Wednesday , 21 August 2019
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मदर टेरेसा बनीं ‘संत टेरेसा’

vetican_cityवेटिकन सिटी। गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए जीवन समर्पित करने वाली विश्व विख्यात नन मदर टेरेसा को रविवार को संत की उपाधि से नवाजा गया। ईसाइयों के धर्मगुरू पोप फ्रांसिस ने करीब एक लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी में एक सामूहिक कैननाइजेशन सभा में मदर टेरेसा को संत की उपाधि दी। इस दौरान सेंट पीटर्स बेसीलिका पर मदर टेरेसा की एक बड़ी तस्वीर लगाई गई थी, जिसमें वह नीचे लोगों की ओर देखते हुए मुस्कुराती प्रतीत हो रही थीं। मदर टेरेसा को संत की उपाधि उनकी 19वीं पुण्यतिथि से एक दिन पहले दी गई है।
इस ऐतिहासिक मौके का गवाह बनने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 12 सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल के साथ वेटिकन सिटी में मौजूद थीं। केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के अलावा दिल्ली और पश्चिम बंगाल से दो राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी रोम में थे, जिनका नेतृत्व क्रमश: अरविन्द केजरीवाल और ममता बनर्जी कर रही थीं।
भारत की मदर टेरेसा का निधन 87 साल की उम्र में कोलकाता में हुआ था। अपना वयस्क जीवन उन्होंने यहीं गुजारा था। अपना पहला अध्यापन और फिर गरीबों की सेवा का काम भी उन्होंने इसी शहर में शुरू किया था।
गरीबों की सेवा के काम ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की प्रमुख रहीं मदर को धरती की सबसे मशहूर महिलाओं में से एक बना दिया। मेसेडोनिया की राजधानी स्कोप्ये में कोसोवर अलबानियाई माता-पिता के यहां जन्मी मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। उन्हें 1980 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया।
उन्हें दुनियाभर में आत्म बलिदान एवं कल्याण से जुड़े ईसाई मूल्यों की एक मिसाल के तौर पर देखा गया। धर्मनिरपेक्ष आलोचक मदर टेरेसा की आलोचना भी करते रहे। उनका आरोप था कि मदर टेरेसा को गरीबों की स्थिति में सुधार लाने के बजाय धर्मप्रचार की ज्यादा चिंता थी। नन की विरासत को लेकर बहस उनके निधन के बाद भी जारी रही।
पोप फ्रांसिस जब रविवार को ‘गरीबों के लिए गरीब चर्चÓ के अपने दृष्टिकोण को साकार करने वाली इस महिला को श्रद्धांजलि दे रहे थे तब संशयवादी लोग वेटिकन में मौजूद नहीं थे।

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