Saturday , 21 September 2019
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स्पीकर ने एक निर्दलीय, दो कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित किया

विधायकों को बुलाया था, वे नहीं आए : स्पीकर
स्पीकर रमेश कुमार ने कहा- हां, कोर्ट ने इस्तीफे पर किसी भी निर्णय को मेरे विवेक पर छोड़ा है। मैं अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करूंगा। मैंने विधायकों को बुलाया था। मगर वे नहीं आए। उनके वकील मेरे पास आए। उन्होंने वही कहा जो वे लोग करना चाहते थे। यह चैप्टर बंद हो चुका है।बेंगलुरू (एजेंसी)। कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर केआर रमेश कुमार ने गुरुवार को निर्दलीय विधायक आर. शंकर समेत कांग्रेस के दो बागी विधायक रमेश एल.जे. और महेश कुमाथली को अयोग्य घोषित किया। बागी विधायकों ने एचडी कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस लिया था। स्पीकर को कांग्रेस और जेडी(एस) के बागी विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लेना है।
कुमार ने कहा- मैं इस मामले में किसी फैसले पर पहुंचने के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करूंगा ताकि सुप्रीम कोर्ट ने मुझ पर जो भरोसा दिखाया है, वह कायम रहे। बागी विधायकों के मेरे पास आने की समयसीमा खत्म हो चुकी है। कानून सभी के लिए बराबर है। फिर वो मजदूर हो या फिर भारत का राष्ट्रपति।
‘राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं गवर्नरÓ
भाजपा के राज्य प्रवक्ता जी. मधुसूदन ने कहा, अगर विधानसभा अध्यक्ष बागी विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार करने या खारिज करने में ज्यादा समय लेते हैं तो राज्यपाल (वजुभाई वाला) राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं, क्योंकि इस तरह की स्थिति में हम सरकार बनाने के लिए दावा करना पसंद नहीं करेंगे। पार्टी विधानसभा अध्यक्ष के अयोग्य करार देने के फैसले को लेकर अस्पष्ट है। कांग्रेस और जेडीएस ने विप को नजरअंदाज करने को लेकर बागी विधायकों को अयोग्य करार देने की सिफारिश की है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी थी बागी विधायकों को विप से सुरक्षा : सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई के आदेश में कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार बागियों के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन बागियों ने विधानसभा में मतदान में भाग नहीं लिया। 3 जजों की पीठ ने यह भी कहा कि बागियों को सदन में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब उनके इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष 11 जुलाई से लंबित हैं।
इस्तीफों पर फैसले में ज्यादा देरी हुई तो फिर सुको जा सकते हैं बागी : विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफों पर फैसला लेने में ज्यादा समय लेने पर बागी विधायकों के शीर्ष अदालत से इसमें दखल के लिए संपर्क किए जाने की संभावना है। (शेष पेज ८ पर)
बागी विधायकों की अदालत के समक्ष 10 जुलाई की याचिका में विधानसभा अध्यक्ष को तत्काल इस्तीफा स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
बागियों के इस्तीफे पर स्पीकर के फैसले का इंतजार कर रही भाजपा
मधुसूदन ने कहा, इस्तीफों के स्वीकार किए जाने तक विधानसभा का संख्या बल 225 बना रहेगा, इसमें एक नामित सदस्य भी शामिल है, जैसा की बागी भी अभी सदस्य हैं, इस तरह से साधारण बहुमत के लिए 113 संख्या जरूरी है। दो निर्दलियों के समर्थन से हमारी संख्या 107 है, जो बहुमत से 6 कम हैं। अगर विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं या सदस्यों को अयोग्य करार देते हैं तो विधानसभा का संख्या बल घटकर 210 हो जाएगी और आधी संख्या 106 हो जाएगी, जिससे भाजपा दो निर्दलीयों के सहयोग से सरकार बनाने में सक्षम होगी।
मधुसूदन ने कहा, अगर विधानसभा अध्यक्ष व शीर्ष अदालत को फैसले में समय लगता है तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं और विधानसभा को निलंबित रख सकते हैं, तब हम दावा करने की स्थिति में हो सकते हैं और अपने बहुमत पर सरकार बना सकते हैं। अगर बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया जाता है या वे अयोग्य करार दिए जाते हैं तो 15 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 6 महीने के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।

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