Sunday , 24 March 2019
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राफेल : संसद में पेश कैग रिपोर्ट

यूपीए से 2.86% सस्ती डील
नई दिल्ली (एजेंसी)।
राफेल सौदे पर जारी विपक्ष के विरोध के बीच बुधवार को राज्यसभा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पेश की गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के मुकाबले एनडीए सरकार ने 2.86 फीसदी सस्ती डील फाइनल की है। 36 राफेल लड़ाकू विमानों का ये सौदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में साल 2016 में हुआ था। इससे पहले यूपीए के कार्यकाल में 126 राफेल का सौदा हुआ था लेकिन कई शर्तों के कारण आम राय नहीं बन पाई थी। कैग की ये रिपोर्ट 141 पेज की है, जिसे पेश करने के बाद से ही राज्यसभा में हंगामा शुरू हो गया, जिसके कारण सभापति को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
17.08 फीसदी पैसा बचा
रिपोर्ट में क्या है ?
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि 126 विमान के सौदे के मुकाबले भारत 17.08 फीसदी पैसों की बचत करने में कामयाब हुआ है। इस रिपोर्ट पर वित्त मंत्री अरूण जेटली ने ट्वीट कर कहा है कि महागठबंधन का झूठ बेनकाब हो गया और सच की जीत हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले 18 राफेल विमानों का डिलिवरी शेड्यूल पुरानी 126 विमानों की डील से बेहतर है।इस रिपोर्ट में 2007 और 2015 की मूल्य बोलियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इसमें लिखा है, आईएनटी द्वारा की गणना सरेंखित मूल्य ‘यू 1Ó मिलियन यूरो था जबकि लेखापरीक्षा द्वारा आंकलित की गई संरेखित कीमत ‘सीवीÓ मिलियन यूरो थी, जो आईएनटी सरेंखित लागत से लगभग 1.23 प्रतिशत कम थी। यह वो मूल्य था जिस पर 2015 में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए थे, यदि 2007 और 2015 की कीमतों को बराबर माना जाता। लेकिन इसके बजाय 2016 में ‘यूÓ मिलियन यूरो के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे जो लेखापरीक्षा के संरेखित कीमत से 2.86 प्रतिशत कम थी।
सौदे में हुई देरी की मुख्य वजह तकनीकी और मूल्य मूल्यांकन में आई दिक्कत है। तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट में निष्पक्षता, तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया की इक्विटी के बारे में नहीं बताया गया है। ऑडिट ने ये भी पाया कि आईएएफ ने एएसक्यूआर (एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट) को ठीक से परिभाषित नहीं किया। एएसक्यूआर खरीद की प्रक्रिया के दौरान कई बार बदला भी है।

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