Friday , 16 November 2018
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महापौर व पार्षदों की पुलिस से झड़प

मेले में मान-सम्मान नहीं मिलने पर मुख्य सचिव से मिलने पहुंचे महापौर व पार्षदों की पुलिस से झड़प
एसपी ने कहा गिरफ्तार कर लूंगा
उदयपुर। नगर निगम में दशहरा-दीपावली मेले में महापौर और पार्षदों को मान-सम्मान नहीं मिलने पर शुक्रवार को महापौर के नेतृत्व में पार्षद राजस्थान के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, मुख्य सचिव और दिल्ली से आए देश के उप निर्वाचन अधिकारी को शिकायत करने गए। जहां पर दो घंटे से भी अधिक समय बैठनेे के बाद भी पुलिस अधिकारियों ने पांच पार्षदों को छोड़कर सभी को बाहर जाने को कहा तो पार्षद भड़क गए और विवाद हो गया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक के साथ महापौर की जोरदार बहस हो गई। पुलिस अधीक्षक ने सभी पार्षदों को गिरफ्तार करने की चेतावनी दी तो महापौर ने हंगामा खड़ा कर दिया। इस दौरान बीच-बचाव में आए पार्षदों और पुलिस के बीच में झड़प हो गई। इस पर भी निर्वाचन विभाग के अधिकारियों ने आचार संहिता का हवाला देते हुए महापौर के नेतृत्व में पांच पार्षदों का एक प्रतिनिधिमण्डल प्रदेश के मुख्य सचिव से मिला और पत्र दिया, जिसमें मेले में की जा रही सारी गतिविधियों की जानकारी दी। इस पर मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टर को शीघ्र से शीघ्र मामले का निपटारा करने के लिए कहा।
सूत्रों के अनुसार नगर निगम की ओर से आयोजित किए जा रहे दशहरा-दीपावली मेले में इस बार आचार संहिता के कारण काफी सख्ती बरती जा रही है। स्थिति यह हो गई है कि पार्षदों को बाहर धक्के खाने पड़ रहे है। मेले को लेकर निगम के अधिकारियों ने किसी भी पार्षद को निमंत्रण नहीं दिया और ना ही पर्याप्त मान-सम्मान दिया जा रहा है। इसी को लेकर पार्षद काफी नाराज चल रहे है। भारत निर्वाचन आयोग के उपायुक्त संदीप सक्सेना, राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार, मुख्य सचिव डीबी गुप्ता के उदयपुर आने पर इस संबंध में शिकायत करने पर महापौर चन्द्रसिंह कोठारी के नेतृत्व में राकेश पोरवाल, रोबिन सिंह, ओम चित्तौड़ा, प्रवीण मारवाड़ी, हंसा माली, जगदीश मेनारिया, लवदेव बागड़ी, रेखा जैन, मीरा मीणा, शोभा मेहता, राजेश वैरागी, सुरेश सिंह, नजमा मेवाफरोश, रेखा जैन, हेमा भावसार सहित कई पार्षद महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय में चल रही समीक्षा बैठक में गए थे, हालांकि दोपहर को ही भारत निर्वाचन आयोग के उपायुक्त संदीप सक्सेना, राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार जयपुर और दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे।
महापौर के नेतृत्व में गए पार्षदों को जाते ही जिला कलेक्टर बिष्णुचरण मल्लिक और एसपी कुँवर राष्ट्रदीप मिले। कलेक्टर ने महापौर के पास से पत्र ले लिया और समीक्षा बैठक में चले गए। इस पर महापौर सभी पार्षद प्रदेश के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता से मिलने के लिए वेटिंग रूम में ही बैठ गए। जहां पर करीब डेढ़ घंटे बद उदयपुर जिला पुलिस अधीक्षक कुँवर राष्ट्रदीप और प्रशासनिक अधिकारी एमएल चौहान आए और आते ही वेटिंग रूम में बैठे महापौर चन्द्रसिंह कोठारी और पार्षदों से कहा कि केवल पांच पार्षदों का प्रतिनिधिमण्डल मिलने के लिए चले और शेष पार्षद बाहर चले जाए। इसी को लेकर विवाद हो गया और सभी पार्षद मुख्य सचिव डीबी गुप्ता से मिलने पर अड़ गए। इसी को लेकर महापौर और एसपी के बीच में बहस हो गई। महापौर कोठारी अड़ गए कि जब पार्षद मेरे साथ आए है तो मेरे साथ ही जाएंगे। महापौर ने कहा कि किसी अधिकारी को जनप्रतिनिधियों से मिलने में क्या दिक्कत है। इस पर एसपी राष्ट्रदीप ने कहा कि ”धारा 144 लग रही है और आप लोग इतने सारे एक साथ अंदर कैसे आ गए। इस पर महापौर कोठारी ने कहा कि कर लो गिरफ्तार, कोई अपराध नहीं किया है। इस पर एसपी ने कहा कि ओर भी धाराएं है, जिसमें गिरफ्तारी हो सकती है। इस पर चन्द्रसिह कोठारी ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि है, कोई चोर, लुटेरे या हिस्ट्रीशीटर नहीं है। इन लोगों को कैसे गिरफ्तार कर सकते हो।ÓÓ बहस के दौरान एमएल चौहान बीच-बचाव में आए तो भी वे भी उलझ गए।
बताया जा रहा है कि इस दौरान पुलिस अधिकारी द्वारा महापौर का हाथ पकड़ लिया गया था, इसे देखकर पार्षद राकेश पोरवाल ने विरोध किया। राकेश पोरवाल के जोर-जोर से बोलने पर वहां पर आईजी विशाल बंसल आए और उन्होंने मामले को संभाला। इधर पुलिसकर्मियों ने भी पूरी तैयारी कर ली थी, परन्तु आईजी के आने से एसपी कुँवर राष्ट्रदीप वेटिंग रूम से बाहर निकल गए और साथ में आए अधिकारियों को राकेश पोरवाल को वहां से ले जाने के लिए कहा। इस पर पुलिस अधिकारी जबरन राकेश पोरवाल को पकड़कर बाहर लेकर गए और जीप में बैठाकर प्रतापनगर थाने पर लेकर गए। इधर राकेश पोरवाल को ले जाने का सभी पार्षदों ने विरेाध किया और राकेश पोरवाल को पुन: लाने पर अड़ गए। वहां पर मौजूद महिला पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। यह देखकर पुलिस अधिकारियों ने महिला पुलिस जवानों को बुला लिया। इस दौरान स्वयं महापौर ने पुलिस-प्रशासन हाय-हाय के नारे लगाए और पार्षदों ने भी उनका साथ दिया। करीब एक घंटे तक महापौर चन्द्रसिंह कोठारी के नेतृत्व में पार्षद वेटिंग रूम में ही धरने पर बैठे रहे और आखिरकार राकेश पोरवाल को प्रतापनगर थाने से पुन: बुलवाया गया।
इधर बाद में आईजी विशाल बंसल, जिला कलेक्टर बिष्णुचरण मल्लिक और पुलिस अधीक्षक कुँवर राष्ट्रदीप ने समीक्षा बैठक ले रहे मुख्य सचिव डीबी गुप्ता से बात की। इस पर गुप्ता ने केवल पांच पार्षदों के ही प्रतिनिधि मण्डल को भेजने के लिए कहा। इस पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने फिर से महापौर चन्द्रसिंह कोठारी से बात की और आचार संहिता के साथ-साथ धारा 144 का हवाला दिया। काफी समझाईश के बाद महापौर चन्द्रसिंह कोठारी के नेतृत्व में पांच पार्षद राकेश पोरवाल, सिद्धार्थ शर्मा, जगदीश मेनारिया मुख्य सचिव गुप्ता से मिले। इस दौरान सभी ने गुप्ता को एक पत्र भी दिया। इस पत्र को देखकर डीबी गुप्ता ने भी जिला कलेक्टर को उचित कार्यवाही के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों का उचित मान-सम्मान करने के निर्देश दिए और कहा कि मंच पर ना बुलाया जाए, परन्तु गरिमा का भी ध्यान रखा जावें। इसके बाद सभी पार्षद अपने-अपने घर पर चले गए।महापौर
बोलेहम हिस्ट्रीशीटर नहींपार्षदों की ओर से दिए गए पत्र में मंच के सामने बनाए गए डी क्षेत्र जो पत्रकार और निगम के अधिकारी- कर्मचारी के लिए रखा गया था, परन्तु वहां पर कर्मचारी अपने चहेतों को बैठा रहे है। वहीं पर राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों के नहीं घुसने का बैनर भी लगा रखा है। पत्र में मांग की गई कि डी में अधिकारियों ने किस-किस को बैठाया है और किस आधार पर। निगम द्वारा हर वर्ष मेले में पीले रंग का उपरणा ओढ़ाया जाता है, परन्तु इस बार अधिकारियों ने लाल रंग का उपरणा दिया जा रहा है, जो भाकपा/माकपा का चुनाव आयोग में पंजीकृत रंग है।
पार्षद राकेश पोरवाल को जबरन वेटिंग रूम से साथ लेकर प्रतापनगर थाना पुलिस प्रतापनगर थाने पर लेकर गई। पीछे से पार्षदों ने हंगामा करने पर राकेश पोरवाल को पुन: लाने के आदेश देने पर प्रतापनगर से पुन: लाया गया और पार्षदों के साथ बैठाया गया।
और बनावों पुलिस लाईन में टंकियां
राकेश पोरवाल के पुन: आते ही सभी पार्षदों ने एक स्वर में टोन मारा कि ‘पोरवाल साहब पुलिस लाईन में ओर टंकियां बनवो। यो नतीजों मिल रियो है आपने।Ó हालांकि पोरवाल ने कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप महापौर के पास जाकर बैठ गए।
पूरी तैयारी में थे पुलिस अधिकारी
ये तो आईजी विशाल बंसल अचानक बीच में आ गए और उन्होंने महापौर से बात करनी शुरू कर दी। इसी कारण पुलिस के अन्य अधिकारी भी शांत हो गए। अन्यथा एक बार तो यह माहौल हो गया था कि पुलिस बल प्रयोग करने वाली है। पुलिस ने इसकी तैयारी भी कर ली थी।

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