Thursday , 18 October 2018
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राजन की नीतियों से आई थी मंदी

नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में तीन साल की सर्वाधिक विकास दर दर्ज होने के बाद नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने दावा किया है कि बीते तीन साल अर्थव्यवस्था में दर्ज हुई गिरावट के लिए रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन जिम्मेदार हैं। राजीव कुमार ने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही से पहले लगातार 9 तिमाही में दर्ज हुई गिरावट के लिए राजन की आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं।
कुमार ने कहा कि बीते तीन साल के दौरान विकास दर में गिरावट बैंक के एनपीए में हुई बढ़ोत्तरी के चलते है।

कुमार ने कहा कि जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली, तब बैंकों का एनपीए 4 लाख करोड़ रूपये था।
लेकिन मार्च 2017 तक यह एनपीए बढ़कर 10.5 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर गया। एनपीए में हुई इस बढ़त के चलते तीन साल के दौरान जीडीपी में लगातार गिरावट देखने को मिली और इसके लिए सिर्फ रघुराम राजन जिम्मेदार हैं। (शेष पेज 8 पर)
राजीव कुमार ने दावा किया कि बैंक के एनपीए का आंकलन करने के लिए राजन ने नई पद्दति की शुरूआत की जिससे बैंकों का एनपीए लगातार बढ़ता रहा और बैंको का भरोसा कंपनियों पर से लगातार उठता रहा। इसका नतीजा यह रहा कि देश की कंपनियों को बैंकों से नया कर्ज नहीं मिला और अर्थव्यवस्था में सुस्ती घर करने लगी और जीडीपी के आंकड़े कमजोर होने लगे।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के दौरान जीडीपी विकास दर 8।2 फीसदी दर्ज हुई है। वहीं इससे पहले 8 फीसदी की ग्रोथ वित्त वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही के दौरान दर्ज हुई थी। लिहाजा, लगातार 8 तिमाही की सुस्ती के बाद एक बार फिर विकार दर में बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। वहीं इन तीन वर्षों के दौरान 5।7 फीसदी की न्यूनतम जीडीपी विकास दर दर्ज हुई जिसके चलते बीते तीन साल से आर्थिक सुस्ती कायम रही।

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