Saturday , 14 December 2019
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सुप्रीम कोर्ट ने रक्षाबंधन पर भाई-बहन को मिलाया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रक्षाबंधन के मौके पर एक दिलचस्प फैसला सुनाया है। मां-बाप के बीच झगड़े के चलते भाई-बहन अलग-अलग रह रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों भाई-बहन को रक्षाबंधन पर मिलने की इजाजत दे दी है।
दिल्ली में एक पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ तो दोनों अलग-अलग रहने लगे, लेकिन कोर्ट ने बच्चों की कस्टडी किसी को नहीं दी। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल की जिला अदालत के एक जज को बच्चों का इनचार्ज बना दिया और दोनों को नैनीताल के स्कूल में भेज दिया।

मां-बाप ने बच्चों को अलग किया तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा रक्षाबंधन पर भाई-बहन को मिलने दिया जाए । उस वक्त कोर्ट ने कहा था, मां-बाप के बीच संबंध अच्छे नहीं हैं। इस उम्र में बच्चों का उनके साथ रहना ठीक नहीं होगा। ऐसे में बच्चों को किसी बोर्डिंग स्कूल में रखा जाना चाहिए।
हाल ही में बच्चे के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी कि बच्चों को रक्षाबंधन पर मिलने दिया जाए। जस्टिस कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि भाई बहनों को कुछ समय साथ में बिताना चाहिए। उनके माता-पिता के बीच संबंधों की कड़वाहट का असर बच्चों पर नहीं पडऩा चाहिए।

इसके बाद बेंच ने नैनीताल के जिला अदालत के जज से पूछा कि क्या बच्चे रक्षाबंधन में दिल्ली आना चाहते हैं? और अगर आते हैं तो वो कहां रहना पसंद करेंगे पापा या मम्मी के साथ?
जिला अदालत के जज ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट भेजी। इसमें कहा गया कि वो रक्षाबंधन के मौके पर मिलना चाहते हैं और वो पापा के साथ रहना पसंद करेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छुट्टी के बाद फिर से दोनों को स्कूल पहुंचा दिए जाए।

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