Friday , 18 October 2019
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सरकार की शह पर बजरी का अवैध खनन : राठौड़

विस में उठा पत्रकारों पर पाबंदी का मामला
जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र ङ्क्षसह राठौड़ ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में उसकी शह पर बजरी का अवैध खनन हो रहा है।
राठौड़ ने शुक्रवार को बजरी मामले को लेकर सदन में सरकार से जवाब मांगते हुए विपक्षी सदस्यों के बहिष्कार एवं आधा घंटा सदन की कार्यवाही स्थगित के बाद मीडिया से कहा कि सरकार इस मामले में बचना चाहती है और वह एक-एक बजरी माफिया को बचाने के लिए प्रयत्नशील है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की शह पर बजरी का अवैध खनन हो रहा है और विपक्ष इसका सरकार से जवाब मांग रहा है लेकिन वह जवाब देना नहीं चाहते है। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल और विधानसभा अध्यक्ष के बीच नोंकझोंक पर कहा कि धारीवाल ने सदन में अमर्यादित व्यवहार किया है और इससे लोकतंत्र कलंकित हुआ है।
पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कालीचरण सराफ ने कहा कि सदन में विपक्ष एनएचएम भर्ती को लेकर चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा की टिप्पणी को लेकर पूछा था कि उन्होंने झूठ क्यों बोला। उन्होंने कहा कि गत सोलह मई को एनएचएम में 2500 पदों पर भर्ती का मामला सामने आया और 17 मई को चिकित्सा मंत्री ने इस पर ट््वीट भी किया इसके बाद 31 जून को वह कहते है कि उनको इसकी कोई जानकारी नहीं है। ऐसा झूठ क्यों बोला गया।
सराफ ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चिकित्सा मंत्री को बर्खास्त करने मांग की गई है तथा मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परम्परा है कि सदन में पूछे जाने वाले सवाल का जवाब संबंधित मंत्री देता है लेकिन चिकित्सा मंत्री के सदन में मौजूद होने के बावजूद उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया।जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को विधानसभा में पत्रकारों पर पाबंदी का मामला उठाया गया। भारतीय जनता पार्टी के सदस्य मदन दिलावर ने सदन में यह मामला उठाया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष डा. सी पी जोशी ने कहा कि नियमानुसार यह निर्णय लिया गया है और नियमों का पालन जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा के लिए 600 पत्रकारों के पास बने हैं जबकि देखा जाता है कि सदन चलते समय शून्यकाल के बाद पत्रकार दीर्घा में 10-15 पत्रकार रह जाते है।
उन्होंने कहा कि वह सदन की गरिमा को बनाये रखने के लिए काम करेंगे और दबाव में कोई काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वह अनुशासन प्रिय अध्यक्ष बनना चाहते है, न कि सर्वप्रिय अध्यक्ष। डा. जोशी ने कहा कि उन्होंने इस बारे में सलाहकर समिति से बात करने के बाद यह निर्णय लिया है। इससे पहले दिलावर ने यह मामला उठाते हुए कहा कि इस तरह पत्रकारों पर पाबंदी नहीं लगाई जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि विधानसभा में बजट सत्र में पत्रकारों को सदन में पत्रकार दीर्घा एवं पत्रकार कक्ष तक जाने की अनुमति दी गई हैं तथा इसके अतिरिक्त जाने पर पाबंदी लगाने से नाराज पत्रकार शुक्रवार को बजट सत्र के दूसरे दिन पत्रकार दीर्घा में नहीं गये। इस दौरान पत्रकारों ने पत्रकार कक्ष में ही बैठकर अपना काम किया।

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