Thursday , 13 December 2018
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सरकार को मिला वायुसेना चीफ का साथ

राफेल हमारे लिए ‘बूस्टर डोज’
नई दिल्ली। वायु सेना में लड़ाकू विमानों के स्क्वैड्रनों की घटती संख्या को ङ्क्षचता का कारण बताते हुए वायु सेना प्रमुख बी एस धनोआ ने बुधवार को कहा कि राफेल लड़ाकू विमान उसके लिए ‘बूस्टर डोजÓ है और दक्षिण एशिया में हवाई ताकत के परिदृश्य को बदल देगा।
एयर चीफ मार्शल धनोआ ने 8 अक्टूबर को मनाये जाने वाले वायु सेना दिवस से पहले वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में सवालों के जवाब में कहा कि सरकार का 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का निर्णय साहसिक है। उन्होंने कहा कि लड़ाकू विमानों की निरंतर कम होती संख्या वायु सेना के लिए ङ्क्षचता का सबब है और ऐसे में राफेल लड़ाकू विमान और रूस से खरीदी जाने वाली हवाई सुरक्षा मिसाइल प्रणाली एस-400 वायु सेना के लिए ‘बूस्टर डोजÓ हैं। उन्होंने कहा कि राफेल अत्याधुनिक हथियारों से लैस ऐसा विमान है जो दक्षिण एशिया में हवाई मारक क्षमता के परिदृश्य को बदल देगा। यह दुश्मनों को करारा जवाब देने में सक्षम है।
वायु सेना में विमानों की कमी को देखते हुए केवल 36 विमान खरीदने के निर्णय के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पुराने सौदे में गतिरोध उत्पन्न हो गया था और हमारे पास केवल तीन विकल्प थे। पहला इंतजार करते रहते, दूसरा खरीद के प्रस्ताव (आरएफपी) को वापस लेते और तीसरा आपात खरीद करते। इस स्थिति में तीसरा विकल्प अपनाया गया और 36 विमानों की आपात खरीद की गयी। उन्होंने कहा कि वायु सेना का मानना है कि लड़ाकू स्क्वैड्रनों की संख्या 31 से कम नहीं आनी चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या केवल 36 विमान खरीदने के निर्णय पर पहुंचने से पहले सरकार ने वायु सेना से पूछा था उन्होंने कहा कि वायु सेना से उचित स्तर पर सलाह ली गयी थी। उसने कुछ विकल्प सुझाये थे और उन पर सरकार को निर्णय लेना था।
राफेल सौदे की कीमत को लेकर उठाये जा रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि सौदे की कीमत के बारे में वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री और रक्षा राज्य मंत्री ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने हालांकि कहा कि सौदे पर बातचीत करने वाली समिति को पहले सौदे की कीमत का पता पहले से ही था तो ऐसे में वह उससे ज्यादा कीमत पर सौदा क्यों करती। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री और रक्षा राज्य मंत्री कह चुके हैं कि यह सौदा कुल मिलाकर 20 प्रतिशत सस्ता है।
धनोआ ने कहा, सरकार ने बोल्ड कदम उठाते हुए 36 राफेल फाइटर विमान खरीदा। एक उच्च प्रदर्शन वाला और उच्च तकनीक से सुसज्जित लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को दिया गया है। ताकि हम अपनी क्षमता को बढ़ा सके।
वायुसेना चीफ धनोआ ने कुछ दिन पहले कहा था कि चूंकि हमारे पड़ोसियों ने दूसरे और तीसरे जेनरेशन के विमानों को चौथे तथा पांचवें जेनरेशन के विमान से रिप्लेस कर लिया है तो हमें भी अपने विमानों को अपग्रेड करना होगा। उन्होंने कहा, हमें किसी प्रकार के संघर्ष की स्थिति को रोकने के लिए पूरी तैयारी करनी होगी। ताकि अगर 2 मोर्चे पर भी लडऩा पड़े तो हम तैयार रहें।
एचएएल पर उठाए सवाल
हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ राफेल विमान का सौदा न होने पर भी वायुसेना प्रमुख ने टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि एचएएल के साथ सुखोई के निर्माण में हम पहले से ही तीन साल पीछे चल रहे हैं, जबकि जगुआर में 6 साल की देरी हुई है। उन्होंने ये भी बताया कि एलएसी और मिराज में 5 और 2 साल की देरी हो रही है। वायुसेना प्रमुख का यह बयान अंग्रेजी अखबार की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया है कि सुखोई एयरक्राफ्ट के निर्माण में तीन साल की देरी होगी। यह विमान एचएएल ही बना रहा है।
बता दें कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस संबंध में कहा था कि एचएएल के पास फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन के साथ मिल कर भारत में इस लड़ाकू विमान के विनिर्माण के लिए जरूरी क्षमता ही नहीं थी और सार्वजनिक क्षेत्र की यह कंपनी काम की गारंटी देने की स्थिति में नहीं थी।
सीतारमण ने ये भी बताया था कि एचएएल के साथ कई दौर की बातचीत के बाद फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन को महसूस हुआ कि यदि राफेल जेट का उत्पादन भारत में किया जाता है तो इसकी लागत काफी अधिक बढ़ जाएगी।

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