Monday , 17 June 2019
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज घोष हो सकते हैं देश के पहले लोकपाल

नई दिल्ली (एजेंसी)। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले मोदी सरकार की ओर से देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल हो सकते हैं। केंद्र सरकार के इस फैसले का अन्ना हजारे ने स्वागत किया है और इसे 48 साल की जनता की लड़ाई का नतीजा करार दिया है। बता दें कि लोकपाल नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने यह फैसला लिया है। जस्टिस घोष मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे और फिलहाल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं।
बता दें कि लोकपाल नियुक्ति की सेलेक्ट कमिटी में प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस या उनके द्वारा नामित जज, नेता विपक्ष, लोकसभा अध्यक्ष और एक जूरिस्ट होता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में नेता विपक्ष नहीं होने की स्थिति में विपक्षी दल के नेता को विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल करने की बात सरकार ने कही थी।
चयन समिति की बैठक में नहीं गए थे खडग़े
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने लोकपाल कमिटी की बैठक में हिस्सा लेने से इनकार करते हुए सरकार पर मनमानी का आरोप लगाया था। हालांकि, तमाम विरोध के बाद आखिरकार मोदी सरकार ने चुनावों से पहले लोकपाल नियुक्त करने का फैसला किया है। कौन हैं जस्टिस पीसी घोष
जस्टिस घोष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रह चुके हैं। वह आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे हैं। वह अपने फैसलों में मानवाधिकारों की रक्षा की बात बार-बार करते थे। जस्टिस घोष को मानवाधिकार कानूनों पर उनकी बेहतरीन समझ और विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।

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