्य मंत्री डॉक्टर भारती प्रवीण पवार ने कहा था, स्वास्थ्य राज्य का विषय है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सूचित की जाने वाली मौतों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के जारी किए गए हैं। तदनुसार, सभी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र मामले और मौतों की नियमित आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को रिपोर्ट करते हैं। तथापि, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा विशिष्ट रूप से ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई किसी मौत की सूचना नहीं दी गई है।

साथ ही उन्होंने बताया था कि देश में पहली लहर के दौरान 3095 मीट्रिक टन की तुलना में दूसरी लहर के दौरान देश में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की मांग करीब 9000 मीट्रिक टन तक पहुंच गई थी।


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