Wednesday , 20 November 2019
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मॉब लिंचिंग में पीडि़त की मौत तो आजीवन कारावास


जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। मॉब लिंचिंग करने वाले और इन घटनाओं में सहयोग करने वाले लोगों को आजीवन करावास और पांच लाख के अर्थदंड की सजा मिल सकती है। इसे गैरजमानती, संज्ञेय अपराध बनाया गया है। मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने सख्त कानून बनाया है। इस विधेयक को मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया। संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक, 2019 और राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक, 2019 को सदन में पेश किया। 5 अगस्त को इस विधेयक पर चर्चा के बाद इसे पारित किया जाएगा।
बिल में सरकार ने कई कड़े प्रावधान किए हैं। पीडि़त की मौत होने पर आजीवन करावास और 5 लाख के अर्थदंड की सजा का प्रावधान किया गया है। पीडि़त के गंभीर रूप से घायल होने पर 10 साल तक की कैद और 50 हजार से 3 लाख तक का जुर्माना होगा। लिचिंग में पीडि़त को घायल करने वालों को सात साल तक की सजा, एक लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। लिंचिंग में किसी भी रूप से सहायता करने वाले को भी वही सजा मिलेगी जो खुद लिचिंग करने पर है। मॉब लिंचिंग के मामलों की जांच इंस्पेक्टर स्तर या उससे उपर का पुलिस अफसर ही करेगा, इससे नीचे के स्तर का अफसर जांच नहीं कर सकेगा।
गिरफ्तारी से बचाने पर भी सजा
लिंचिंग के दोषियों की गिरफ्तारी से बचाने या अन्य सहायता करने पर भी 5 साल तक की सजा का प्रावधान किया है। लिंचिंग के मामलों में गवाहों को धमकाने वालों को 5 साल तक जेल और एक लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया है। मॉब लिंचिंग की घटना के वीडियो, फोटो किसी भी रूप से प्रकाशित प्रसारित करने पर भी एक से तीन साल की सजा और 50 हजार का जुर्माने का प्रावधान किया है, इस प्रावधान की वजह से लिंचिंग की घटनाओं की रिपोर्टिंग में भी बाधाएं आएंगी, हालांकि विधेयक के नियम बनने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि (शेष पेज 8 पर)

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