Friday , 24 May 2019
Top Headlines:
Home » Rajasthan » रजिस्ट्रार की वीसी से हॉट टॉक

रजिस्ट्रार की वीसी से हॉट टॉक

‘सच बोलने का ठेका क्या आप ही ने ले रखा है’
नगर संवाददाता & उदयपुर
मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में शुरू से ही विवादों के घेरे में रही एलडीसी भर्ती परीक्षा में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। भर्ती प्रक्रिया में एक अभ्यर्थी के पूरे में से पूरे नंबर आने के मामले का पूरा ठीकरा दिवंगत प्रो. विजय श्रीमाली पर फोडऩे की कुलपति की कोशिश का खुलासा होते ही गुरूवार को पूरे विवि परिसर में मानों विरोध का भूचाल आ गया। प्रो. विजय श्रीमाली के समर्थकों, परिजनों आदि ने विवि परिसर में जमकर हंगामा करते हुए वीसी को आड़े हाथों लिया।
इस दौरान कुलपति प्रो. जे.पी. शर्मा और रजिस्ट्रार हिम्मतसिंह भाटी आमने-सामने हो गए और वीसी के बार-बार सच बोलने की बात कहने पर रजिस्ट्रार इतने आक्रोशित हो गए कि उन्होंने वीसी को यहां तक कह डाला कि ‘सच बोलने का ठेका तो आपने ही ले रखा है।Ó इन तीखे तेवर के साथ रजिस्ट्रार ने वीसी पर यह भी आरोप जड़ा कि वीसी अब अपने आप को बचाने के लिए विजय श्रीमाली का नाम ले रहा है और एकेडमिक और नॉन एकेडमिक भर्ती प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।
सुविवि में एलडीसी भर्तियां संदेह में आने के बाद कुलपति प्रो. जेपी शर्मा ने एलडीसी भर्ती प्रक्रिया के रद्द होने के बाद इसका पूरा ठीकरा स्व. प्रो. विजय श्रीमाली पर फोड़ दिया और बताया गया कि एक फाइल में नोटिंग करते हुए उन्होंने प्रो. विजय श्रीमाली की जिम्मेदारी बता दी। यह मामला उजागर होने के बाद विजय श्रीमाली के समर्थकों, परिवार के लोगों और समाज के लोगों में आक्रोष व्याप्त हो गया। एमडीएस अजमेर विवि के वीसी रहे प्रो. श्रीमाली पूर्व में कामर्स कॉलेज के डीन रह चुके थे। ऐसे में छात्रों के मन में श्रीमाली के प्रति विशेष प्रभाव व लगाव था। मामले का खुलासा होने के बाद गुरूवार को सैंकड़ों की संख्या में छात्र और श्रीमाली के समर्थक के साथ-साथ विजय श्रीमाली के बड़े भाई पूर्व सभापति और यूआईटी अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली, विजय श्रीमाली के पुत्र जतिन श्रीमाली भी सुविवि पहुंचे। यहां छात्रों ने सुविवि के प्रशासनिक भवन के बाहर जोरदार हंगामा किया। हंंगामे की आशंका पर पहले से ही वहां पर प्रतापनगर थाने सहित आस-पास के थानों का भारी जाब्ता मौजूद था।
युवकों ने वीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी करनी शुरू कर दी। काफी देर तक नारेबाजी होने के बाद कुलपति जो कथित रूप से किसी मीटिंग में गए थे, वे वापस आए और दस्तावेजों के साथ प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया कि भर्ती को लेकर जो भी अनियमितताएं हुई है उसका आरोप स्व. प्रो.विजय श्रीमाली पर नहीं लगाया गया है। समझाने के बाद भी लोग मानने को तैयार नहीं हुए और नारेबाजी के साथ वीसी प्रो. शर्मा से हाथापाई करने पर उतारू हो गए। यह देख पुलिस ने प्रो. शर्मा को प्रशासनिक भवन के अंदर भेज दिया, इसके साथ ही कुछ युवा भी अंदर घुस गए और हंगामा करना शुरू कर दिया। प्रशासनिक भवन के अंदर भी करीब आधे घंटे से भी अधिक समय तक हंगामा चलता रहा और युवा बार-बार वीसी के खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस ने जैसे-तैसे कर सभी को बाहर निकाला और कुछ प्रो. श्रीमाली के परिवार व समाज के कुछ युवकों को वहीं रहने दिया और एक बार फिर से प्रो. जेपी शर्मा से वार्ता करवाई।
वार्ता के दौरान बार-बार भर्ती प्रक्रिया की फाइल पर प्रो. श्रीमाली पर की गई टिप्पणी पर ऐतराज जताते रहे और बार-बार आरोप लगाते रहे कि प्रो. विजय श्रीमाली को बदनाम किया जा रहा है। इधर बाद में वीसी के सामने रजिस्ट्रार हिम्मतसिंह भाटी को बुलाया गया। हिम्मतसिंह भाटी के आने के बाद जब प्रो. श्रीमाली के परिजनों ने पूछा तो रजिस्ट्रार भाटी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस फाइल पर जो नोटिंग की गई है उसका यही मतलब निकलता है कि इस भर्ती का सारा ठीकरा प्रो. श्रीमाली पर फोड़ा जा रहा है, जो इस दुनिया में नहीं है। वार्ता के दौरान ही प्रो. जेपी शर्मा ने बार-बार कहा कि मैं झूठ नहीं बोल रहा, सच बोल रहा हूं तो रजिस्ट्रार भाटी भड़क गए और उन्होंने कहा कि सच बोलने का ठेका तो आपने ही ले रखा है।
इसके साथ ही रजिस्ट्रार ने यहां तक कह दिया कि एकेडमिक और नॉन एडकेमिक भर्तियों में वीसी ने मनमानी की है और इसी कारण आज नतीजा यहां तक आ गया है।
इस पर वीसी की ओर से ऐतराज जताने पर भाटी ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि इसकी जिम्मेदारी रजिस्ट्रार को देनी होती है और इन्होंने तो भर्ती में किसी को शामिल तक नहीं किया। इस दौरान वीसी की ओर से ऐतराज करने और बार-बार रजिस्ट्रार को गलत साबित करने पर रजिस्ट्रार आवेश में आकर वहां से रवाना हो गए, उन्हें रोकने का भी काफी प्रयास किया, परन्तु वे नहीं माने। इसके बाद भी लगातार हंगामा होने पर आखिर में वीसी प्रो. जेपी शर्मा ने समझाइश करते हुए फाइल के आखिरी में नोट डाला कि एलडीसी भर्ती मामले में प्रो. विजय श्रीमाली कॉर्डिनेटर थे, कॉन्फिडेन्शियल मामले उनके पास नहीं थे और ना ही उनका इस भर्ती में हुई अनियमितताओं से कोई लेना-देना है। इसके बाद मामला थमा।एलडीसी भर्ती मामले में जांच हो रही है। सारा मामला कॉन्फिडेन्शियल था और विजय श्रीमाली केवल कॉर्डिनेटर थे, उनका इनसे कोई लेना-देना नहीं है। मैने उन पर किसी तरह का आरोप नहीं मढ़ा है और ना किसी फाइल पर कुछ लिखा है। प्रो. जेपी शर्मा, कुलपति, सुविविइस पूरे मामले से प्रो. विजय श्रीमाली से कोई लेना-देना नहीं है। वो आज दुनिया में नहीं है और इसी कारण अपने आप को बचाने के लिए वीसी ने यह किया है। वीसी कभी पेपर सेटिंग कौन करता है उनका नाम नहीं बताता, जो संदेह पैदा करता है। कॉन्फिडेन्शियल वर्क बताकर वीसी सारा काम खुद ही कर रहा है, ऐसा किसी यूनिवरसिटी में नहीं होता है। वीसी झूठ बोल रहे हैं और फुसला रहे है। हिम्मत सिंह भाटी, रजिस्ट्रार कहां गायब हो गया ‘गुप्त सलाहकारÓउदयपुर। सुविवि में गुरूवार को हुए हंगामे के दौरान ‘गुप्त सलाहकारÓ की चुप्पी सबको नजर आ गई। ‘गुप्त सलाहकारÓ विरोध के दौरान वहां पर आ गया और वीसी के आस-पास दिखाई दिया। वीसी के खिलाफ नारेबाजी व उन पर लगाए जा रहे आरोपों के बाद भी ‘गुप्त सलाहकारÓ कुछ नहीं बोला और मौन साधे बैठा रहा। वीसी प्रो. शर्मा ने अपने ‘गुप्त सलाहकारÓ को इसी कारण बुलाया था कि वह आकर कुछ बोले, लोगों को समझाएं और डेमेज कंट्रोल करे मगर ‘गुप्त सलाहकारÓ की चुप्पी नहीं टूटी। इसे देखकर वीसी भी हैरान नजर आए। जब एकेडमिक और नॉन एकेडमिक भर्तियां हुई थी तब ‘गुप्त सलाहकारÓ पर ‘विशेष दारोमदारÓ था। भर्तियों को लेकर किसी तरह का विवाद होता या कोई भी विरोध जताने आता तो वीसी तत्काल ‘गुप्त सलाहकारÓ को बुलाते और ‘गुप्त सलाहकारÓ की सलाह के बाद ही आगे का कदम उठाते। कई बार गुप्त सलाहकार खुद ही विरोध करने वालों से अपने खास लहजे में बात कर लेता। बताया जा रहा है कि भर्तियों के कहीं किसी चरण में किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया था तब से ‘गुप्त सलाहकारÓ के खिंचे-खिंचे रहने की खबरें आने लगीं थीं।
सरकार के डर से चुप्पी साधे रहा ‘गुप्त सलाहकारÓ
‘गुप्त सलाहकारÓ के चुप्पी साधे बैठकर रहने के पीछे एक कारण प्रदेश में सरकार बदलना भी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में कांगेे्रेस की सरकार है और गुरूवार को सुविवि में हुए विवाद पर राज्य सरकार की भी पूरी नजर रही। राज्य सरकार इस मामले को बहुत ही खास तौर पर देख रही है। ऐसे में यदि ‘गुप्त सलाहकारÓ कोई सलाह देता है तो उसके भी अर्थ और निहितार्थ निकाले जा सकते हैं। ऐसे में उसने चुप रहना ही मुनासिब समझा।किसने दबा रखी है मामले की नस ?सुविवि में एलडीसी भर्ती परीक्षा मामला शुरू से ही विवादों में रहा। पहले चरण की लिखित परीक्षा के बाद जब सामने आया कि वीवी के ही गांव धनकोली के रहने वाले एक परीक्षार्थी नवीन मिश्रा के पूरे में से पूरे अंक आए हैं तो चौतरफा विरोध शुरू हो गया। तब रजिस्ट्रार हिम्ममसिंह भाटी की अनुशंसा पर सीनियर प्रोफेसरों की एक जांच कमेटी बनी। इस कमेटी ने स्पष्ट रूप से लिखकर दे दिया कि मामला बहुत गंभीर है व इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए मगर वीसी प्रो. जेपी शर्मा ने रिपोर्ट आने के कई दिनों तक जांच नहीं करवाई। कमेटी ने यह लिखकर दिया कि ऐसी परीक्षा जिसमें 20 अंकों से ज्यादा के प्रश्न आपत्ति मांगने के बाद डिलीट कर दिए गए हों, उसके बावजूद पूरे अंक पाना संदेह पैदा करता है। इधर, मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिशें के समाचार प्रात:काल में लगातार प्रकाशित होने से सकते में आए वीसी ने प्रतापनगर थाने में परिवाद भेजा। अचरज की बात यह है कि इस परिवाद पर छह महीने से भी ज्यादा समय बाद तक पुलिस सिर्फ जांच ही कर रही है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल उठे खड़े हुए। इधर, सरकार बदलते ही पासा पलट गया व तब खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे संगठन अब खुलकर सामने हैं व किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच की मांग की जा रही है। इस बीच गुरुवार को खबर आई कि अब जांच की दिशा को मोड़कर दिवंगत प्रो. विजय श्रीमाली को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश हो रही है तो हंगामा हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.