Friday , 24 May 2019
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रणकपुर में सियासी बिसात, योद्धा आमने-सामने

चुनावी रण में दावेदारों ने रखा अपना पक्ष मावली विस से सबसे ज्यादा दावेदार पहुंचे कमोबेश सभी विस क्षेत्रों में नए को मौका देने की पैरवी
उदयपुर। विधानसभा चुनावों को लेकर रणकपुर के रण में भाजपा के योद्धाओं (दावेदारों) ने जमकर दो-दो हाथ किए। भाजपा योद्धाओं (दावेदारों) के साथ-साथ गए सैनिकों (समर्थकों) ने भी जमकर प्रतिद्वंदी पर हमले बोले। रणकपुर के इस रण में उदयपुर की आठों विधानसभा सीटों से कितने योद्धा मैदान में यह पहली बार खुलकर सामने आ गया। इस दौरान विभिन्न विधानसभाओं के पदाधिकारियों से नामों का पैनल ले रहे भाजपा के मंत्रियों और वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी सभी योद्धाओं (दावेदारों) को शांति बनाएं रखने के साथ-साथ मिलजुल कर चुनाव में जुटने का आव्हान किया, परन्तु दावेदार दावेदारी पेश करने के बाद एक-दूसरे को ऐसे देख रहे थे कि मानों यदि उसे टिकट नहीं मिला तो इसका जिम्मेदार दूसरा दावेदार ही होगा।
रणकपुर के रण में भाजपा प्रदेश नेतृत्व की ओर से आयोजित प्रदेश की सभी विधानसभाओं में दावेदारों द्वारा दावेदारी पेश करने के क्रम में मंगलवार को उदयपुर की सभी आठों विधानसभाओं का नम्बर था। इस पर उदयपुर से आठों विधानसभा से अपेक्षित पदाधिकारियोंं के साथ-साथ दावेदार रणकरपुर पहुंचे थे। जहां पर दोपहर को तीन बजे बाद रायशुमारी का दौर शुरू हुआ। रणकपुर में जिस होटल में रायशुमारी और पैनल का नाम लेने का तय किया गया था, वहां पर टेंट लगाकर केबिन से बनाए गए थे और इनमें प्रत्येक विधानसभा के पदाधिकारियों को बुलाया गया। जहां पर एक नेता और एक वरिष्ठ जनप्रतिधि ने उदयपुर की आठों विधानसभा वार पदाधिकारियों से मुलाकात की और समस्याओं को सुना। इसके बाद सभी तीन-तीन नामों का पैनल दिया। इस दौरान अधिकांश पदाधिकारियों ने तो वर्तमान विधायक के कामों को लेकर सवाल उठाएं थे।
तीन बजे से शाम को करीब पांच बजे तक चली रायशुमारी के इस कार्यक्रम में घुसते ही पहले पर्यवेक्षकों ने सभी दावेदारों के बारे मेें जानकारी ली और इन दावेदारों को बाहर निकाल दिया। इसके बाद पदाधिकारियों से खुलकर बात की।
इधर बाहर इंतजार कर रहे दावेदार एक-दूसरे से आंख नहंी मिला रहे थे। सूत्रों के अनुसार स्थिति यह हो गई कि सभी दावेदार दूर-दूर खड़े होकर उन समर्थकों के साथ बात कर रहे थे, जो बैठक में अपेक्षित नहीं थे, परन्तु फिर भी भीड़ दिखाने के लिए साथ लेकर गए थे। इस दौरान सभी दावेदार दूर खड़े होकर एक-दूसरे को घूर-घूरकर ऐसे देख रहे थे कि मानों उसका टिकट यदि कट गया तो इसीका हाथ होगा। प्र्रत्येक विधानसभा में करीब एक घंटे से भी अधिक समय लगा। आखिर में पदाधिकारियों ने अपने पसंद के तीन दावेदारों का पैनल बनाया और पर्यवेक्षकों को दे दिया। रणकपुर में टिकट रूपी रण लडऩे के लिए गए इन योद्धाओं (दावेदारों) को कितनी सफलता मिलती है यह तो नवम्बर में ही पता चलेगा।जवाब नहीं देते बन पड़ा सवालों काउदयपुर शहर विधानसभा में अधिकांश पदाधिकारियों ने केवल वर्तमान विधायक गुलाबचंद कटारिया का ही नाम लिया। इस दौरान पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर मिश्रा और मंत्री यूनुस खान ने पदाधिकरारियों को एकता का पाठ पढ़ाया। इस दौरान चन्द्रशेखर मिश्रा ने जो सवाल पदाधिकारियों से किए उनका जवाब तक पदाधिकारियों से देते नहीं बन पड़ा और अपनी सी शकल लेकर एक-दूसरे को देखते रहे। वहीं मिश्रा पूर्ण आत्मविश्वास के साथ शहर में हो रही हलचलों को विस्तार से बता रहे थे। सभी पदाधिकारी एक-दूसरे का नाम देख रहे थे।फूलसिंह शहरी, ग्रामीण हो प्रत्याशीग्रामीण विधानसभा में वर्तमान विधायक फूलसिंह मीणा ने भले ही काफी काम करवाया हो, परन्तु फिर भी उनके सामने भी दावेदारों की लाईन लग गई है। पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत के सामने दावेदारों के समर्थकों ने फूलसिंह मीणा को बाहरी बताया और मांग की है कि स्थानीय जनजाति प्रतिनिधि को ही टिकट दिया जाए। समर्थकों का कहना है कि स्थानीय जनजाति मेें भी काफी पढ़े-लिखे और सक्षम दावेदार है और ऐसे में इस बार स्थानीय को ही टिकट दिया जाए। हमें भी मिलना चाहिए मौकागोगुन्दा विधानसभा में पर्यवेक्षक के रूप में राज्यसभा सांसद ओम माथुर और वी. सतीश ने पदाधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान जब विधायक के दावेदारों से टिकट मांगने का कारण पूछा तो
अधिकांश दावेदारों ने कहा कि प्रताप भील से गांवों की जनता संतुष्ट नहीं है और भेदभाव के भी आरोप लग चुके है। इसके साथ ही दावेदारों ने कहा कि अब तो उन्हें भी एक मौका मिलना चाहिए। अधिकांश दावेदारों का कहना था कि यदि उन्हें मौका दिया जाता है तो वे भी अच्छा काम करेंगे। तीन बार मौका दे चुके, अब हमें दोझाडोल विधानसभा के मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे और केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी पर्यवेक्षक के रूप में थे। जब पर्यवेक्षकों ने दावेदारों से दावेदारी के बारे में पूछा तो दावेदारों ने कहा कि बाबूलाल खराड़ी को तीन बार संगठन ने मौका दिया है, जिसमें से वे दो बार जीत भी चुके और वर्तमान में वे हारे हुए है। इसी कारण अधिकांश पदाधिकारियो ने प्रमुखता से अपनी दावेदारी रखी और बताया कि आदिवासी क्षेत्र में वे इस सीट को आसानी से निकाल सकते है। इसके साथ ही दावेदारों ने यह भी बताया कि हाल में ही खड़े हुए एक संगठन को भी वे टक्कर दे सकते है। अमृतलाल बाहरी, स्थानीय को मौका देंसलूम्बर विधानसभा में पर्यवेक्षक के रूप में राजेन्द्रसिंह राठौड़ थे। यहां पर दावेदारों से दावेदारी करने का कारण पूछा तो बताया कि वर्तमान विधायक अमृतलाल मीणा अब मूलत: सलूम्बर के नहंी है। ऐसे में उन्हें टिकट नहंी देना चाहिए। इस मौके पर सभी पदाधिकािरयों ने कहा कि सराड़ा के लोगों में ज्यादा नाराजगी है और ऐसे में स्थानीय को ही मौका देकर गुटबाजी को समाप्त करना चाहिए। इस पर पर्यवेक्षकों ने स्पष्ट रूप से सभी अपने-अपने दावेदारों के नाम लिख देंवे ताकि प्रदेश निर्णय कर सकें।भीण्डर के सामने समर्थन चाहिएवल्लभनगर विधानसभा में पर्यवेक्षक के रूप में मंत्री अरूण चतुर्वेदी और मुरलीधर राव थे। यहां पर दावेदारों की संख्या काफी ज्यादा थी। दावेदारों ने स्पष्ट रूप कहा कि वर्तमान निर्दलीय विधायक रणधीरसिंह भीण्डर को सरकार और संगठन का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में संगठन को चाहिए कि वे रणधीरसिंह भीण्डर के सामने जिसे भी मौका देेंवे उसके साथ संगठन जुड़े भी सही। दावेदारों ने कई खामियों को गिनाया और वल्लभनगर वर्तमान विधायक द्वारा करवाए गए कामों में से भी खामियां निकाली।विधायक का विरोध, नए को मौका देंखेरवाड़ा विधानसभा के पदाधिकारियों ने विधायक के लिए कहा कि नानालाल अहारी को कई समय से संगठन की ओर से मौके दिए जा रहे है। अहारी से क्षेत्र में कई लोग नाराज है और कांग्रेस उत्साहित हो रही है। ऐसे में सभी दावेदारों ने मांग की कि अब कम से कम अहारी के स्थान पर किसी नए को मौका मिलना चाहिए। वहीं साथ में गए पदाधिकारियों ने कहा कि विधानसभी गुटबाजी का स्तर काफी बढ़ गया है और कार्यकर्ता ही एक-दूसरे से कट रहे है। ऐसे में सभी को संतुष्ट करना जरूरी है।मुख्यमंत्री के सामने ही भिड़े विधायक समर्थक-विरोधीजिसे बाहर निकाला उसे बुलाकर माफी मांगी, जोशी के नाम का विरोधमावली विधानसभा में पर्यवेक्षक के रूप में खुद मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे उपस्थित थी। इस मौके पर विधायक के समर्थक और दावेदार के समर्थक आपस में जोरदार भिड़ गए और एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे। सीएम के सामने ही मण्डल अध्यक्ष नंदलाल खरवड़ ने कहा कि जिलाध्यक्ष मावली में आयोजित बैठकों में नहीं आते है और इसी को लेकर मावली के लोगों में विरोध है। इस पर वहां पर मौजूद वीरेन्द्रसिंह सोलंकी ने विरोध करते हुए कहा कि मण्डल अध्यक्ष जिले की बैठकों में नही आता है। इस दौरान ओमप्रकाश खत्री को यह कहकर बाहर निकलवा दिया कि यह जबरन आए है। इस पर सोलंकी ने विरोध जताते हुए ये मोस्ट है। इस पर मुख्यमंत्री ने ओम मेनारिया को पुन: बुलाया और माफी मांगी। दावेदारों ने स्पष्ट रूप से कहा कि बाहरी प्रत्याशी यानि धर्मनारायण जोशी को टिकट नहीं मिलना चाहिए। इस मौके पर पूरण खटीक ने कहा कि मावली में हालत खराब है और जितनी गुटबाजी है, उसमें जीतना मुश्किल है। इस दौरान मांग उठी कि वर्तमान विधायक दल्ली चंद डांगी को टिकट नहीं मिलना चाहिए, इसका जमकर विरोध है। इस पर मुख्यमंंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि मावली तो मैं जीतकर ले आउंगी, तुम सभी को साथ में रहकर काम करना होगा।

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