रेगिस्तान में फहराया 1000 किलो का तिरंगा- सेना दिवस पर जैसलमेर छावनी में दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज

रेगिस्तान में फहराया 1000 किलो का तिरंगा- सेना दिवस पर जैसलमेर छावनी में दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज
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जैसलमेर (कार्यालय संवाददाता)। जैसलमेर की रेतीली सरजमीं दुनिया का सबसे बड़ा तिरंगा डिस्प्ले कर गौरव से भरे पल की गवाह बन गई। सेना दिवस के मौके पर शनिवार को जैसलमेर के मिलिट्री स्टेशन में यह इतिहास रचा गया। झंड़े का वजन करीब एक हजार किलो है। 225 फीट लंबे और 150 फीट चौड़े खादी से बने तिरंगे को बैटल एक्स डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल योगेंद्र सिंह मान ने बटन दबाकर डिस्प्ले किया। इस दौरान सेना के कई अधिकारी, जैसलमेर वायुसेना स्टेशन कमांडर ग्रुप कैप्टन ए एस पन्नू, जैसलमेर के पूर्व महारावल चैतन्यराज सिंह व नाचना ठाकुर विक्रम सिंह मौजूद रहे। इस दौरान देशभक्ति के गीतों का कार्यक्रम भी हुआ।

कई किलोमीटर दूर से ही नजर आता है तिरंगा

मिलिट्री स्टेशन में वॉर म्यूजियम के पास की पहाड़ी पर डिस्प्ले किए गए इस तिरंगे की छटा दूर कई किलोमीटर से ही नजर आ रही है। आसमान से इसको देखने पर ऐसा लग रहा है जैसे धरती ही तिरंगा मयी हो गई है। दरअसल, खादी से बना ये तिरंगा दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज है। ये तिरंगा करीब 225 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा है और इसका वजन करीब 1 हजार किलो बताया जा रहा है। इस तरह से खादी से बने झंडे पहले जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख में लगाए जा चुके हैं। इस बार आजादी के स्वर्णिम वर्ष को मनाते हुए इसे जैसलमेर में भी लगाने का आयोजन किया गया है। इससे पहले 2021 में 2 अक्टूबर को लेह में भी 225 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा तिरंगा डिस्प्ले किया जा चुका है। उसका वजन भी एक हजार किलो था। इसे सेना की 57 इंजीनियर रेजिमेंट ने तैयार किया था।


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