सी.पी. ने सुको में पैरवी के लिए सिब्बल को क्यों चुना?

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नई दिल्ली (एजेंसी)। कानूनी पेशे के 2 प्रमुख दिग्गज अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल हमेशा एक- दूसरे के विरोधी रहे हैं। संयोग से दोनों राज्यसभा के सदस्य हैं और दोनों कांग्रेस पार्टी में हैं, लेकिन जिस पेशे के लिए वे जाने जाते हैं, उसमें वे एक-दूसरे को बिल्कुल भी नहीं पसंद करते हैं। पार्टी मंचों पर दोनों को एक साथ कभी भी नहीं देखा जा सकता है, लेकिन राजस्थान के राजनीतिक संकट ने एक दिलचस्प कहानी सामने ला दी।
राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सी.पी. जोशी ने अभिषेक मनु सिंघवी को राजस्थान हाईकोर्ट में अपने वकील के रूप में नियुक्त किया। विधानसभा अध्यक्ष ने 19 असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों की याचिका को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जो उनके नोटिस से असहमत थे।
सिंघवी ने स्पीकर की ओर से सुनवाई के दौरान कहा कि वह इन विधायकों के खिलाफ तब तक कोई कार्रवाई नहीं करेंगे, जब तक कि कोर्ट अपना फैसला नहीं सुनाता। अध्यक्ष इस बात से नाराज थे कि उनकी ओर से हाईकोर्ट में ऐसा विकल्प क्यों दिया गया जिसके चलते हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में स्पीकर को कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया। जिसके चलते नाराज जोशी ने कपिल सिब्बल को दिल्ली में तुरंत फोन किया और उनसे अपना मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाने का अनुरोध किया। इसके बाद सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व किया।
सूत्रों का कहना था कि सिंघवी राजस्थान से हैं और राज्य में कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख नेता हैं। वह राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी करीबी हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में आने पर निश्चित रूप से कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करेंगे, लेकिन यह उनके लिए एक आश्चर्यजनक अनुभव था कि अध्यक्ष ने उनकी बजाय सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल को चुना। यह अलग बात है कि बाद में राजनीतिक घटनाक्रम के कारण स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया क्योंकि उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाते समय गलती की थी। वहीं अब स्पीकर फिर से संशोधित याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गए हैं, एक अजीब स्थिति है।


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