Wednesday , 11 December 2019
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हैदराबाद गैंगरेप और मर्डर पर संसद में उबाल

भीड़ के हवाले किए जाएं रेपिस्ट
नई दिल्ली (एजेंसी)। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में महिला वेटनरी डॉक्टर की रेप के बाद निर्मम हत्या से देशभर में उबाल है। सोमवार को इस मामले की गूंज संसद में भी सुनाई दी। दोनों सदनों में सभी दलों के सदस्य इस जघन्य कांड पर बेहद आक्रोशित नजर आए। सांसदों ने दोषियों को जल्द से जल्द फांसी के लिए कानून को और कड़ा करने की वकालत की।
राज्यसभा में तो समाजवादी पार्टी की सांसद और बॉलिवुड ऐक्ट्रेस जया बच्चन तो इस घटना से इस कदर आक्रोशित थीं कि उन्होंने बलात्कारियों को भीड़ के हवाले कर डालने का सुझाव दे डाला। राज्यसभा के सभापति जया के इस सुझाव से थोड़ा हैरान नजर आए। वहीं, एआईएडीएमके की सांसद विजिला सत्यानंद चर्चा के दौरान भावुक हो गईं। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि देश बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं रहा। उधर, लोकसभा में सदन के उपनेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार दोषियों को फांसी दिलाने के लिए कानून को और कड़ा करने के लिए तैयार है।बहुत चर्चा हुई, इस बार सरकार से सवाल पूछा जाए : जया बच्चन
जया ने कहा कि इस तरह के अत्याचार पर सदन कितनी ही बार चर्चा कर चुका है। उन्होंने कहा, पता नहीं कि हम कितनी बार इस पर चर्चा करते हैं। हैदराबाद हुआ, निर्भया हुआ, कठुआ हुआ। मुझे लगता है कि इस पर सरकार से इस पर सवाल पूछा जाना चाहिए और उन्हें इस पर सटीक जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, इस बार सरकार से पूछा जाना चाहिए कि क्या हुआ, उन्होंने इससे कैसे टैकल किया और इसमें इन लोगों को अब तक कितना न्याय मिला है? जया ने हैदराबाद की घटना में वहां सुरक्षा-व्यवस्था में लगे लोगों की कोताही का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह जो घटना हैदराबाद में हुई, उससे पहले दिन भी उसी जगह एक हादसा हुआ। क्या वहां के जो सिक्यॉरिटी इनचार्ज हैं, क्या आपको नहीं लगता है कि उनसे सवाल करना चाहिए कि वह इलाके को सुरक्षित क्यों नहीं कर सके? इन लोगों को पूरे देश के सामने शर्मिंदा करना चाहिए, ये लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं।’रेपिस्ट के अपराध का उम्र से क्या लेना-देनाÓ
राज्यसभा में सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि इस तरह की अमानवीय घटना से कानून के जरिए नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा, उम्र को लेकर भी सबको विचार करना चाहिए। कई लोग हैं जो कहने लगते हैं कि आरोपी नाबालिग है। जो दुष्कृत्य और अपकृत्य कर सकता है, उसका उम्र से क्या लेना-देना है? कुछ सांसदों ने मेजें थपथपाकर सभापति के इस सुझाव का समर्थन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बलात्कार जैसी हैवानियत पर रोक लगाने में नए-नए कानूनों की जगह राजनीतिक इच्छाशक्ति ही कारगर हो सकती है। उन्होंने कहा कि अभी फास्ट ट्रैक कोर्ट से भी सजा मिलती है तो अपील पर अपील करने के चलन के कारण मुजरिम बचता चला जाता है। उन्होंने कहा, फास्ट ट्रैक के बाद भी अपील पर अपील की इतनी लंबी प्रक्रिया है कि सब खत्म हो जाता है। क्या ऐसे लोगों पर दया करनी चाहिए? और कोर्ट से सजा मिलने के बाद राज्य सरकार, फिर केंद्र सरकार, फिर गृह मंत्रालय और फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने की व्यववस्था क्यों है?राजनाथ बोले- कानून और सख्त करने के लिए सरकार तैयार
इससे पहले राजनाथ सिंह ने हैदराबाद की घटना को बेहद अमानवीय बताते हुए कहा कि सभी दलों के सदस्य कानून को जितना कठोर बनाना चाहते हैं, सरकार उसके लिए तैयार है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से कहा कि अगर इस मामले पर सदन में चर्चा की जरूरत महसूस हो रही हो तो सरकार तैयार है। राजनाथ ने कहा, हैदराबाद की जो घटना घटी है, मैं मानता हूं कि इससे बड़ा दूसरा कोई अमानवीय कृत्य नहीं हो सकता है। सदन में सभी दलों के सदस्यों ने इस घटना के आरोपियों (शेष पेज 8 पर)’आईपीसी-सीआरपीसी में संशोधन की तैयारीÓ
महिला अत्याचार के प्रति जीरो टॉलरेंस : केंद्र
नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने हैदराबाद बलात्कार कांड पर गहरा दु:ख प्रकट करते हुए सोमवार को कहा कि वह आतंकवाद और भ्रष्टाचार के साथ-साथ महिलाओं पर अत्याचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंसÓ (कतई सहन नहीं करने) की नीति पर काम करेगी और इसके लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन करने के लिए तैयार है। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने यहां लोकसभा में शून्यकाल में विभिन्न दलों के सदस्यों द्वारा यह मामला उठाये जाने के बाद स्पष्टीकरण देते हुये कहा कि हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक के साथ जो घटना हुई है उसको लेकर वह उसके परिवार के संपर्क में हैं। वह पुलिस महानिदेशक और हैदराबाद के पुलिस आयुक्त से भी सतत संपर्क में हैं। इस घटना की पूरी संसद ने ङ्क्षनदा की है। रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार इसके लिए कानूनी कदम उठाने के लिए तत्पर है। केन्द्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जिस प्रकार से आतंकवाद और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। सरकार उसी प्रकार से महिला अत्याचार को लेकर ‘जीरो टॉलरेंसÓ के आधार पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए आईपीसी और सीआरपीसी के संशोधन के लिए तैयार है। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरडी) को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है। राज्यों को पत्र लिखा गया है और इस बारे में मसौदा तैयार हो गया है।

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