Tuesday , 26 March 2019
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रेणुकाजी बांध परियोजना 6 राज्यों के बीच करार

नई दिल्ली (एजेंसी)। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने ऊपरी यमुना बेसिन में रेणुकाजी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के निर्माण के लिए शुक्रवार को यहां छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक करार पत्र पर हस्ताक्षर किए।
समझौते पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ङ्क्षसह रावत, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरङ्क्षवद केजरीवाल और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हस्ताक्षर किये।
इसी कार्यक्रम में प्रयागराज में नमामि गंगे परियोजनाओं के संबंध में भी समझौते पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता एक नगर, एक संचालक कार्यक्रम पर आधारित है। इस समझौते पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अखिल कुमार, उत्तर प्रदेश जल निगम के अनिल कुमार श्रीवास्तव और प्रयागराज वाटर प्राइवेट लिमिटेड के दिलीप पोरमल ने गडकरी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
गडकरी ने इस मौके पर कहा कि देश में जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है लेकिन इसके उचित प्रबंधन की जरूरत है। रेणुकाजी बांध परियोजना के समझौते को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार यथाशीघ्र मंत्रिमंडल से इसकी मंजूरी प्राप्त लेने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि यमुना नदी पर किसाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए भी आम सहमति बन गई है और जल्द ही इस आशय के समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि लखवार बहुउद्देशीय परियोजना के लिए भी 6 राज्यों ने 28 अगस्त, 2018 को समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे।
रेणुकाजी बांध परियोजना हिमाचल प्रदेश के सिरमोर जिले में यमुना की सहायक नदी गिरि पर बनायी जाएगी। इस परियोजना में 148 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा तथा इससे दिल्ली और अन्य बेसिन राज्यों को 23 क्यूसेक जल की आपूर्ति की जाएगी। उच्च प्रवाह के दौरान परियोजना से 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी किया जायेगा। बिजली परियोजना का निर्माण हिमाचल प्रदेश ऊर्जा निगम द्वारा किया जाएगा। रेणुकाजी बांध की संग्रहण क्षमता 0.404 एमएएफ है और हिमाचल प्रदेश में इस बांध का डूब क्षेत्र 1508 हेक्टेयर है।
बांध बनने के बाद गिरि नदी के प्रवाह में 110 प्रतिशत की वृद्धि होगी और यह दिल्ली तथा अन्य बेसिन राज्यों की पानी की जरूरत को पूरा करेगी। 2015 के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 4596.76 करोड़ रूपये है जबकि ङ्क्षसचाई/पेयजल घटक की लागत 4325.43 करोड़ रूपये तथा ऊर्जा घटक की लागत 277.33 करोड़ रूपये है। ङ्क्षसचाई/पेयजल घटक की 90 प्रतिशत लागत अर्थात 3892.83 करोड़ रूपये केन्द्र सरकार वहन करेगी जबकि शेष 432.54 करोड़ रूपये की राशि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली राज्य वहन करेंगे।

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