Thursday , 17 January 2019
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सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण लोकसभा में मंजूर

लोस में 5 घंटे चर्चा, पक्ष में ३२३ और विरोध में पड़े 3 वोट
नई दिल्ली (एजेंसी)। सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10′ आर्थिक आरक्षण के प्रस्ताव वाले बिल को लोकसभा से मंजूरी मिल गई है। आरक्षण के लिए लाए गए 124वें संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा ने बहुमत के साथ पारित किया। बिल में सभी संशोधनों को बहुमत से मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक के समर्थन में 323 वोट पड़े, जबकि महज 3 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। कुल 326 सांसदों ने मतदान किया था। इस विधेयक को लेकर मंगलवार को करीब 5 घंटे तक चली बहस में लगभग सभी दलों ने इसका पक्ष लिया, लेकिन किसी ने भी इसका खुलकर विरोध नहीं किया। हालांकि कई सांसदों ने इस विधेयक को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए और कानूनी एवं संवैधानिक तौर पर इसके टिकने को लेकर अपनी बात कही।
इसके जवाब में अरूण जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कैप लगाई थी, वह जातिगत आरक्षण को लेकर ही थी। अरूण जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कई बार दोहराया था कि हम सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को मिलने वाले आरक्षण पर ही यह सीमा तय कर रहे हैं। इसके पीछे अदालत का तर्क यह था कि आप अन्य वर्ग यानी अनारक्षित वर्ग हैं, उनके लिए सीट नहीं छोड़ोगे तो फिर पुराने भेदभाव को तो समाप्त किया जा सकेगा, लेकिन नया भेदभाव शुरू हो जाएगा। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए अदालत ने कैप लगाई थी।
इससे पहले विधेयक का किसी भी दल ने सीधे तौर पर विरोध तो नहीं किया, लेकिन सरकार की नीति और नीयत को लेकर सवाल जरूर खड़े किए। राजद के सांसद जयप्रकाश नारायण यादव और सपा के धर्मेंद्र यादव ने इस बिल को धोखा करार देते हुए आबादी के अनुपात में आरक्षण की बात की।
सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने 124वें संविधान संशोधन बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने सत्ता में आते ही सबका साथ और सबका विकास का वादा किया था। प्रधानमंत्री ने पहले ही भाषण में गरीबों के कल्याण की बात कही थी, आज ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि सामान्य वर्गों के गरीब लोगों का आरक्षण देने का काम हो रहा है। मंत्री ने कहा कि बिल पर करीब 30 सांसदों ने अपनी बात रखी हैं और सभी ने करीब-करीब उन्हीं बातों को दोहराया है। उन्होंने कहा कि हमने आर्टिकल 15 में सब आर्टिकल 6 जोड़ा है जो शैक्षणिक संस्थाओं में 10′ का आरक्षण देता है ।
कोर्ट में भी टिकेगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई 50 फीसदी की सीमा के सवालों पर मंत्री गहलोत ने कहा कि पहले आरक्षण रद्द करने के जो भी आदेश सुप्रीम कोर्ट से आए थे वो संवैधानिक प्रावधान के बगैर आए थे। उन्होंने कहा कि संविधान में प्रावधान न होने की वजह से वह सभी आदेश रद्द किए गए थे। हमारी नीति और नीयत अच्छी है इसलिए हम संविधान में संशोधन करके आरक्षण देने जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि उम्मीद है, सुप्रीम कोर्ट भी अब इसको खारिज नहीं कर सकता। आज राज्यसभा में होगा पेशराज्यसभा में भी सरकार की राह आसान
राज्यसभा में यह बिल बुधवार को पेश किया जाएगा। जहां भी इस बिल के पारित होने के पूरे आसार है। राज्यसभा में सांसदों की मौजूदा संख्या 244 है। बिल पारित कराने के लिए वहां दो तिहाई सांसदों यानी 163 वोटों की जरूरत होगी। भाजपा (73) समेत एनडीए के पास 88 सांसद हैं। कांग्रेस (50), सपा (13), बसपा (4), राकांपा (4) आप (3) ने बिल का समर्थन किया है। इनकी संख्या 74 होती है। इस तरह एनडीए और बिल का समर्थन कर रहे विपक्षी सांसदों की कुल संख्या 162 हो जाती है। 13-13 सांसदों वाली तृणमूल, अन्नाद्रमुक या बीजद (9), तेदेपा (6) और टीआरएस (6) में से किसी एक के समर्थन करने पर भी यह बिल राज्यसभा में आसानी से पारित हो जाएगा।

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