Sunday , 24 March 2019
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मीरवाइज समेत 6 की सुरक्षा वापस

अलगाववादियों पर चला हंटर
नई दिल्ली/श्रीनगर (एजेंसी)। पुलवामा हमले के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार की ओर से अलगाववादी नेताओं को मिली सुरक्षा वापस ले ली गई है, जिनमें ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक, शब्बीर शाह, हाशिम कुरैशी, बिलाल लोन, फजल हक कुरैशी और अब्दुल गनी बट शामिल हैं। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इन 6 नेताओं और दूसरे अलगाववादियों को किसी भी तरह से सुरक्षा कवर नहीं दिया जाएगा।
ऑर्डर के मुताबिक रविवार शाम से ही अलगाववादियों को मिली सभी सुरक्षा और गाडिय़ों को हटा लिया गया। किसी भी प्रकार से इन छह या किसी दूसरे अलगाववादियों को कोई कवर या सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। अगर उन्हें सरकार के द्वारा कोई दूसरी सुविधाएं मिल रही हैं तो वे भी तत्काल हटा ली जाएंगी। ऑर्डर में पाक समर्थक गिलानी का जिक्र नहीं
हालांकि आदेश में पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी का कोई जिक्र नहीं है। अधिकारियों ने बताया है कि पुलिस इस बात की समीक्षा करेगी कि क्या किसी अन्य अलगाववादी को कोई सुरक्षा या सुविधा मिली हुई है तो उसे तत्काल हटाया जाए। बता दें कि हमले के बाद कश्मीर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) से संपर्क रखने वालों को दी जा रही सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। इससे पहले एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार के सुझाव पर ऐसे व्यक्तियों को मिली सुरक्षा की समीक्षा की गई, जिन पर आईएसआई के साथ संबंधों का शक है। जम्मू-कश्मीर सरकार के गृह सचिव ने अलगाववादियों को मिली सुरक्षा की समीक्षा करने के बाद यह निर्णय लिया है। गौरतलब है कि ज्यादातर अलगाववादियों को जम्मू-कश्मीर (शेष पेज 8 पर)सुरक्षा पर 10 करोड़ रूपए सालाना खर्च करती रही सरकार
कश्मीर में भले ही आतंकवाद लगातार बढ़ रहा हो, लेकिन यहां के अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर सरकार सालाना करीब 10 करोड़ रुपए खर्च करती रही है। एक आरटीआई में यह बात सामने आई है कि इनकी सुरक्षा और सुविधाओं पर खर्च राज्य सरकार करती है। ये चुनिंदा अलगाववादी महंगी गाडिय़ों में घूम रहे हैं और फाइव स्टार श्रेणी के अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। इनकी सुविधाओं के बारे में मिलिट्री ऑपरेशंस के महानिदेशक रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया से पूछा तो उन्होंने पलटकर सवाल किया कि यह पूछिए कि क्या सुविधा नहीं दी जा रही, तो बताना ज्यादा आसान होगा।
एक अलगाववादी की सुरक्षा में 20-25 सुरक्षाकर्मी
भाटिया ने कहा कि कश्मीर घाटी में एक अलगाववादी नेता पर 20 से लेकर 25 सुरक्षाकर्मी दिनरात अलर्ट रहते हैं। पाकिस्तान से जो फंड आ रहा है उसका हिसाब तो इस्लामाबाद ही दे सकता है, लेकिन इन अलगाववादियों को टैक्स पेयर्स की जेब से सुरक्षा देना समझ से परे है। ये तो आस्तीन में सांप पालने जैसा है।
अलगाववादी जमीन ज्यादा खरीदते हैं
पूर्व में एक आतंकी गिरोह से ताल्लुक रखने वाले और 2016 में आत्मसमर्पण कर चुके तारिक ने बताया कि अलगाववादी जमीन ज्यादा खरीदते हैं। क्योंकि यह प्रॉपर्टी आसानी से पकड़ में नहीं आती है। ये लोग अपने रिश्तेदारों के नाम से ये प्रॉपर्टी खरीदते हैं। कई लोग इस पर होटल या घर का पक्का निर्माण नहीं करवाते। इनमें सेब और अखरोट जैसे फलों की खेती करवाते हैं ताकि प्रॉपर्टी सुरक्षित रहे। हर साल घाटी में करीब 20 प्रतिशत की दर से प्रॉपर्टी के रेट बढ़ते हैं। इस तरह ये जमीनों से मोटा मुनाफा कमाते हैं।
भारी सुरक्षा : मीरवाइज की सुरक्षा पर 5 करोड़
पिछले साल फरवरी में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर सालाना 10.88 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यह राज्य में कई तरह की वीवीआईपी सुरक्षा पर खर्च होने वाले बजट का करीब 10′ है। मीरवाइज उमर फारुख की सुरक्षा सबसे मजबूत है। उसकी सुरक्षा में डीएसपी रैंक के अधिकारी हैं। उसके सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर पिछले एक दशक में 5 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं।

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