Monday , 26 August 2019
Top Headlines:
Home » Udaipur » राज्य सरकार को लाखों का चूना लगाने वाले खनि अभियंता की अग्रिम खारिज

राज्य सरकार को लाखों का चूना लगाने वाले खनि अभियंता की अग्रिम खारिज

नगर संवाददाता & उदयपुर
उदयपुर। खान विभाग महा घूस कांड मामले में लिप्त खनि अभियंता द्वारा हाईगे्रड लाईम स्टोन के खनन कार्य के लिए जमीन दिलाने में हेराफेरी कर राज्य सरकार को लाखों रूपए का चूना लगाने व रिश्वत लेने के षडय़ंत्र में लिप्त पाया गया। आरोपी की ओर से अदालत में पेश अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र नामंजूर कर दिया।
प्रकरण के अनुसार बहुचर्चित खान घूस कांड के मामले में खनि अभियंता सूरज नगर सेक्टर के पास चौपासनी हाऊसिंग बोर्ड जोधपुर निवासी मनीष पुत्र दयानंद वर्मा द्वारा लोक सेवक होते हुए षडय़ंत्रपूर्वक अपनी पदीय स्थिति का दुरूपयोग कर खनि अभियंता नागौर के पद पर रहते हुए अपने पदस्थापन के दौरान खान एवं पैट्रोलियम विभाग के तत्कालीन प्रमुख शासन सचिव अशोक सिंघवी एवं दलाल दिल्ली हाल पंचरत्न कॉम्पलेक्स निवासी संजय पुत्र स्वरूपचंद सेठी के निर्देशानुसार ग्राम भेड़ जिला नागौर में स्थित केमिकल हाईगे्रड लाईम स्टोन ब्लॉक में विद्यमान लाईम स्टोन खनि नीति को उनके मुताबिक तैयार कर खान मुख्यालय जयपुर प्रेषित करना एवं नागौर निवासी कबीर व महेंद्र सिंह से मिलकर आरोपी अशोक सिंघवी, संजय सेठी व उनकी फर्म को खिंवसर जिला नागौर में हाईगे्रड लाईम स्टोन के खनन कार्य के लिए जमीन दिलाई जाकर आरोपीगणों को फायदा पहुंचा कर राज्य सरकार को लाखों रूपए की हानि पहुंचाई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस मामले में आरोपी मनीष वर्मा को धारा-7, 8, 9, 10, 12, 13 (1) (ए) (सी) (डी)/ 13(2), 14 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं भादसं की धारा 409 व 120-बी का आरोपी बनाया गया। इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र पेश किया। प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता का कहना था कि किसी प्रकार का कोई अवैध कार्य लाभ पाने के लिए नहीं किया गया और प्रथम दृष्टया साक्ष्य एफआईआर से प्रतीत नहीं होती है। यहां तक कि एफआईआर रिपोर्ट में किसी अपराध के गठन के संबंध में भी नाम अंकित नहीं है और आरोप पत्र में भी नाम नहीं है। खनन नीति बनाना या उसको लागू करना मुव्वकिल के क्षेत्राधिकार में ही नहीं है। इस तरह के नीतिगत निर्णय मंत्री अथवा मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में है।
भ्रष्टाचार निवारण मामलात के सहायक निदेशक अभियोजन गणेश शंकर तिवारी ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी से संबंधित समस्त सुसंगत साक्ष्य की सारगर्भित टिप्पणी मय तथ्यात्मक रिपोर्ट एवं विभिन्न समयों पर मोबाइल पर की गई वार्ता की ट्रांसक्रिप्ट न्यायालय में पेश की गई है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद विशेष न्यायालय सेशन (भ्रष्टाचार निवारण मामलात) के पीठासीन अधिकारी गोपाल बिजोरीवाल ने आरोपी के खिलाफ पेश दस्तावेजों का अवलोकन किया और फैसले में लिखा कि 4 नवम्बर 2015 को पेश चार्जशीट में प्रकरण में अनुसंधान जारी होना बताया गया।
यद्यपि उनमें नामों का खुलासा नहीं है परंतु एफआईआर में नाम होने से यह नहीं माना जा सकता कि अभियुक्त को एसीबी द्वारा धारा-169 दंड प्रक्रिया संहिता की रिहाई के लायक माना है। अभियुक्त का नाम एफआईआर में अंकित है। न्यायालय का मत है कि जमानत प्रार्थना पत्र के स्तर पर जब सुनवाई हो तब आदेश में ऐसे कोई भी तथ्य का खुलासा नहीं होना चाहिए जो अनुसंधान को दुष्प्रभावी करता हो। न्यायालय अत्यंत ही सावधानी रखते हुए अत्यंत विस्तृत विवेचन करने के स्थान पर तथ्यों का भी अंकन इस आदेश में करना उचित समझते हुए आरोपी की ओर से पेश अग्रिम जमानत के प्रार्थना पत्र को नामंजूर कर दिया।
स्मरण रहे वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने खान विभाग महाघूसकांड का खुलासा करते हुए तत्कालीन प्रमुख शासन सचिव खान एवं पैट्रोलियम विभाग अशोक सिंघवी, खान विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक पंकज गहलोत, खान विभाग के अधीक्षण खनि अभियंता पुष्कर राज आमेटा, दलाल संजय सेठी, उद्यमी मोहम्मद शेर खान, सी.ए. श्याम एस. सिंघवी, ड्राईवर धीरेंद्र उर्फ चिंटू सहित अन्य को गिरफ्तार किया था जो अभी जमानत पर रिहा है। इस मामले में लिप्त उद्यमी शेर खान की बीमारी से मृत्यु हो गई थी। फोन रिकार्डिंग में विभाग की नीतियां भी तोडऩे की कर रहा था बातएसीबी की ओर से बताया गया कि खनि अभियंता मनीष वर्मा ने वर्ष 2015 में सितम्बर माह में 4, 5, 11, 12 व 16 को विभिन्न समय पर कबीर चावड़ा से आपस में भेड़ ग्राम में खरीदी जमीन के संबंध में वार्ता की। जमीन को महेंद्र सिंह के मार्फत खरीदी गई और उसे फायदे के लिए मनमुताबिक बनाना चाह रहे थे। विभाग की नीतियों को तोडऩे की बात भी कर रहे थे। खान विभाग से संबंधित नियमों को संजय सेठी, अशोक सिंघवी, मनीष वर्मा, कबीर अपने फायदे के लिए तब्दिल करवाना चाह रहे थे। 11 सितम्बर 2015 को वार्ता में संजय सेठी, अशेाक सिंघवी, कबीर, मनीष वर्मा भेड़ ग्राम स्थित लाईम स्टोन क्षेत्र से संबंधित नियमों को अपने अनुकूल करवाकर जमीन खरीद रहे थे और तत्कालीन खान राज्य मंत्री के आदमी को सेट कर जमीन खरीदने की बात कर रहे थे, जिससे मंत्री नकारात्मक बात न लिखे। 12 सितम्बर 2015 को भी जमीन अपने नाम करवाने की बात की थी। कबीर व मनीष अपने बॉस तथा उसके खास व्यक्ति सेठी के निर्देशानुसार भेड़ व बाराथल गांव में जमीन खरीद कर उनकी कम्पनी के नाम करवा रहे थे। मनीष सरकारी अधिकारी होते हुए भी संजय सेठी के व्यापारिक हित साधने के लिए कार्य कर रहा था। 16 सितम्बर 2015 को हुई वार्ता में कबीर, मनीष से कहता है कि संजय गिरफ्तार हो गए है, मेरे तो वो टेंशन है। इस प्रकार भेड़ ग्राम में जो संजय सेठी व अन्य ने जो जमीन खरीदी उस संबंध में हिसाब-किताब को लेकर कबीर चिंता कर रहा था। उप पंजीयन खिंवसर जिला नागौर के अनुसार खरीदी हुई जमीन के 6 विवरण मिले। प्रथम दृष्टया मनीष वर्मा खनिज अभियंता को तत्समय यह पता था कि आरोपी अशोक सिंघवी, संजय सेठी भेड़ ग्राम के सस्ते दाम पर लाईम स्टोन खनिज युक्त जमीन क्रय कर अनुचित लाभ कमाना चाहते है। इसलिए आरोपी अशोक सिंघवी खनिज की प्रकृति पहले तो अप्रधान खनिज से प्रधान खनिज तत्पश्चात प्रधान से अप्रधान के रूप में लाईम स्टोन की प्रकृति बदल कर अपने पद का दुरूपयोग कर स्वयं के लिए लाभ अर्जित करना और खनिज की प्रकृति परिवर्तित करवाने में भरपूर अपराधिक सहयोग किया था। यही नहीं आरोपीगणों ने लाईम स्टोन की जमीन का पता लगाने एवं जमीन का पूरा विक्रय मूल्य की पूरी जानकारी होने के बावजूद रजिस्ट्री मूल्य कम बता कर स्टाम्प ड्यूटी की चोरी करने में भी पूर्ण सहयोग किया। इसके अतिरिक्त आरोपी मनीष कबीर से अन्तर्विरोध की वार्ता के दौरान भेड़ ग्राम में आरोपी अशोक सिंघवी व अन्य के लिए खरीदी गई जमीन को स्वयं व कबीर को होने वाले मुनाफे के साथ बीकानेर में एक लीज लेने के षडय़ंत्र में भी शामिल होने के तथ्य उजागर हुए है। 11 सितम्बर 2015 को मनीष व कबीर के बीच फाईल को लेकर सचिव, मंत्री के स्तर की वार्ता हुई। बातचीत में यह भी सामने आया कि मंत्री के किसी आदमी को भेड़ ग्राम की तरफ जमीन खरीद कर भविष्य में लाभ कमाने का प्रलोभन देकर खनिज की किस्म परिवर्तन करवाने की फाईल को निकलवाने का प्रयास करे। आरोपी मनीष वर्मा के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराधिक षडय़ंत्र में शामिल होकर रिश्वत राशि दिए जाने का अपराध दस्तावेजों पर स्पष्ट है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*