Thursday , 13 December 2018
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सिंधु सायना श्रीकांत और प्रणय को 80-80 लाख

पीबीएल के लिए हुई नीलामी

नई दिल्ली। ओलम्पिक रजत पदक विजेता पीवी ङ्क्षसधू , राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण विजेता सायना नेहवाल, शीर्ष पुरूष खिलाड़ी किदाम्बी श्रीकांत और एचएस प्रणय को वोडाफोन प्रीमियर बैडङ्क्षमटन लीग (पीबीएल) के चौथे संस्करण के लिए सोमवार को हुई नीलामी में 80-80 लाख रूपये की कीमत मिली है।
इस साल लीग में नौ टीमें हिस्सा ले रही हैं और इस साल की नई टीम पुणे 7 एसेज भी नीलामी में उतरी। नीलामी के पहले दौर में 9 आइकन खिलाडिय़ों को उतारा गया जिनमें से एक को छोड़कर शेष 8 आइकन खिलाडियों को 80-80 लाख रूपये मिले। कोरिया के सोन वान सो को अवध वारियर्स ने 70 लाख रूपये में $खरीदा।
ङ्क्षसधू को हैदराबाद हंटर्स, सायना को नार्थ ईस्टर्न वारियर्स, श्रीकांत को बेंगलुरू रैप्टर्स और प्रणय को दिल्ली डैशर्स ने 80-80 लाख रूपये में खरीदा। ओलम्पिक चैंपियन स्पेन की कैरोलिना मारिन को नयी टीम पुणे 7 एसेज ,वल्र्ड नम्बर-1 डेनमार्क के विक्टर एक्सेलसन को अहमदाबाद स्मैश मास्टर्स, कोरिया के सुंग जी ह्यून को चेन्नई स्मैशर्स और ली योंग देई को मुम्बई रॉकेट््स ने 80-80 लाख रूपये की कीमत पर खरीदा।’भजन करने
से होती है अच्छी पैदावारÓकृषि विवि के वीसी
के बयान पर विवाद
नागपुर। महाराष्ट्र में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉक्टर विलास भाले के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। एक कार्यक्रम में भाले ने बयान दिया था कि पवित्र भजन करके फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, इसके बाद से ही विदर्भ में इस पर सवाल उठे हैं।
कुछ दिन पहले विश्वविद्यालय में अंतर विश्वविद्यालय युवा उत्सव का आयोजन किया गया था। इस आयोजन के उद्घाटन भाषण में भाले ने भारतीय कला और संस्कृति की महानता के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान उन्होंने कहा, शास्त्रीय संगीत मवेशियों में दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है और भजन से फसलों को बढऩे में मदद मिलती है। विदर्भ के कई किसान संगठनों ने भाले के इस बयान की आलोचना की है और उनके बयान पर सवाल उठाया है। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने उनके खिलाफ एक पत्र जारी किया है और उनसे सवाल किए हैं। इसके बाद भाले ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया।
भाले ने कहा कि उनके बयान की गलत व्याख्या की गई और उन्होंने कभी नहीं कहा कि पवित्र भजन फसलों को बढ़ाने में मददगार होते हैं। इसके बजाय उन्होंने कहा कि भजन करने से फसलों की पैदावार
प्रभावित होती है, उनका यह बयान शास्त्रीय संगीत के संबंध में था।

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