Friday , 19 October 2018
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शटलर ज्वाला ने लगाया शोषण का आरोप

नयी दिल्ली। दुनियाभर में चल रहे ‘हैशटेग मी टू मूवमेंट’ के भारत में भी •ाोर पकडऩे के बाद कई महिला टीवी हस्तियों और पत्रकारों ने जहां अपने शोषण की बात खुलकर बताई है वहीं बैडङ्क्षमटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने भी मानसिक शोषण की बात कहकर अपने कड़वे अनुभव को सामने रखा है। महिला युगल बैडङ्क्षमटन खिलाड़ी ज्वाला ने हमेशा ही सार्वजनिक तौर पर अपने पक्ष को मुखर होकर सामने रखा है और अब उन्होंने चयन प्रक्रिया को लेकर मानसिक दबाव की बात कही है। उन्होंने ट््वीटर पर अपने मानसिक शोषण की कहानी बताते हुये कहा,Þ वर्ष 2006 से जब यह व्यक्ति प्रमुख बना उसने मुझे राष्ट्रीय चैंपियन होने के बावजूद राष्ट्रीय टीम से बाहर फेंक दिया। (शेष पेज 8 पर)
ज्वाला ने लिखा, हाल की बात है जब मैं आरआईओ से वापिस आयी, और मैं फिर से राष्ट्रीय टीम से बाहर कर दी गयी। यह एक सबसे बड़ी वजह है कि मैंने खेलना बंद कर दिया। हैदराबाद की ज्वाला का राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद के साथ भी काफी विवाद रहा है और उन्होंने सार्वजिनक तौर पर गोपीचंद पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि गोपीचंद एकल खिलाड़यिों पर युगल खिलाड़यिों से अधिक ध्यान देते हैं।
इससे पहले ज्वाला ने उन्हें राष्ट्रीय टीम में नजर अंदाज किये जाने और युगल खिलाड़ी नहीं मिलने का आरोप भी गोपीचंद पर लगाया था। हालांकि महिला बैडङ्क्षमटन खिलाड़ी ने अपने ट््वीट में गोपीचंद का नाम नहीं लिया है। गोपीचंद फिलहाल राष्ट्रीय बैडङ्क्षमटन कोच हैं और सायना नेहवाल, पीवी ङ्क्षसधू, किदाम्बी श्रीकांत, परूपल्ली कश्यप जैसे खिलाड़यिों की सफलता में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है।
लेकिन कुछ वर्ष पहले सायना ने भी गोपीचंद पर कुछेक चुनींदा खिलाड़यिों पर अधिक ध्यान देने का आरोप लगाते हुये विमल कुमार को अपना निजी कोच नियुक्त कर लिया था। हालांकि सायना ने गोपीचंद के साथ दोबारा संबंध सुधार लिये और उनसे ट्रेङ्क्षनग लेना शुरू कर दिया।
अर्जुन अवार्ड विजेता ज्वाला ने वर्ष 2016 के दक्षिण एशियाई खेलों में मिश्रित युगल का स्वर्ण जीता था। राष्ट्रमंडल खेलों में भी वह स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य जीत चुकी हैं।

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